पिता की भूमिका निभा रही अंजली

Published at :12 May 2016 6:51 AM (IST)
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पिता की भूमिका निभा रही अंजली

हॉस्टल के बच्चों का खाना बना बेटों को दिया मुकाम गोपालगंज : मां शब्द अपने आप में संपूर्ण है. मां न सिर्फ ममता की छांव है, बल्कि अपनी संतान के लिए हर दुख सहने को तैयार रहती है. ऐसी ही एक मां है अंजली तिवारी, जिसने बेटों को ममता की छांव तो दी ही, पिता […]

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हॉस्टल के बच्चों का खाना बना बेटों को दिया मुकाम

गोपालगंज : मां शब्द अपने आप में संपूर्ण है. मां न सिर्फ ममता की छांव है, बल्कि अपनी संतान के लिए हर दुख सहने को तैयार रहती है. ऐसी ही एक मां है अंजली तिवारी, जिसने बेटों को ममता की छांव तो दी ही, पिता की भूमिका निभा कर उनकी जिंदगी संवार रही है. कुचायकोट की रहनेवाली अंजली के पति का निधन वर्ष 2002 में हो गया़ बेटों की तकदीर संवारने के लिए वह गोपालगंज आ गयी. वह एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने लगी.
इसके अलावा किराये पर रूम लेकर हॉस्टल चलाने लगी. हॉस्टल के 8-10 छोटे-छोटे बच्चों को खाना बना कर खिलाने से लेकर कपड़ा धोने और पढ़ाने का भी काम करती है. इस आमदनी से अपने दोनों बेटों को पढ़ा रही है. बड़ा बेटा सोनू मुंबई में एमबीए कर रहा है और छोटा बेटा अंशु कानपुर से बीटेक कर रहा है. बेटों की जिंदगी संवारने के लिए दिन-रात मेहनत कर रही है. इन दिनों वह हॉस्टल के बच्चों की भी मां बन गयी है. ये बच्चे भी उसी लाड़-प्यार से इनके साथ रहते हैं.
गांव खाली कर भाग गये ग्रामीण
पुलिस उत्पीड़न . चुनावी झड़प के बाद गांव पर टूटा खाकी का कहर
कठघरवा पंचायत के खाप मकसूदपुर में बनाये गये छह चलंत मतदान केंद्रों पर मंगलवार को बूथ कब्जाने की तैयारी को लेकर जब एक पक्षों के द्वारा विरोध किया गया, तो प्रशासन की तरफ से पहुंचे अधिकारियों ने ग्रामीणों को खदेड़ना शुरू किया. पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प हुई. झड़प के बाद ग्रामीणों पर पुलिस का कहर बरपा. दहशत के कारण ग्रामीण गांव छोड़ कर भाग गये हैं. प्रभात खबर की टीम ने बुधवार को गांव में पहुंच कर यह रिपोर्ट तैयार की.
गोपालगंज : गंडक नदी के दियारा इलाके का यह खाप मकसुदपुर गांव है. यहां गंडक नदी के कटाव से महज 50 घर बचे हुए हैं. यहां अधिकतर मल्लाह, बीन एवं यादवों के घर हैं. बुधवार को दिन के 11 बजे हैं. गांव में पूरी तरह से सन्नाटा पसरा हुआ है. पुरुष अपने घरों को छोड़ कर फरार हो चुके हैं. गांव में महज आधा दर्जन महिलाएं मौजूद थीं, जिनके चेहरे पर पुलिस का खौफ दिख रहा था. ये महिलाएं चश्मदीद हैं पुलिस की बर्बरपूर्ण कार्रवाई का.
इनकी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहा था. इनमें इतना खौफ था कि जबान खोलना भी मुश्किल था. प्रभात खबर की टीम ने जब इनसे बात की, तो पुलिस की कार्रवाई ने मानवता को तार-तार कर दिया था. मौजूद लोगों ने बताया कि पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प करनेवाले पहले ही भाग चुके थे.
दिन के दो बजे पुलिस के जवान गांवों में घुसे और निरीह लोग शिकार बन गये. पुलिस के जवानों ने पारस प्रसाद के घर में घुस कर पहले मछली खायी, उसके बाद उसकी डेहरी में छुपा कर रखा गया एंड्रायड मोबाइल भी लेकर चलते बने. किसी के घर से मुरगा, तो किसी के घर से 25 हजार रुपये जो मिला उठा कर लेते गये.
