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सीएम की प्रगति यात्रा का विरोध करने का निर्णय किसानों ने लिया वापस

वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे के निर्माण में अधिग्रहित भूमि का उचित मुआवजा नहीं मिलने को लेकर कैमूर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रस्तावित प्रगति यात्रा का विरोध करने का निर्णय किसानों ने जिलाधिकारी के आश्वासन पर रद्द कर दिया है

भभुआ. वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे के निर्माण में अधिग्रहित भूमि का उचित मुआवजा नहीं मिलने को लेकर कैमूर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रस्तावित प्रगति यात्रा का विरोध करने का निर्णय किसानों ने जिलाधिकारी के आश्वासन पर रद्द कर दिया है. इधर, इसे लेकर मंगलवार को जिला प्रशासन के बुलावे पर किसान संघों का एक शिष्टमंडल जिलाधिकारी से मिला. गौरतलब है कि चार दिन पहले रविवार को किसानों ने यह घोषणा की थी कि अधिग्रहित भूमि का उचित मुआवजा नहीं मिलने को लेकर किसान मुख्यमंत्री के कैमूर में होने वाली प्रगति यात्रा का काला झंडा लेकर विरोध करेंगे. इधर, इस संबंध में मंगलवार को प्रतिनिधिमंडल में शामिल किसान संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष विमलेश पांडेय, महासचिव पशुपति नाथ सिंह पारस, सचिव अनिल सिंह, भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष अभिमन्यु सिंह, सचिव रामाकांत पांडेय आदि ने बताया कि मुख्यमंत्री की प्रगति यात्रा के विरोध के निर्णय को लेकर स्वयं जिलाधिकारी द्वारा किसान नेताओं से फोन पर तथा अनुमंडल पदाधिकारी भभुआ द्वारा सचिव के गांव जाकर अनुरोध किया गया है कि विरोध करने से क्या फायदा है, मिलजुल कर हमलोग इस समस्या को हल करेंगे. इसके बाद जिला प्रशासन के बुलावे पर शिष्टमंडल द्वारा मंगलवार को जिलाधिकारी के कक्ष में उनसे मुलाकात कर अपने उचित मुआवजा की बात उनके सामने रखी गयी. इस आलोक में डीएम द्वारा दिये गये आश्वासन के बाद मुख्यमंत्री की प्रगति यात्रा का विरोध करने का निर्णय रद्द कर दिया गया है, लेकिन उचित मुआवजा नहीं मिलने तक अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा. इधर, डीएम से मिलने के बाद किसान नेताओं ने बताया कि किसान संघों के शिष्टमंडल को जिलाधिकारी द्वारा आश्वासन दिया गया कि जब तक वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे निर्माण में एक-एक किसानों को उनके अधिग्रहित भूमि का उचित मुआवजा नहीं मिल जाता है, तब तक कैमूर में एक्सप्रेसवे का निर्माण नहीं शुरू कराया जायेगा. जिला प्रशासन उनके साथ है. नेताओं ने बताया कि किसान अपने उचित मुआवजा को लेकर अगर पटना आर्बिट्रेटर कोर्ट में अपील करने के लिए तैयार है, तो जिला प्रशासन किसानों आर्बिट्रेटर कोर्ट तक जाने की व्यवस्था करायेगा. गौरतलब है कि आर्बिट्रेटर कोर्ट द्वारा सर्किल रेट दोगुना कर किसानों को मुआवजा का भुगतान करने के निर्णय को भी किसानों ने नाकाफी बताया है. किसान एक करोड़ 28 लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजा की मांग कर रहे हैं. इधर, किसान नेता विमलेश पांडेय ने मांग की कि किसानों के दर्द को अगर साझा करना है तो मुख्यमंत्री स्वयं धरना स्थल पर आकर किसानों के दर्द को जाने और उनसे बात करें.

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