हाजीपुर में केला उत्पादन और प्रसंस्करण पर पांच दिवसीय कार्यशाला संपन्न, विशेषज्ञ और वैज्ञानिक रहे मौजूद

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कार्यशाला समापन पर विशेषज्ञ व अन्य | Prabhat Khabar Network

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हाजीपुर में आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला में किसानों को केला उत्पादन, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की आधुनिक तकनीक सिखाई गई. विशेषज्ञों ने कच्चे फल की बिक्री के बजाय प्रसंस्करण पर जोर देते हुए आय बढ़ाने के गुर बताए. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे.

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Hajipur News : हाजीपुर प्रखंड के हरिहरपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में शुक्रवार को केला उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन एवं उद्यमिता विषय पर आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला का समापन हुआ. कार्यशाला में किसानों और प्रतिभागियों को केला उत्पादन की आधुनिक तकनीक, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, अपशिष्ट के उपयोग और उद्यमिता के अवसरों की जानकारी दी गयी.

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देशभर के कृषि विशेषज्ञों ने ऑनलाइन दिया प्रशिक्षण

कार्यशाला के दौरान देश के विभिन्न प्रतिष्ठित कृषि एवं अनुसंधान संस्थानों के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने ऑनलाइन माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण दिया. इसमें राष्ट्रीय केला अनुसंधान केंद्र तमिलनाडु, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय रांची, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग भोपाल, डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा, राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता और प्रबंधन संस्थान कुंडली, इकोग्रीन समस्तीपुर, नवसारी कृषि विश्वविद्यालय गुजरात तथा भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ के विशेषज्ञ शामिल रहे.

केला आधारित उत्पाद बनाने का दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण

प्रशिक्षण के दौरान केला उत्पादन की उन्नत तकनीक, केला प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्माण की जानकारी दी गयी. इसके साथ ही केले के अपशिष्ट से उपयोगी उत्पाद तैयार करने, नवीन पैकेजिंग तकनीक और उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के उपाय भी बताये गये. प्रतिभागियों को केला आधारित विभिन्न मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया.

कच्चे फल की बिक्री के बजाय प्रसंस्करण पर जोर

विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि केले को केवल कच्चे फल के रूप में बेचने के बजाय उसका प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन कर अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा किये जा सकते हैं. किसानों को केले के अपशिष्ट के बेहतर उपयोग की संभावनाओं से भी अवगत कराया गया.

विशेषज्ञ और वैज्ञानिक रहे मौजूद

समापन समारोह में आईसीएआर अटारी के वरीय वैज्ञानिक डॉ मनोबुला, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के डिप्टी डायरेक्टर राज पांडे और केवीके के वरीय वैज्ञानिक डॉ अनिल कुमार सिंह समेत अन्य कर्मी मौजूद रहे. कार्यक्रम का संचालन डॉ अनिल कुमार सिंह के दिशा-निर्देशन में इंजीनियर कुमारी नम्रता ने किया.

कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ कविता वर्मा, इशिता सिंह, अंशुमन द्विवेदी, रिचा श्रीवास्तव, रमाकांत, सोनू, मोहित, आरती और दीपक ने महत्वपूर्ण योगदान दिया.

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