अक्षय तृतीया पर चमका सर्राफा बाजार, लगभग दो करोड़ का हुआ कारोबार

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 10 May 2024 9:54 PM

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अक्षय तृतीया पर सर्राफा बाजार चमक उठा. लोगों ने सोने-चांदी की जमकर खरीदारी की. स्वर्ण आभूषण की दुकानों में ग्राहकों का जमघट लगा रहा. शुक्रवार को अक्षय तृतीया का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया.

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हाजीपुर. अक्षय तृतीया पर सर्राफा बाजार चमक उठा. लोगों ने सोने-चांदी की जमकर खरीदारी की. स्वर्ण आभूषण की दुकानों में ग्राहकों का जमघट लगा रहा. शुक्रवार को अक्षय तृतीया का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया. श्रद्धालुओं ने गंगा-गंडक के संगम में स्नान कर पूजा-अर्चना की. स्नान-ध्यान के लिए नगर के कौनहारा घाट, सीढ़ी घाट समेत अन्य घाटों पर लोग जुटे थे. धार्मिक मान्यता के अनुसार लोगों ने अन्न, वस्त्र आदि का दान भी किया. इस अवसर पर बहुत सारे लोगों ने सोने-चांदी की खरीदारी की. लिहाजा, सर्राफा बाजार भी गुलजार रहा. एक अनुमान के मुताबिक जिले में लगभग दो करोड़ रुपये का कारोबार हुआ. इस बार सोना की कीमत प्रति 10 ग्राम 58,550 तथा चांदी 865 रुपये प्रति 10 ग्राम रही. शहर की आभूषण दुकानों में रौनक बनी रही. नये वाहनों की भी खरीद-बिक्री हुई. अक्षय तृतीया होने के कारण ज्वेलरी की दुकानों में विशेष रौनक देखी गयी. स्वर्ण व्यवसायियों ने अपनी दुकानों की आकर्षक सजावट कर रखी थी. दुकानों में ग्राहकों की भीड़ लगी रही. अक्षय तृतीया का दिन काफी शुभ और फलदायी माना जाता है. मांगलिक एवं नये कार्य के शुभारंभ के लिए यह दिन श्रेष्ठ और उपयुक्त माना जाता है.

सौभाग्य दिवस के रूप में मनाने की है मान्यता :

शास्त्रों के अनुसार ऐसा माना जाता है कि स्वयं सिद्ध होने के कारण इस दिन जो भी कार्य किया जाता है, उसका अक्षय फल मिलता है. इस दिन अधिक से अधिक विवाह संपन्न होते हैं, क्योंकि शुभ लग्न के लिहाज से यह दिन पुण्य फलदायी माना गया है. हालांकि इस बार लग्न की तिथियां पहले ही समाप्त हो चुकी हैं. अक्षय तृतीया को वसंत ऋतु के अंत और ग्रीष्म ऋतु के आगाज का दिन माना जाता है. कहा जाता है कि सतयुग और त्रेता युग का आरंभ इसी दिन हुआ था. नर-नारायण, परशुराम और हयग्रीव का अवतार भी इसी दिन हुआ. ब्रह्माजी के पुत्र अक्षय कुमार का आविर्भाव भी इसी तिथि को हुआ. अक्षय तृतीया के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आचार्य आशुतोष त्रिपाठी ने बताया कि इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान, दान और भागवत पूजन से कष्ट-विकार दूर होते हैं और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. अक्षय तृतीया को सौभाग्य दिवस के रूप में मनाने की भी मान्यता है. इस दिन पंचांग देखे बिना कोई भी मांगलिक कार्य किया जा सकता है.

विधि-विधान से लोगों ने किया लक्ष्मी पूजन :

हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख माह के शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया मनायी जाती है. इस बार तृतीया तिथि शुक्रवार को सुबह 4.17 बजे से शुरू हुई. इसलिए उदया तिथि में शुक्रवार को अक्षय तृतीया मनायी गयी. अक्षय तृतीया पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का पूजन विशेष लाभदायी माना जाता है. धर्माचार्यों का मानना है कि इस दिन किया गया आचरण और सत्कर्म अक्षय रहता है. इस दिन लोग धन संचय करते हैं. अक्षय तृतीया को सोने-चांदी खरीदने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. आचार्य बताते हैं कि इस दिन नये कार्य का शुभारंभ और बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए. इस दिन किये जाने वाले शुभ कार्य की विशेष महत्ता होती है. सामान्यतः लक्ष्मी को आठ प्रकार में माना गया है, जो यश, मुद्रा, आयु, वाहन, गृह, संतान, भवन एवं द्रव्य के रूप में मानी जाती हैं. अक्षय तृतीया को इनकी विशेष रूप से पूजा की जाती है.

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