वैशाली में शिशकोहरा की बंपर फसल, खरीदार नहीं मिले तो किसानों ने खेत में ही जुतवा दी फसल

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खेतों में पड़े शिशकोहरा

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वैशाली के किसानों को इस बार शिशकोहरा (पेठा कोहरा) की बंपर फसल ने निराश किया. उम्मीद से ज्यादा पैदावार हुई, लेकिन खरीदार न मिलने से किसानों को तैयार फसल खेत में ही जुतवानी पड़ी. चीनी की बढ़ती कीमतों ने पेठा उद्योग को प्रभावित किया, जिसका सीधा असर कोहरे की मांग पर पड़ा.

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Shishkohra Cultivation: कभी अच्छी फसल और बेहतर कमाई की उम्मीद में शिशकोहरा यानी पेठा कोहरा की खेती करने वाले किसानों के लिए इस बार अच्छी पैदावार ही घाटे का सौदा बन गयी. फसल बंपर हुई और फलन भी उम्मीद से अधिक रहा, लेकिन बाजार में खरीदार नहीं मिले. इसके चलते कई किसानों को तैयार फसल खेत में ही छोड़नी पड़ी, जबकि कुछ किसानों ने मजबूर होकर ट्रैक्टर चलाकर खड़ी फसल को नष्ट कर दिया.

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शिशकोहरा से पेठा यानी मुरब्बा तैयार किया जाता है. इसके उत्पादन में चीनी की बड़ी खपत होती है. किसानों का कहना है कि चीनी की कीमत में अचानक बढ़ोतरी का असर पेठा उद्योग पर पड़ा. उनके अनुसार, चीनी करीब 40 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 65 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गयी. इससे मुरब्बा तैयार करने वाली फैक्ट्रियों की उत्पादन लागत बढ़ गयी और कई संचालकों को उत्पादन कम या बंद करना पड़ा. इसका सीधा असर शिशकोहरा की मांग पर पड़ा.

आगरा के पेठा उद्योग पर निर्भर है बाजार

प्रखंड क्षेत्र में उत्पादित शिशकोहरा की आपूर्ति मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित पेठा उद्योग के लिए होती रही है. स्थानीय व्यापारी किसानों से शिशकोहरा खरीदकर उसे थोक में आगरा की मुरब्बा फैक्ट्रियों तक पहुंचाते थे.

किसानों के अनुसार, चीनी महंगी होने के बाद आगरा की फैक्ट्रियों की खरीद प्रभावित हुई. धीरे-धीरे इसका असर स्थानीय बाजार पर भी पड़ा और शिशकोहरा की मांग लगभग खत्म हो गयी. इस बार खेतों में अच्छी फसल तैयार होने के बावजूद किसानों को उसे बेचने के लिए खरीदार नहीं मिला.

तैयार फसल को खेत में ही जुतवा दिया

किसानों ने बताया कि शिशकोहरा की खेती में बीज, मजदूरी, सिंचाई और खेत की तैयारी पर अच्छी-खासी लागत आती है. फसल तैयार होने के बाद बिक्री का समय आया तो बाजार में मांग नहीं रही. कई किसानों ने लंबे समय तक खरीदार का इंतजार किया, लेकिन जब कोई रास्ता नहीं बचा तो तैयार फसल को खेत में ही जुतवा दिया.

कई खेतों में शिशकोहरा के फल तोड़ने वाला कोई नहीं मिला और फल खेत में पड़े-पड़े खराब हो गये. इससे किसानों की खेती में लगी लागत और मेहनत दोनों पर पानी फिर गया.

अच्छी फसल ने बढ़ाई थी कमाई की उम्मीद

किसान अभिषेक कुमार उर्फ दिनेश, किशोर कुणाल और कन्हाई कुमार समेत अन्य किसानों ने बताया कि इस बार शिशकोहरा की फसल बेहद अच्छी हुई थी. फलन अधिक होने के कारण उम्मीद थी कि लागत निकलने के साथ अच्छी आमदनी भी होगी. लेकिन बाजार में मांग नहीं रहने के कारण किसी भाव पर खरीदार नहीं मिला.

किसानों का कहना है कि फसल खराब होने का दर्द अलग है, लेकिन मेहनत से तैयार अच्छी फसल को केवल बाजार नहीं मिलने के कारण अपनी आंखों के सामने नष्ट करना पड़ा. इससे बड़ा नुकसान उनके लिए कुछ नहीं हो सकता. किसानों के अनुसार, चीनी की बढ़ी कीमत का असर शिशकोहरा की खेती और उससे जुड़े पूरे बाजार पर पड़ा है.

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