मानदेव प्रसाद के घर में उसकी पत्नी रमावती देवी थी. पुलिस ने उसके घर में घुस कर चूल्हा व चापाकल को तोड़ दिया. पुलिस की इस कार्रवाई से उसकी बहू ने आपत्ति की, तो उसके साथ अभद्र व्यवहार किया गया. यह सिर्फ एक घर का नहीं बल्कि सभी घरों में सामान जहां-तहां बिखरे हुए थे, जो पुलिस उत्पीड़न की गवाही दे रहे थे. पुलिस के भय से पूरा गांव खाली हो गया है.
पहले से थी फर्जी वोटिंग की तैयारी : वार्ड संख्या 10 और 11 के मतदान केंद्रों पर दो लड़कियां बैठ कर फर्जी वोटिंग कर रही थीं. इसका विरोध बीन और मल्लाह जाति के लोगों ने किया.
नवादा मोड़ पर कठघरवा के स्वामी नाथ प्रसाद ने बताया कि पहले से ही बूथ पर फर्जी वोटिंग करने की तैयारी थी. मल्लाह जाति के यहां लगभग सात सौ वोट हैं, जबकि यादवों के दो सौ वोट हैं. इसी सात सौ वोट को यादव प्रत्याशी बबन यादव के पक्ष में छापने की तैयारी थी, जिसका विरोध मल्लाह और बीन लोगों ने किया, तो प्रशासन ने उल्टे इन्ही लोगों से बूथ से खदेड़ना शुरू कर दिया. वहीं, वीरेंद्र प्रसाद ने बताया कि पूरी रात चंवर में बितायी है. पुलिस ने घर में घुस कर दुर्व्यवहार से लेकर लूटपाट तक की है. राजेश प्रसाद ने इस फर्जी वोटिंग की सेटिंग में पोलिंग पार्टी और अधिकारियों को भी लिप्त होने का आरोप लगाया.
झड़प के बाद भाग गये मतदाता तो कैसे हुआ वोटिंग : खाप मकसुदपुर में झड़प के बाद जब मतदाता भाग गये थे, तो वोटिंग किसने की. हालांकि डीएम और एसपी कैंप कर बक्से को सील कराने के बाद वहां से निकले. मतदाता इस झड़प के बाद फिर से मतदान केंद्र की ओर नहीं गये.
आरोपों की जांच होगी
पुलिस को किस तरह से बेरहमी से पीटा गया, यह तसवीर भी बता रही है. गांव के लोग अगर पुलिस पर आरोप लगा रहे हैं, तो प्रथम दृष्टया झूठा हो सकता है. वैसे आरोपों की जांच करायी जायेगी. अगर सही पाया गया, तो दोषी पुलिस पर कार्रवाई होगी. वैसे पुलिस तो घटना के बाद मतदान केंद्र को कवर कर शांतिपूर्ण चुनाव कराने में जुटी थी, तो मारने-पीटने का मौका कब मिला.
मनोज कुमार, एसडीपीओ, गोपालगंज
घर में घुस कर पहले मछली खायी, फिर मोबाइल तक उठा ले गये जवान
पुलिस के जवानों ने घर में घुस कर ध्वस्त किया चूल्हा, तोड़ दिया चापाकल
घरों में तोड़फोड़ के साथ बकरा, मुरगा और नकदी भी ले गयी पुलिस
घटना के दूसरे दिन खाप मकसूदपुर में पसरा रहा पूरी तरह सन्नाटा
मतदान केंद्र के पास बिखरी थी चुनाव सामग्री
चलंत मतदान केंद्र 166 से 171 तक पर झड़प के बाद मतदान पेटिका को भी लूटने का प्रयास हुआ था. यहां प्रशासन ने सख्ती बरतते हुए दोबारा मतदान शुरू कराने का दावा किया. दूसरे दिन भी यहां का घटनास्थल पूरे घटना क्रम की गवाही दे रहा है. मतदान केंद्र के पास पोलिंग एजेंट बनाने के कागजात से लेकर तमाम सामग्री फेंकी हुई थी. जिला पार्षद का पोलिंग एजेंट भी नहीं बनने दिया गया था. बिखरा हुआ कागज गवाही दे रहा है. थोड़ी दूर बढ़ने पर बाइक और वाहनों को क्षतिग्रस्त किये जाने से तमाम उपकरण बिखरे हुए थे.
मतदान केंद्र के पास फेंका मिला रंग : मतदान केंद्र पर गड़बड़ी करने की तैयारी पहले से की गयी थी. मौके पर काफी रंग फेंका हुआ मिला. यह रंग मतपेटी में डालने के लिए लाया गया था. इसी रंग को एसडीपीओ की वरदी पर भी शरारती तत्वों ने डाल दिया था. कहा तो यह भी जा रहा है कि मतपेटी में भी रंग डाला गया है. कई लोग ने मतपत्र लेकर भाग निकले. यह सब मामला जांच का विषय है.
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