बालेपुर में अधर में लटका खेल स्टेडियम का निर्माण, टूट रहा ग्रामीण प्रतिभाओं का सपना

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बालेपुर में अधर में लटका खेल स्टेडियम का निर्माण, टूट रहा ग्रामीण प्रतिभाओं का सपना

Gopalganj News: 2019 में 65 लाख की लागत से हुआ था शिलान्यास, आज भी अधूरा पड़ा है मैदान, युवाओं की मांग- सुविधाएं मिलें तो गांव से निकलेंगे धोनी, विराट और स्मृति मंधाना

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(फुलवरिया से राकेश कुमार की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट)

Gopalganj News: प्रतिभाएं किसी बड़े शहर या विशेष पहचान की मोहताज नहीं होतीं, जरूरत होती है सिर्फ सही मंच और संसाधनों की. लेकिन जब सरकारी उदासीनता और अधूरे विकास कार्य आड़े आ जाएं, तो गांवों की माटी से उठने वाले सपने दम तोड़ने लगते हैं. कुछ ऐसा ही हाल गोपालगंज जिले के फुलवरिया प्रखंड अंतर्गत बालेपुर का है, जहां वर्षों पहले शुरू किया गया खेल स्टेडियम निर्माण आज भी अधर में लटका हुआ है. इसका खामियाजा क्षेत्र के सैकड़ों युवा खिलाड़ी भुगत रहे हैं.

2019 में हुआ था शिलान्यास, 2026 में भी अधूरा सपना

बालेपुर कॉलेज के समीप लगभग 11 एकड़ सरकारी भूमि पर आधुनिक खेल स्टेडियम के निर्माण की योजना बनाई गई थी. वर्ष 2019 में तत्कालीन खेल मंत्री शिवचंद्र राम की अनुशंसा पर तत्कालीन हथुआ विधायक रामसेवक सिंह ने बाबा भूतनाथ महाविद्यालय परिसर में 65 लाख रुपये की लागत से स्टेडियम निर्माण का शिलान्यास किया था.

शिलान्यास के समय युवाओं में नई उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें खेल प्रतिभा निखारने के लिए बड़े शहरों की ओर नहीं जाना पड़ेगा. लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य अधूरा है. मैदान का केवल आंशिक विकास हुआ है, जबकि स्टेडियम का सपना आज भी अधूरा पड़ा हुआ है.

तीन दर्जन गांवों के युवाओं का प्रमुख केंद्र है मैदान

बालेपुर स्थित यह मैदान बथुआ बाजार, जिन बाजार और जनता बाजार के बीच स्थित है. आसपास के तीन दर्जन से अधिक गांवों के युवक-युवतियों के लिए यह खेल गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है. खेल संस्कृति मजबूत होने के बावजूद सुविधाओं की कमी खिलाड़ियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है.

सुबह-सुबह मैदान में जुटते हैं सैकड़ों युवा

प्रभात खबर की टीम जब सुबह बाबा भूतनाथ महाविद्यालय परिसर पहुंची तो मैदान में दर्जनों युवक-युवतियां अभ्यास करते नजर आए. कोई क्रिकेट की तैयारी कर रहा था तो कोई सेना और पुलिस भर्ती के लिए दौड़ लगा रहा था. वहीं कई खिलाड़ी वॉलीबॉल और अन्य खेलों में पसीना बहा रहे थे.

युवा खिलाड़ी अरमान आलम, साहिल आलम, शमशाद आलम, आशुतोष कुमार, राजन कुमार, विवेक कुमार, संजय कुमार, विकास कुमार, मंगेश्वर कुमार, गोलू कुमार, रिशु कुमार और शमशाद अंसारी ने कहा कि प्रतिभा और जुनून की कमी नहीं है, लेकिन संसाधनों के अभाव में आगे बढ़ना मुश्किल हो रहा है. उन्होंने कहा कि यदि सरकार बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करा दे तो क्षेत्र के खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बना सकते हैं.

