दुर्लभ पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण शुरू, संरक्षित होगी ऐतिहासिक विरासत

जिले की समृद्ध सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में प्रशासन ने बड़ी पहल शुरू की है.
जमुई. जिले की समृद्ध सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में प्रशासन ने बड़ी पहल शुरू की है. जिला पदाधिकारी श्री नवीन के निर्देश पर भारत ज्ञान मिशनम अभियान के तहत दुर्लभ पांडुलिपियों की खोज और डिजिटलीकरण का कार्य तेज कर दिया गया है. इसी क्रम में जिला पांडुलिपि सर्वेक्षण समिति ने सर्च अभियान को गति देते हुए जमुई की दो ऐतिहासिक हस्तलिखित पांडुलिपियों को सफलतापूर्वक डिजिटल पोर्टल पर अपलोड किया है. इसे जिले के सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है. कला एवं संस्कृति पदाधिकारी विकेश कुमार, जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ मेनका कुमारी ने बताया कि अभियान को प्रभावी बनाने को लेकर मलयपुर और चौहानडीह सहित अन्य क्षेत्रों का दौरा कर प्रबुद्धजनों, साहित्यकारों व इतिहासकारों से संवाद किया जा रहा है. इस दौरान भास्कर सिंह, पूर्व प्राचार्य कृष्ण कांत मिश्रा, अमित कुमार सिंह, डॉ रवीश कुमार सहित अन्य कई प्रबुद्ध जनों से पांडुलिपियों के संरक्षण व तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की गयी. सर्वेक्षण के दौरान कई महत्वपूर्ण साहित्यिक धरोहरें भी सामने आयी हैं. इनमें जमुई के प्रसिद्ध लोक गायक स्व अर्जुन दास की हस्तलिखित रचनाएं तथा मगही के लोक कवि स्व राम पुकार सिंह की दुर्लभ डायरी शामिल है. साथ ही भारतेंदु युग के साहित्यकार स्व जगन्नाथ प्रसाद चतुर्वेदी के परिजनों ने भी अपनी पारिवारिक पांडुलिपियां साझा करने पर सहमति जताई है. जिला पदाधिकारी ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि जमुई की धरती सदैव से सांस्कृतिक और बौद्धिक चेतना से समृद्ध रही है. उन्होंने इस अभियान को जन-आंदोलन बनाने के लिए साहित्यकारों, पत्रकारों व आम नागरिकों से सहयोग की अपील की. उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल जिले की गौरवशाली परंपरा को संरक्षित करेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी विरासत से जोड़ते हुए उसे वैश्विक पहचान भी दिलाया जायेगा.
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