कैमूर में सात महीने से खराब चापाकल, पानी के लिए तरस रहे न्यू प्राथमिक विद्यालय हसनपुरा के बच्चे
विद्यालय स्थित खराब चपाकल की तस्वीर
Kaimur News : कैमूर के हसनपुरा प्राथमिक विद्यालय में 7 महीने से चापाकल खराब है. मासूम बच्चे घर से पानी लाने को मजबूर हैं, मिड-डे मील पर भी संकट गहराया हुआ है.
Kaimur News : कैमूर जिले के भभुआ प्रखंड मुख्यालय से महज डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित सीवो पंचायत के न्यू प्राथमिक विद्यालय हसनपुरा में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. विद्यालय का चापाकल पिछले सात महीने से खराब पड़ा है. इसके कारण नन्हे-मुन्ने बच्चों को घर से पानी की बोतल लेकर स्कूल आना पड़ रहा है. बोतल का पानी खत्म होने के बाद कई बच्चे पढ़ाई बीच में छोड़कर घर लौटने को मजबूर हो जाते हैं.
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सात महीने से खराब है विद्यालय का चापाकल
विद्यालय परिसर में पेयजल का एकमात्र सहारा चापाकल था, जो करीब सात महीने पहले खराब हो गया. इसके बाद अब तक उसकी मरम्मत नहीं करायी गयी और न ही पेयजल के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गयी. सबमर्सिबल या अन्य जलस्रोत उपलब्ध कराने की दिशा में भी कोई पहल नहीं हुई है. ऐसे में छोटे बच्चों को रोजाना घर से पानी लेकर स्कूल आना पड़ रहा है.
पानी खत्म होते ही घर लौट जाते हैं बच्चे
गर्मी और उमस के बीच बच्चों की पानी की जरूरत बढ़ जाती है. स्कूल में पेयजल की सुविधा नहीं होने के कारण जब बच्चों की बोतल का पानी खत्म हो जाता है, तो कई बच्चे पढ़ाई छोड़कर घर लौट जाते हैं. इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है. साथ ही, कम उम्र के बच्चों के लिए पानी की व्यवस्था का जिम्मा खुद उठाना भी विद्यालय की बुनियादी सुविधाओं पर सवाल खड़ा करता है.
मध्यान भोजन बनाने में भी हो रही परेशानी
पेयजल संकट का असर विद्यालय में संचालित मध्यान भोजन योजना पर भी पड़ रहा है. जानकारी के अनुसार, पिछले सात महीनों से मध्यान भोजन बनाने वाली रसोइया गांव के घरों से पानी मांगकर भोजन तैयार कर रही है. इस तरह किसी तरह मध्यान भोजन योजना का संचालन किया जा रहा है. पानी के अभाव में विद्यालय के नियमित संचालन पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है.
प्रधानाध्यापक ने कई विभागों को भेजे आवेदन
विद्यालय के प्रधानाध्यापक प्रवीण कुमार पांडे ने समस्या के समाधान के लिए कई स्तरों पर शिकायत और पत्राचार किया है. उन्होंने लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के कार्यपालक अभियंता और सहायक अभियंता को पत्र भेजकर चापाकल की मरम्मत कराने की मांग की. इसके अलावा जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, मध्यान भोजन को भी आवेदन देकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गयी.
शिक्षा विभाग के पत्राचार के बाद भी नहीं हुआ समाधान
बताया जाता है कि जिला शिक्षा पदाधिकारी, कैमूर और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, मध्यान भोजन की ओर से भी इस संबंध में पत्र जारी किए जा चुके हैं. इसके बावजूद सात महीने बीत जाने के बाद भी विद्यालय में पेयजल की समस्या का समाधान नहीं हो सका है. विभागीय पत्राचार के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से विद्यालय प्रबंधन और बच्चों के अभिभावकों में नाराजगी है.
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सहयोग पोर्टल और लोक शिकायत में भी दर्ज करायी शिकायत
विद्यालय प्रबंधन ने समस्या को लेकर सहयोग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के साथ ही लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के समक्ष भी मामला उठाया है. इसके बावजूद विद्यालय परिसर में खराब पड़ा चापाकल अब भी बच्चों की परेशानी का कारण बना हुआ है. प्रधानाध्यापक ने बताया कि पेयजल की व्यवस्था के लिए लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, जिला शिक्षा पदाधिकारी और लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी तक कई बार आवेदन दिया गया, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई.
पढ़ाई और मध्यान भोजन दोनों हो रहे प्रभावित
प्रधानाध्यापक प्रवीण कुमार पांडे ने कहा कि पानी के अभाव में बच्चों की पढ़ाई, मध्यान भोजन और विद्यालय का नियमित संचालन गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है. उन्होंने संबंधित विभाग से जल्द से जल्द चापाकल की मरम्मत कराने अथवा विद्यालय में वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है. सात महीने से चली आ रही इस समस्या के बीच अब यह सवाल उठ रहा है कि शिकायतों और विभागीय पत्राचार के बावजूद विद्यालय में पेयजल की सुविधा बहाल करने में इतनी देरी क्यों हो रही है.
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