एक चापाकल से 437 लोग पीते हैं पानी

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पेयजलापूर्ति . 10 प्रखंडों के लिए बनायी गयी थीं 22 जलापूर्ति योजनाएं जिले की 19 लाख की आबादी को अब भी शुद्ध पेयजल नसीब नहीं हो पा रहा है. पीएचइडी द्वारा लगाये गये चापाकल ऊंट के मंह में जीरा साबित हो रहा है. अभी जिले में मात्र 23 हजार चापाकल ही चालू हालत में हैं. […]

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पेयजलापूर्ति . 10 प्रखंडों के लिए बनायी गयी थीं 22 जलापूर्ति योजनाएं

जिले की 19 लाख की आबादी को अब भी शुद्ध पेयजल नसीब नहीं हो पा रहा है. पीएचइडी द्वारा लगाये गये चापाकल ऊंट के मंह में जीरा साबित हो रहा है. अभी जिले में मात्र 23 हजार चापाकल ही चालू हालत में हैं.
जमुई : जिले में पीएचइडी द्वारा लगाया गया चापाकल हाथी दांत बन कर रह गया है और 19 लाख की आबादी की प्यास बुझाने के लिए मात्र 23 हजार चापाकल ही चालू हालत में हैं. जानकारी के अनुसार पूरे जिले में विभाग के पास 31 मार्च 2017 तक मात्र 27 हजार 256 चापाकल मौजूद होने का आंकड़ा उपलब्ध है. लेकिन वर्तमान समय में लगभग 4 हजार चापाकल खराब पड़ा हुआ है, जिसके कारण लोगों को पीने के लिए स्वच्छ पेयजल सही तरीके से नहीं मिल पा रहा है. विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2012-13 से लेकर 2015-16 तक मुख्यमंत्री चापाकल योजना के तहत जमुई नगर क्षेत्र में 180 चापाकल लगाया गया है
और झाझा नगर पंचायत क्षेत्र में 66 चापाकल लगाया गया है. लेकिन कई चापाकलों का कोई अता-पता भी नहीं है. विभाग द्वारा सभी 10 प्रखंडों में कुल 22 ग्रामीण पेयजलापूर्ति योजना की स्थापना की गयी थी, जिसमें से वर्तमान समय में मात्र 8 ग्रामीण पेयजलापूर्ति योजना ही चालू हालत में है. वहीं सदर प्रखंड क्षेत्र में इंदपै और अचहरी में एक-एक, सोनो प्रखंड में कुरकुट्टा, गिद्धौर प्रखंड में महुलीगढ़, गिद्धौर प्रखंड कार्यालय परिसर और धोवघट मुसहरी, बरहट में पतनेश्वर मंदिर परिसर तथा लभेत, सिकंदरा प्रखंड में शिवडीह तथा बसैया और सोनो प्रखंड में झुमराज बाबा मंदिर परिसर, झाझा प्रखंड में धमना और खैरा प्रखंड में पीएचइडी कार्यालय परिसर में एक मिनी पेयजलापूर्ति योजना कार्यरत है.
23 हजार चापाकल के िलए हैं 60 कर्मी
विभाग द्वारा 19 लाख लोगों की प्यास बुझाने के लिए मात्र 23 हजार चापाकल लगाया गया है, यानी 437 व्यक्ति पर एक चापाकल. यह ऊंट के मुंह में जीरा के समान है. वहीं विभाग के पास खराब पड़े चापाकलों को ठीक करने के लिए 50 से 60 कर्मी ही मौजूद हैं, जिनके भरोसे चापाकल का ससमय ठीक होना भी संभव नहीं है. विभागीय कर्मियों की माने तो सभी प्रखंडों में खराब पड़े चापाकल का ठीक करने के लिए कुल 10 टीम का गठन किया गया है और प्रत्येक टीम में तीन से पांच कामगार व सहायक कामगार को रखा गया है.
संसाधन के लिए उच्चाधिकारी को लिखा गया है
सीमित संसाधनों और उपलब्ध कर्मियों के बल बूते सभी खराब पड़े चापाकलों को दुरुस्त करने का प्रयास किया जा रहा है. इसके अलावा और अधिक संसाधन व कर्मी उपलब्ध कराने के लिए विभाग के उच्च अधिकारियों को लिखा गया है.
विदुशेखर प्रसाद, कार्यपालक अभियंता, पीएचइडी
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