ऑपरेशन बुलडोजर: FIR नहीं ED से कराइये निराला को-ऑपरेटिव की जांच, पटना हाइकोर्ट का डीएम को आदेश
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 15 Jul 2022 6:45 AM
नेपाली नगर मामले में गुरुवार को हाइकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जमीन बेचने और खरीदने के मामले में को-ऑपरेटिव द्वारा नियमों का उल्लंघन किये जाने पर सख्त नाराजगी जतायी है.
पटना. नेपाली नगर मामले में गुरुवार को हाइकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जमीन बेचने और खरीदने के मामले में को-ऑपरेटिव द्वारा नियमों का उल्लंघन किये जाने पर सख्त नाराजगी जतायी है. कोर्ट ने डीएम से पूछा कि जिस व्यक्ति और सोसाइटी के गलत कार्यों के चलते यह परेशानी सरकार के साथ आम जनता को झेलनी पड़ रही है, उस सोसाइटी के कर्ता-धर्ता निराला को-ऑपरेटिव सोसाइटी के सत्यनारायण सिंह, सुनील सिंह, जय प्रकाश और अन्य के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई की गयी है?
इस पर डीएम ने कहा कि इन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी है. सभी दोषी लोग फरार हैं. इस पर कोर्ट ने डीएम से कहा कि सिर्फ प्राथमिकी दर्ज करने से कुछ नहीं होगा. आप इस मामले में इडी को लिखें, उससे जांच करवाइए, क्योंकि जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार निराला को-ऑपरेटिव के मालिक के पास 500 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की संपत्ति है. यह सारी संपति आम जनता को ठग कर बनायी गयी है.
कोर्ट ने बिहार राज्य आवास बोर्ड और संबंधित पुलिस थाने के रवैये को गंभीरता से लिया. कोर्ट ने जानना चाहा कि आवास बोर्ड के अधिकारियों और पुलिस के होते हुए अतिक्रमण कैसे हो गया. अगली सुनवाई 19 जुलाई को दोपहर बाद सवा दो बजे से होगी. कोर्ट ने कहा कि इस मामले को ज्यादा समय तक टालना उचित नही है. इसलिए इसकी सुनवाई जल्द ही पूरा कर आदेश पारित कर दिया जायेगा.
पटना राजीव नगर के नेपाली नगर वासियों को एक बार फिर पटना हाइकोर्ट ने राहत दी. कोर्ट ने 19 जुलाई को अगली सुनवाई तक किसी भी तरह की कार्रवाई पर रोक को बरकरार रखा है. गुरुवार को न्यायाधीश संदीप कुमार ने जैसे ही सुनवाई शुरू की, महाधिवक्ता ललित किशोर ने बताया कि सरकार व आवास बोर्ड का जवाब कोर्ट में दायर किया जा चुका है. सभी पक्षों को उसकी प्रति दी जा चुकी है. जो भी कार्रवाई की गयी है, वह कानूनी रूप से की गयी है. इसके पहले संबंधित पक्षों के अधिवक्ता ने भी अनुरोध किया कि सुनवाई किसी दूसरे दिन की जाये, ताकि वे भी जवाब को पढ़ लें.
कोर्ट ने जवाब पढ़ा और आवास बोर्ड के वकील से जानना चाहा कि जब आवास बोर्ड के लिए बनाये गये कानून में सारी शक्ति आवास बोर्ड के पास उपलब्ध है, तो जिला प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई क्यों की? बोर्ड ने नियमों के तहत क्या-क्या कार्रवाई की है? कोर्ट ने बोर्ड के वकील से जानना चाहा कि जिला प्रशासन को अतिक्रमण हटाने के लिए बोर्ड ने कब कहा? कोर्ट ने पूछा कि आवास बोर्ड के लिए बनाये गये कानून का खुद उसने कितना पालन किया है? इस संबंध में अगली सुनवाई में पूरी जानकारी के साथ आएं.
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