¹बरसात के दिनों में थम जाता है विकास

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हालात. बलियो नदी पर पुल नहीं होने के कारण छात्रों से लेकर किसानों तक को परेशानी तीन से चार माह तक दर्जनों गांव के लोगों को शिक्षा से लेकर चिकित्सा तक की परेशानी होती है. झाझा : बरसात के मौसम आते ही प्रखंड क्षेत्र के पश्चिमी भाग में बसा बलियो समेत दर्जनों गांव का विकास […]

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हालात. बलियो नदी पर पुल नहीं होने के कारण छात्रों से लेकर किसानों तक को परेशानी

तीन से चार माह तक दर्जनों गांव के लोगों को शिक्षा से लेकर चिकित्सा तक की परेशानी होती है.
झाझा : बरसात के मौसम आते ही प्रखंड क्षेत्र के पश्चिमी भाग में बसा बलियो समेत दर्जनों गांव का विकास रूक जाता है. बलियो नदी घाट पर पुल के नहीं होने के कारण तीन से चार माह तक दर्जनों गांव के लोगों को शिक्षा से लेकर चिकित्सा तक की परेशानी होती है. छात्र-छात्राएं विद्यालय नहीं आ पाते है वहीं किसान, दुग्ध सहित अन्य व्यवसायी वर्ग के लोगो को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. लगातार वारिश होने के कारण नदी में बाढ़ आ जाती है. जिस कारण बीमार हुए लोगो को चिकित्सक तक पहुंचाने में काफी दिक्कत होती है. कभी कभी चिकित्सा के आभाव में मरीज दम भी तोड़ देता है.
खासकर उक्त क्षेत्र में एक भी उच्च विद्यालय के नही रहने की वजह से छात्र -छात्राओं की पढ़ाई पूरे बरसात भर बंद हो जाता है. दूध का व्यवसाय करने वाले जान जोखिम में डाल कर नदी पार करते है. जिस कारण कई बार नदी की धार में बह जाने के कारण दुर्घटना भी हो जाती है. ग्रामीणों ने बताया कि बीते बुधवार को भी बलियो गांव का डगरू यादव, कैलाश यादव, चक्रधारी यादव बाढ़ के तेज धार में बह गया. जिसे ग्रामीणों के सहयोग से बचाया जा सका. पूरे बरसात में मौसम में ऐसी दुर्घटना इस घाट पर आम हो गयी है. ग्रामीण दाऊद खान, अमजद खान, राजेन्द्र कुमार, झुनझुन यादव, शीतल यादव, कपिलदेव यादव समेत कई लोगों ने बताया कि बरसात के दिनों में हमलोगों की जिंदगी नारकीय बन जाती है. चुनाव के समय चमचमाती गाड़ियों से वोट मांगने आते है. वे सभी जीत जाने के बाद सुधि लेने भी नहीं आते है. उनलोगों ने कहा यदि सरकार पुला बनाने को लेकर कुछ निर्णय नही लेती है तो हम दर्जन भर गांव के ग्रामीण चरणबद्ध आंदोलन करेंगे.
इलाज के आभाव में हो चुकी मौत : तीन दिनों से लगातार वारिश होने की वजह से बलियो नदी में बाढ़ आ गयी है. इसी क्रम में बलियो गांव के सुकदेव यादव की पत्नी की तबियत अत्यधिक खराब हो गयी. नदी में बाढ़ होने के कारण बेहतर ईलाज के लिए झाझा नहीं आ सके. इस कारण उनकी मौत हो गयी.
दूध बेचनेवालों तक को होती है परेशानी : दूध का व्यवसाय करने वाले व्यवसायी बताते है कि बरसात के दिनों में नदी में बाढ़ आ जाने के कारण दूध नहीं बिक पाता है. ऐसे में दूध का खपत करना मुश्किल हो जाता है. ऐसे हालात में हमसबों को आर्थिक क्षति उठाना पड़ती है.
बोले छात्र : दसवीं के छात्र मेराज खान ने कहा कि हम महात्मा गांधी विद्यालय में पढ़ते हैं. लेकिन बरसात के आते ही हमलोगों की पढ़ाई बाधित हो जाती है. दसवीं की छात्रा रूपा कुमारी ने बताया कि मैं बालिका उच्च विद्यालय में पढ़ती हूं. नदी में बाढ़ की वजह से तीन माह तक पढ़ाई नहीं कर पाती हूं. इससे पाठ्यक्रम पूरा करने में परेशानी होती है.
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