Bankipur By Election Result: 1995 से बीजेपी का अभेद्य किला है बांकीपुर, जानिए 1957 से लेकर अब तक कौन-कौन बना विधायक

नितिन नवीन
Bankipur By Election Result: बिहार की सबसे चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास बेहद दिलचस्प रहा है. 1995 से यह सीट बीजेपी का मजबूत गढ़ रही है, लेकिन 1985 में निर्दलीय प्रत्याशी की जीत जैसे बड़े उलटफेर भी यहां हो चुके हैं. जानिए 1957 से अब तक का पूरा सियासी सफर.
Bankipur By Election Result: बांकीपुर उपचुनाव में जन सुराज के प्रशांत किशोर, भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा और राजद की रेखा गुप्ता के बीच मुकाबला है. ऐसे में सबकी नजरें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और प्रशांत किशोर की साख पर भी टिकी हैं.
आज की बांकीपुर विधानसभा सीट पहले पटना पश्चिम के नाम से जानी जाती थी. 2008 में परिसीमन के बाद इसका नाम बदलकर बांकीपुर कर दिया गया. इस सीट पर पहला चुनाव 1957 में हुआ था. तब कांग्रेस के रामशरण साव पहले विधायक बने. इसके बाद 1962 में कांग्रेस के कृष्ण बल्लभ सहाय ने जीत दर्ज की.
कई बार बदला चुनावी समीकरण
1967 में महामाया प्रसाद सिन्हा इस सीट से विधायक बने. उनके इस्तीफे के बाद 1969 के उपचुनाव में सीपीआई के ए.के. सेन ने जीत हासिल की. 1972 में सीपीआई के सुनील मुखर्जी विधायक बने. 1977 में जनता पार्टी के ठाकुर प्रसाद ने चुनाव जीता. इसके बाद 1980 में कांग्रेस के रणजीत सिन्हा ने फिर यह सीट कांग्रेस के नाम कर दी.
1985 में हुआ बड़ा उलटफेर
बांकीपुर के चुनावी इतिहास में बड़ा उलटफेर 1985 में देखने को मिला. निर्दलीय उम्मीदवार रामानंद यादव ने सभी बड़ी पार्टियों को हराकर जीत दर्ज की. आज भी इस चुनाव को इस सीट का सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर माना जाता है.
1995 से भाजपा का मजबूत गढ़ बनी सीट
1995 के विधानसभा चुनाव से इस सीट की राजनीति पूरी तरह बदल गई. भाजपा के नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा ने जीत दर्ज की. इसके बाद उन्होंने 2000, फरवरी 2005 और अक्टूबर 2005 के चुनाव भी लगातार जीते. इस तरह पटना पश्चिम भाजपा का मजबूत गढ़ बन गई.
नितिन नवीन ने आगे बढ़ाया जीत का सिलसिला
2006 में नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के निधन के बाद हुए उपचुनाव में उनके बेटे नितिन नवीन पहली बार विधायक बने. 2008 में सीट का नाम बदलकर बांकीपुर हो गया, लेकिन भाजपा की जीत का सिलसिला जारी रहा. नितिन नवीन ने 2010, 2015, 2020 और 2025 के विधानसभा चुनाव भी लगातार जीते.
जीत का अंतर भी लगातार रहा बड़ा
2010 के चुनाव में नितिन नवीन ने 60840 वोटों से जीत दर्ज की. 2015 में उन्होंने 39767 वोटों से जीत हासिल की. 2020 में जीत का अंतर 39036 वोट रहा. वहीं 2025 में उन्हें 63 प्रतिशत वोट मिले और उन्होंने राजद उम्मीदवार को 51 हजार से ज्यादा वोटों से हराया. इससे साफ है कि तीन दशक से ज्यादा समय से इस सीट पर भाजपा का दबदबा बना हुआ है.
कई बड़े नेताओं को यहां मिली हार
बांकीपुर सीट पर कई बड़े नेताओं को हार का सामना भी करना पड़ा है. 2020 के विधानसभा चुनाव में अभिनेता लव सिन्हा भाजपा के नितिन नवीन से हार गए थे. उसी चुनाव में पुष्पम प्रिया चौधरी भी यहां से मैदान में उतरीं, लेकिन जीत नहीं सकीं.
पूर्व मुख्यमंत्री कृष्ण बल्लभ सहाय भी इस क्षेत्र से चुनाव हार चुके हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री राम कृपाल यादव भी पटना पश्चिम सीट से हार का सामना कर चुके हैं. अक्टूबर 2005 में कांग्रेस के राजेश कुमार को भी भाजपा के नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा ने हराया था.
क्या इस बार बदलेगा चुनावी इतिहास?
बांकीपुर उपचुनाव के बाद एक बार फिर इस सीट पर पूरे बिहार की नजर है. भाजपा पिछले 30 साल से ज्यादा समय से यहां लगातार जीत रही है. दूसरी ओर प्रशांत किशोर ने इस चुनाव को अपनी राजनीतिक साख से जोड़ दिया है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भाजपा अपना रिकॉर्ड कायम रखेगी या फिर 1985 की तरह बांकीपुर एक नया चुनावी इतिहास लिखेगा. इसका जवाब मतगणना पूरी होने के बाद मिलेगा.
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कौन नेता कब बना विधायक
बांकीपुर विधानसभा सीट (पहले पटना पश्चिम) पर 1957 में कांग्रेस के रामशरण साव पहले विधायक बने. 1962 में कांग्रेस के कृष्ण बल्लभ सहाय ने जीत दर्ज की. 1967 में महामाया प्रसाद सिन्हा विधायक चुने गए. उनके इस्तीफे के बाद 1969 के उपचुनाव में सीपीआई के ए.के. सेन जीते. 1972 में सीपीआई के सुनील मुखर्जी ने जीत हासिल की.
1977 में जनता पार्टी के ठाकुर प्रसाद विधायक बने. 1980 में कांग्रेस के रणजीत सिन्हा ने सीट वापस कांग्रेस के खाते में लाई. 1985 में निर्दलीय उम्मीदवार रामानंद यादव ने बड़ा उलटफेर करते हुए चुनाव जीता.
इसके बाद 1995, 2000, फरवरी 2005 और अक्टूबर 2005 में भाजपा के नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा लगातार विजयी रहे. उनके निधन के बाद 2006 के उपचुनाव में नितिन नवीन पहली बार विधायक बने. इसके बाद 2010, 2015, 2020 और 2025 के विधानसभा चुनाव में भी नितिन नवीन लगातार जीत दर्ज करते रहे.
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By परितोष शाही
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