गोपालगंज: शिक्षा के साथ संगीत का संगम, भोरे के स्कूलों में पहुंचे तबला और अन्य वाद्य यंत्र

Author Suresh rai|Edited by Vikash Jha
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भोरे के सरकारी स्कूलों में गूंजेगी संगीत की तान, बच्चों को मिले तबला सहित कई वाद्य यंत्र

तबला बजाते शिक्षक | Prabhat Khabar Network

बिहार सरकार की एक सराहनीय पहल के तहत, गोपालगंज के भोरे प्रखंड के सरकारी स्कूलों में संगीत उपकरणों का वितरण किया गया है. अब बच्चे तबला, कैशियो और झाल जैसे वाद्य यंत्रों के साथ सुर-ताल की बारीकियां आसानी से सीख सकेंगे. इस पहल से बच्चों की छिपी प्रतिभा सामने आएगी और स्कूल का माहौल और भी खुशनुमा बनेगा.

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Gopalganj News: गोपालगंज जिले के भोरे प्रखंड में बिहार सरकार के शिक्षा विभाग की एक नयी और सराहनीय पहल सामने आई है. इसके तहत अब भोरे प्रखंड के सरकारी स्कूलों के बच्चे भी सुर-ताल की तमाम बारीकियां बेहद आसानी से सीख सकेंगे. प्रखंड के सभी सरकारी विद्यालयों में कला, संस्कृति और संगीत को बढ़ावा देने के लिए वाद्य यंत्रों का वितरण किया गया है. नये शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही अब सभी स्कूलों को मुख्य रूप से तबला उपलब्ध करा दिया गया है.

संगीत उपकरणों का हुआ वितरण

गोपालगंज के इन स्कूलों में इससे पहले भी बच्चों के हुनर को निखारने के लिए विभाग की ओर से कई उपकरण दिए जा चुके हैं. इनमें कैशियो, ढोलक, झाल (मंजीरा) और साउंड सिस्टम के लिए माइक सहित कई अन्य आवश्यक संगीत उपकरण शामिल हैं. स्कूलों में इन आधुनिक और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के पहुंचने से छात्र-छात्राओं में भारी उत्साह और खुशी का माहौल है. अब विद्यालयों में पढ़ाई के साथ-साथ संगीत की तान भी गूंजने लगी है.

छिपी प्रतिभा आएगी सामने

गोपालगंज के स्थानीय शिक्षकों का मानना है कि किताबी ज्ञान के साथ-साथ संगीत और कला जैसी सह-शैक्षणिक गतिविधियां बच्चों के सर्वांगीण विकास में बेहद मददगार साबित होंगी. इससे ग्रामीण परिवेश के बच्चों के भीतर छिपी हुई सांस्कृतिक प्रतिभा खुलकर सामने आ सकेगी. अब सरकारी स्कूलों के बच्चे भी जिला और राज्य स्तर के सांस्कृतिक कार्यक्रमों व विभिन्न प्रतियोगिताओं में निजी स्कूलों की तरह अपनी कला का शानदार प्रदर्शन करने में सक्षम हो सकेंगे.

अभिभावकों ने की सराहना

गोपालगंज के भोरे प्रखंड में चल रहे इस अनूठे प्रयास की स्थानीय अभिभावकों और प्रबुद्ध लोगों ने भी काफी सराहना की है. स्कूलों में अब शिक्षक और छात्र मिलकर इन नए उपकरणों के साथ रोजाना प्रार्थना सत्र और बाल संसद के दौरान नियमित रूप से अभ्यास कर रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि इस व्यवस्था से न सिर्फ बच्चों का स्कूल आने के प्रति रुझान बढ़ेगा, बल्कि सरकारी स्कूलों का शैक्षणिक माहौल भी पहले से अधिक बेहतर और खुशनुमा होगा.

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