बेटियों ने कहा- हम भी बनना चाहती हैं स्मृति मंधाना

मैदान में अभ्यास कर रही लक्ष्मी कुमारी, चांदकली कुमारी, सीता कुमारी, मीरा कुमारी, आरती कुमारी, मन्ध्या कुमारी, सुमन कुमारी, वर्षा कुमारी और सुनीता कुमारी ने कहा कि वे भी देश के लिए खेलना चाहती हैं. उन्होंने कहा कि जब टीवी पर स्मृति मंधाना, दीप्ति शर्मा और हरमनप्रीत कौर को खेलते देखती हैं तो उनके भीतर भी आगे बढ़ने का जज्बा जागता है.

युवतियों ने बताया कि मैदान में न तो ड्रेसिंग रूम की व्यवस्था है और न ही महिला खिलाड़ियों के लिए अन्य बुनियादी सुविधाएं. यदि आधुनिक स्टेडियम का निर्माण हो जाए तो ग्रामीण बेटियां भी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकती हैं.

बुजुर्गों ने भी उठाई स्टेडियम निर्माण की मांग

स्थानीय वरिष्ठ नागरिक बाल ठाकरे प्रसाद जायसवाल, प्रमोद गुप्ता, जीतू प्रसाद, जगदीश प्रसाद, अनिल साहू, रवि रंजन मिश्रा और दिनेश दुबे समेत कई लोगों ने सरकार से अधूरे स्टेडियम निर्माण को शीघ्र पूरा कराने की मांग की.

वरिष्ठ नागरिक राज ठाकरे जायसवाल ने कहा कि बाबा भूतनाथ महाविद्यालय में आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण करने आते हैं. ऐसे में एक आधुनिक स्टेडियम का निर्माण युवाओं के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

खिलाड़ियों ने बताई आदर्श स्टेडियम की जरूरतें

खिलाड़ियों और स्थानीय लोगों ने आधुनिक खेल स्टेडियम में सिंथेटिक रनिंग ट्रैक, क्रिकेट एवं फुटबॉल मैदान, वॉलीबॉल कोर्ट, अलग ड्रेसिंग रूम, शौचालय, शुद्ध पेयजल, गैलरी, फ्लडलाइट, जिम, प्रशिक्षित कोच, प्राथमिक उपचार केंद्र, हॉस्टल, सीसीटीवी कैमरे, डिजिटल स्कोर बोर्ड तथा दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है.

स्टेडियम बनने से रोजगार और खेल दोनों को मिलेगा बढ़ावा

स्थानीय खिलाड़ियों का कहना है कि यदि बालेपुर में सर्वसुविधायुक्त स्टेडियम बन जाता है तो युवाओं को बेहतर प्रशिक्षण मिलेगा, खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन होगा और खेल कोटे के माध्यम से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे. साथ ही खिलाड़ियों का बड़े शहरों की ओर पलायन भी रुकेगा.

अब क्षेत्र के लोगों की निगाहें सरकार, खेल विभाग और जिला प्रशासन पर टिकी हैं. ग्रामीणों का कहना है कि जब तक स्टेडियम निर्माण कार्य पूरा नहीं होता, उनकी आवाज बुलंद होती रहेगी.

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विवेक पाण्डेय

लेखक के बारे में

By विवेक पाण्डेय

विवेक रंजन पाण्डेय पिछले 8 वर्षों से टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने Aryabhatta Knowledge University, Patna से BJMC की पढ़ाई की है.

उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत Network 10 टीवी चैनल से की. इसके बाद News India, News18 Digital सहित कई राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय मीडिया संस्थानों में फील्ड रिपोर्टिंग और कंटेंट राइटिंग का अनुभव प्राप्त किया.

वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम में Content Writer के रूप में कार्यरत हैं. यहां बिहार की राजनीति, चुनाव, शिक्षा, कृषि, रोजगार, सरकारी योजनाओं, सामाजिक सरोकारों और विभिन्न जिलों की महत्वपूर्ण खबरों पर तथ्यपरक और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुंचाते हैं.

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