वैशाली: पूर्व प्रमुख की विरासत को बेटे ने दिया नया मुकाम, BPSC में सफलता पाकर बने राजस्व अधिकारी

Author Vikas Jha
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पूर्व प्रमुख के बेटे ने बीपीएससी परीक्षा में मारी बाजी। फोटो- प्रभात खबर

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BPSC Success Story: वैशाली के महुआ निवासी धीरज कुमार ने 70वीं BPSC परीक्षा में सफलता हासिल कर राजस्व अधिकारी का पद प्राप्त किया है. संघर्ष और लगातार प्रयास के दम पर मिली यह सफलता युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है.

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BPSC Success Story: किसी ने सच ही कहा है कि अगर हौसला बुलंद हो तो कामयाबी कदम चूमती है. ऐसा ही कर दिखाया है महुआ के पूर्व दिवंगत महिला प्रमुख स्व. मंजू देवी के द्वितीय पुत्र धीरज कुमार ने. उन्होंने बीपीएससी 70वीं परीक्षा में 1600वां रैंक प्राप्त कर राजस्व अधिकारी बनकर न सिर्फ अपने माता-पिता के साथ अन्य परिजनों बल्कि क्षेत्र का भी नाम रोशन किया है. जानकारी के अनुसार शेरपुर मानिकपुर पंचायत के बहोरी निवासी समाजसेवी कृष्णा पंडित के पुत्र धीरज कुमार बचपन से ही काफी तेज तर्रार और गंभीर छात्र थे. पिता समाजसेवी तो माता जनप्रतिनिधि होने के बावजूद भी धीरज पढ़ लिखकर अधिकारी बनना चाहते थे. उनकी इस सफलता से पूरे गांव और पंचायत के लोगों में खुशी का माहौल देखा जा रहा है.

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मां के निधन के बाद भी जारी रखा संघर्ष

धीरज ने सीबीएसई बोर्ड से वर्ष 2005 में मैट्रिक और 2007 में इंटर करने के बाद सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने कोटा चले गए. वहां दो साल रहने के बाद 2009 में दिल्ली चले आए. दिल्ली में पढ़ाई के साथ ही प्रशासनिक परीक्षाओं की तैयारी करने के दौरान ही वर्ष 2015 में उनकी मां मंजू देवी की गंभीर बीमारी से मौत हो गई. इसके बाद वे घर लौट आए. मां की मौत के बाद प्यार और ममता छिन जाने से धीरज और उनके भाई-बहन अंदर से टूट गए थे. इसके बाद भी हार न मानते हुए उन्होंने घर पर ही रहकर नीरसु नारायण सिंह महाविद्यालय सिंघाड़ा से 2019 में स्नातक पूरा किया. इसके बाद वे फिर से दिल्ली गए और बीपीएससी की तैयारी शुरू कर दी.

चौथे प्रयास में पूरा हुआ अधिकारी बनने का सपना

वर्ष 2020 से 2026 तक तीन बार बीपीएससी परीक्षा देने और दो बार असफल होने के बावजूद धीरज ने हार नहीं मानी और अपना सकारात्मक प्रयास जारी रखा. आखिरकार वर्ष 2026 के 70वीं बीपीएससी परीक्षा में उन्हें सफलता मिल गई. धीरज चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर हैं. मां की मौत के बाद पिता कृष्णा पंडित ने कभी भी अपने बच्चों को मां की कमी का अहसास नहीं होने दिया. उन्होंने बड़े बेटे नीरज को महुआ में ही टायर की दुकान खुलवाकर व्यवसाय क्षेत्र में आगे बढ़ाया, तो दूसरे बेटे धीरज को अधिकारी बना दिया. उनकी बड़ी बेटी प्रीति हाउस वाइफ हैं और छोटी बेटी सुप्रिया पटना वीमेंस कॉलेज से एमएससी कर रही हैं.

सफलता का श्रेय पिता और गुरुओं को दिया

धीरज ने राजस्व अधिकारी बनने पर गर्व महसूस करते हुए बोला कि आज मेरी मां इस दुनिया में नहीं हैं, अगर मां होती तो बहुत खुश होतीं. अफसोस तो उन्हें खोने का है लेकिन पिता ने मां और पिता दोनों का प्यार दिया है. आज वे जो कुछ भी हैं, उसमें उनके पिता जी का ही श्रेय है. इसके साथ ही धीरज ने अपने गुरुओं को भी इस कामयाबी में अहम जिम्मेदार बताया है. धीरज को मिली इस कामयाबी पर उनके पिता और बड़े भाई नीरज कुमार ने बताया कि धीरज का बचपन से ही सपना था कि अधिकारी बनकर गरीब और असहाय परिवारों की सेवा करे और देश-राज्य की तरक्की में अपना योगदान दे.

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