Kaimur News : कैमूर के प्रसिद्ध मां मुंडेश्वरी धाम में बदला आरती का समय, जानें पूजा का समय
Published by : JITENDRA KUMAR Updated At : 15 Jun 2026 6:00 AM
मां मुंडेश्वरी मंदिर
Kaimur News बिहार का कैमूर जिला अपनी धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए पूरे देश में एक अलग पहचान रखता है. यहां कई प्राचीन और प्रसिद्ध देवी-देवताओं के मंदिर स्थित हैं
Kaimur News : अमित कुमार सिन्हा की रिपोर्ट : बिहार का कैमूर जिला अपनी धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए पूरे देश में एक अलग पहचान रखता है. यहां कई प्राचीन और प्रसिद्ध देवी-देवताओं के मंदिर स्थित हैं, जिनमें भगवानपुर की पवरा पहाड़ी पर स्थित आदि शक्तिपीठ माता मुंडेश्वरी का मंदिर सबसे प्रमुख और सुविख्यात है. इस अति प्राचीन मंदिर में ऋतुओं के अनुसार पूजा और आरती का समय बदला जाता है. इसी क्रम में ग्रीष्म ऋतु (गर्मी के मौसम) को देखते हुए माता की आराधना और महाआरती का नया समय तय किया गया है .
आज सुबह घंटे-घड़ियाल के बीच लगी माता की हाजिरी
मंदिर के मुख्य पुजारी उमेश प्रसाद मिश्र ने बताया कि आज 15 जून को सुबह 6.00 बजे मंदिर के कपाट खुलने के बाद विशेष साफ-सफाई कराई गई. इसके ठीक बाद, सुबह 6.30 बजे घंटे-घड़ियाल और शंखध्वनि के बीच माता की भव्य आरती हुई, उन्हें विशेष भोग लगाया गया और विधि-विधान से आराधना की गई. इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन और सुबह की आरती के साक्षी बनने पहुंचे थे. इसके साथ ही, सोमवार का दिन होने के कारण मंदिर परिसर में स्थापित प्राचीन पंचमुखी शिवलिंग की भी विशेष पूजा और आरती की गई .
गर्मियों में तीन समय होगी आरती, तांडुलम’ है मुख्य प्रसाद
मुख्य पुजारी उमेश प्रसाद मिश्र के अनुसार, भीषण गर्मी को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा और परंपरा के अनुसार ग्रीष्म ऋतु में तीन समय की आरती का समय इस प्रकार निर्धारित किया गया है:
सुबह की आरती:प्रातः 6.30 बजे (भोग और आराधना के साथ) .
दोपहर की आरती: अपराह्न 11.30 बजे .
संध्या आरती: शाम 6.30 बजे (जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं) .
क्या आप जानते हैं? माता मुंडेश्वरी मंदिर का मुख्य और सबसे पवित्र प्रसाद ‘तांडुलम'(अक्षत/चावल) है, जिसे माता के मुख्य भोग के रूप में चढ़ाया जाता है और श्रद्धालुओं के बीच वितरित किया जाता है .
नवरात्र में उमड़ता है आस्था का सैलाब
माता मुंडेश्वरी मंदिर धार्मिक न्यास के सचिव गोपाल जी प्रसाद ने जानकारी दी कि बदलते मौसम और ऋतुओं की अनुकूलता को देखते हुए ही मंदिर में पूजा-आरती का समय तय किया जाता है. इस ऐतिहासिक मंदिर की महिमा इतनी अटूट है कि हर साल शारदीय और चैत्र नवरात्र के दौरान यहां देश के कोने-कोने के साथ-साथ विदेशों से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु माता मुंडेश्वरी के दरबार में शीश नवाने और मन्नतें मांगने आते हैं .
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