अरवल में फूड इंस्पेक्टर और कार्यालय का अभाव, मिलावटी खाद्य पदार्थों पर नहीं लग रही लगाम

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जिला कार्यालय

अरवल जिले में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था संसाधनों के अभाव से जूझ रही है. जिले में न तो पर्याप्त अधिकारी-कर्मचारी हैं और न ही अलग से कार्यालय, जिससे मिलावटखोरी पर अंकुश लगाना मुश्किल हो गया है. इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है.

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अरवल: अरवल जिले में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था संसाधनों के अभाव से जूझ रही है. जिले में खाद्य पदार्थों की जांच के लिए न तो अलग से कार्यालय है और न ही पर्याप्त अधिकारी एवं कर्मी तैनात हैं. ऐसे में खाद्य पदार्थों की नियमित जांच नहीं हो पा रही है, जिससे मिलावटखोरी पर प्रभावी नियंत्रण नहीं लग पा रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इसका असर आम उपभोक्ताओं की सेहत पर पड़ रहा है.

एक फूड इंस्पेक्टर के जिम्मे चार जिले

जानकारी के अनुसार, अरवल के लिए एक फूड सेफ्टी अधिकारी की प्रतिनियुक्ति है, लेकिन उनके पास बक्सर, कैमूर, रोहतास और अरवल—चार जिलों का प्रभार है. ऐसे में अरवल में नियमित निरीक्षण और सैंपल जांच कर पाना चुनौतीपूर्ण हो गया है.

फूड सेफ्टी अधिकारी अनिल कुमार ने बताया कि विभाग की ओर से वाहन और पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध नहीं कराया गया है. साथ ही अरवल में कार्यालय नहीं होने के कारण दूसरे जिले से आने-जाने में ही पूरा दिन निकल जाता है, जिससे नियमित जांच प्रभावित होती है.

खुले और पैक खाद्य पदार्थों की बिक्री पर निगरानी कमजोर

जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में खुले खाद्य पदार्थों के साथ-साथ पैक उत्पाद भी बड़ी संख्या में बिक रहे हैं. स्थानीय स्तर पर कई ऐसे ब्रांडों के उत्पाद बाजार में उपलब्ध हैं, जिनके पंजीकरण को लेकर लोगों में सवाल उठते रहे हैं. नियमित जांच नहीं होने से उपभोक्ताओं के लिए गुणवत्ता की पुष्टि करना कठिन हो जाता है.

स्थानीय बाजारों में तेल, मसाले, पनीर और मिठाइयों जैसे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर भी समय-समय पर उपभोक्ताओं द्वारा चिंता जताई जाती रही है.

जनस्वास्थ्य पर पड़ सकता है असर

खाद्य विशेषज्ञों के अनुसार, मिलावटी या निम्न गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों का लगातार सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है. लोगों का कहना है कि नियमित जांच और सख्त कार्रवाई से ही ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है.

डॉक्टर ने क्या कहा

सदर अस्पताल के डॉक्टर पंकज कुमार ने बताया कि अस्पताल में प्रतिदिन डायरिया के लगभग तीन से चार मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं. उन्होंने कहा कि भोजन और पेयजल की स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी है तथा किसी भी प्रकार के संदिग्ध या खराब गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए.

स्थानीय लोगों की मांग

स्थानीय लोगों ने जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग का स्थायी कार्यालय स्थापित करने, पर्याप्त फूड इंस्पेक्टर और कर्मियों की तैनाती करने तथा बाजारों में नियमित जांच अभियान चलाने की मांग की है, ताकि मिलावटखोरी पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके.

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