ePaper

फिट युवा ही भारत को वैश्विक पहचान दिला सकते हैं : प्रो गौरीशंकर

Updated at : 29 Aug 2025 9:16 PM (IST)
विज्ञापन
फिट युवा ही भारत को वैश्विक पहचान दिला सकते हैं : प्रो गौरीशंकर

हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की 120 वीं जयंती पर शुक्रवार को केकेएम कॉलेज में युवाओं के व्यक्तित्व और राष्ट्र निर्माण में खेल की भूमिका विषय पर एक विचार गोष्ठी आयोजित हुई.

विज्ञापन

जमुई. हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की 120 वीं जयंती पर शुक्रवार को केकेएम कॉलेज में युवाओं के व्यक्तित्व और राष्ट्र निर्माण में खेल की भूमिका विषय पर एक विचार गोष्ठी आयोजित हुई. कार्यक्रम की अध्यक्षता क्रीड़ा परिषद अध्यक्ष प्रो गौरी शंकर पासवान ने की. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि खेल रोजगार और आर्थिक विकास का वातायन है. यह अनुशासन और मनोरंजन का विश्वविद्यालय है. खेल जीवन का संगीत, चरित्र निर्माण की प्रयोगशाला और राष्ट्र निर्माण की कुंजी है. फिट और ऊर्जावान युवा ही भारत को वैश्विक पहचान दिला सकते हैं. उन्होंने कहा कि खेल है उमंग, खेल है जान, खेल से ही बनेगा भारत महान. उन्होंने बताया कि खेल उद्योग का कुल बाजार लगभग 16,000 करोड़ का है और इसका भारत की जीडीपी में 0.9 प्रतिशत योगदान है. खेल उद्योग रोजगार का एक उभरता हुआ क्षेत्र है. प्रो पासवान ने मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न देने की पुरजोर मांग करते हुए कहा कि वे हॉकी के क्षेत्र में भारत के गौरव थे. उनकी बॉल कंट्रोल की कला और गोल स्कोरिंग क्षमता अद्वितीय थी. उन्होंने 1928, 1932 और 1936 के ओलंपिक में भारत को गोल्ड मेडल दिलाया. उन्होंने क्रिकेट के दिग्गज डॉन ब्रैडमैन के उस कथन का उल्लेख किया जिसमें ब्रैडमैन ने कहा था, तुम गोल वैसे करते हो जैसे हम रन बनाते हैं. कार्यक्रम में खेल परिषद के पूर्व अध्यक्ष प्रो सरदार रॉय ने कहा कि खेल सफलता और सहयोग का सूत्रधार है. यह शारीरिक पुष्टता के साथ मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर करता है. रसायन विज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ एसके झा ने कहा कि खेल जीवन जीने का एक बेहतर तरीका है. जो खेलेगा वही खिलेगा का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को एक खेल को अपने जीवन में शामिल करना चाहिए. वहीं राजनीतिक विज्ञान की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ डीके गोयल ने कहा कि तकनीकी युग और मोबाइल के बढ़ते उपयोग ने युवाओं को निष्क्रिय बना दिया है. ऐसे में खेल ही एकमात्र ऐसा माध्यम है जो युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय बनाता है. प्रो पासवान ने राष्ट्रीय खेल दिवस की प्रासंगिकता पर जोर दिया. कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षक, छात्र एवं खेल प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे. वक्ताओं ने मेजर ध्यानचंद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें युवाओं का प्रेरणा स्रोत बताया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
PANKAJ KUMAR SINGH

लेखक के बारे में

By PANKAJ KUMAR SINGH

PANKAJ KUMAR SINGH is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन