कार्तिक पूर्णिमा पर महाबोधि मंदिर में की गयी विशेष प्रकाश व्यवस्था

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कार्तिक पूर्णिमा पर महाबोधि मंदिर में की गयी विशेष प्रकाश व्यवस्था

बीटीएमसी की ओर से विभिन्न देशों के बौद्ध भिक्षु व भिक्षुणियों को कराया गया संघदान

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फोटो- गया बोधगया 207- विशेष प्रकाश से महाबोधि मंदिर की हुई सजावट

फोटो- गया बोधगया 208, 209- संघदान में शामिल बौद्ध भिक्षु

बीटीएमसी की ओर से विभिन्न देशों के बौद्ध भिक्षु व भिक्षुणियों को कराया गया संघदान

वरीय संवाददाता, बोधगया

बोधगया.

बौद्ध धर्म में कार्तिक पूर्णिमा आध्यात्मिक चिंतन, भक्ति और पुण्य-अर्जन का एक पवित्र दिन है, जो अक्सर बुद्ध और उनके महत्वपूर्ण शिष्यों के जीवन की घटनाओं पर केंद्रित होता है. इस शुभ दिन पर बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति ने बोधगया के विभिन्न मठों के भिक्षुओं व भिक्षुणियों के लिए एक संघदान का भी आयोजन किया. बुधवार की शाम को महाबोधि मंदिर में विशेष प्रकाश व्यवस्था की गयी, जो संघ की शांत साधनाओं से निकलने वाले ज्ञान और आध्यात्मिक जागरूकता के प्रकाश का प्रतीक है व करुणामय भगवान बुद्ध को एक विनम्र श्रद्धांजलि के रूप में अर्पित की गयी. यह दिन बौद्ध कैलेंडर में कई प्रमुख घटनाओं व अनुष्ठानों से जुड़ा है. एक परंपरा के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा बुद्ध के अपनी माता माया और अन्य दिव्य प्राणियों को धर्म की शिक्षा देने के बाद तुषित स्वर्ग से मानव लोक में लौटने का प्रतीक है. इसे नवीनीकरण व महान करुणा का क्षण माना जाता है. कुछ परंपराएं इस दिन को बुद्ध द्वारा परिनिर्वाण प्राप्त करने से पहले दिये गये अपने अंतिम उपदेश से जोड़ती हैं (हालांकि परिनिर्वाण का वास्तविक दिन आमतौर पर बैसाख होता है) अन्य वृत्तांतों में कश्यप बंधुओं के दीक्षा संस्कार या बुद्ध के प्रमुख शिष्यों में से एक सारिपुत्त के निधन जैसी घटनाओं का उल्लेख इसी दिन मिलता है.

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Kalendra Pratap Singh

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