Pitru Paksha 2020 : गयाधाम में नहीं मन रहा पितृपक्ष मेला, पसरा सन्नाटा, नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई

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गया: गयाधाम में इस बार सन्नाटा पसरा हुआ है. काेराेना संक्रमण से बचाव काे लेकर केंद्र व राज्य सरकार के गृह विभाग ने गाइडलाइन जारी किया है. धार्मिक आयाेजनाें पर राेक के मद्देनजर जिला प्रशासन ने पितृपक्ष मेले के आयाेजन पर राेक लगा दी है. ऐसे में हर वर्ष भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी से गुलजार रहनेवाले गयाधाम में सन्नाटा पसरा हुआ है.

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गया: गयाधाम में इस बार सन्नाटा पसरा हुआ है. काेराेना संक्रमण से बचाव काे लेकर केंद्र व राज्य सरकार के गृह विभाग ने गाइडलाइन जारी किया है. धार्मिक आयाेजनाें पर राेक के मद्देनजर जिला प्रशासन ने पितृपक्ष मेले के आयाेजन पर राेक लगा दी है. ऐसे में हर वर्ष भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी से गुलजार रहनेवाले गयाधाम में सन्नाटा पसरा हुआ है.

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काेविड-19 की वजह से इस बार मेले का आयाेजन नहीं हाे रहा

गौरतलब है कि भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी से प्रारंभ हाेकर तीन पक्षीय पितृपक्ष मेला आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा काे संपन्न हाेता था. इस वर्ष एक सितंबर काे भाद्रपद की चतुर्दशी तिथि है. हर साल इस तिथि काे पुनपन नदी में स्नान कर तर्पण व पिंडदान कर तीर्थयात्री शाम-शाम तक गयाजी पहुंच जाते थे और भाद्रपद पूर्णिमा से यहां पिंडदान का विधान अलग-अलग पिंडवेदियाें व सराेवराें में शुरू हाे जाता था, जाे 17 दिनाें तक चलता था. लेकिन, काेविड-19 की वजह से इस बार मेले का आयाेजन नहीं हाे रहा है.

नियम तोड़ने पर कानूनी कार्रवाई

गया तीर्थपुराेहित पंडाजी ने जिला प्रशासन के सामने अपनी बातें रखते हुए कहा कि वे तीर्थयात्रियाें काे काेविड-19 की वजह से गयाजी आने पर मना कर रहे हैं, बावजूद आस्था लिए वे आते हैं, ताे ऐसे में उनके पितराें का श्राद्धकर्म कैसे हाेगा? एक तरफ जिला प्रशासन जहां सरकार के गाइडलाइन का पालन कराने की बात पर अड़ा है. वहीं पुलिस प्रशासन ने साफ ताैर पर कह दिया है कि यदि पंडाजी राेक के बावजूद यजमान काे अपने घराें में ठहरा कर पिंडदान कराते हैं, ताे ऐसी स्थिति में जानकारी मिलने पर उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जायेगी. इस स्थिति में श्रद्धा व आस्था लिए यदि तीर्थयात्री इस दाैरान गयाजी आ भी जाते हैं, ताे वे भगवान भराेसे ही रह पायेंगे. चूंकि न उन्हें प्रशासनिक सुविधा मिलेगी आैर ना ही अपने पंडाजी से.

2014  में पितृपक्ष मेला राजकीय मेला घाेषित

1994 में पितृपक्ष काे मेला का स्वरूप दिया गया सदियाें से पितृपक्ष मेले के दाैरान गुलजार रहनेवाला गयाधाम का मेला क्षेत्र आज सूना-सूना है. गाैरतलब है कि त्रेता युग से भी पहले से यहां पूर्वजाें के माेक्ष प्राप्ति काे लेकर पिंडदान व तर्पण की परंपरा है, तभी यहां भगवान श्रीराम, माता सीता व भाई लक्ष्मण ने आकर अपने पिता राजा दशरथ व पूर्वजाें का श्राद्धकर्म किया था. हालांकि 1994 में तत्कालीन डीएम राजबाला वर्मा ने इसे मेला का स्वरूप प्रदान किया आैर 2014 के सितंबर महीने में राज्य सरकार ने पितृपक्ष मेला काे राजकीय मेला घाेषित कर इसकी महत्ता काे बढ़ा दिया. तब से अब तक यह राज्य काेषीय इंतजाम से मेला का आयाेजन हाेने लगा.

काराेबारियों काे गहरा धक्का

लेकिन, इस बार न केवल पंडाजी, पुराेहित बल्कि इससे जुड़े काराेबारी, हाेटल, रेस्टाेरेंट, धर्मशाला चलानेवाले, वाहन मालिक, अॉटाे, रिक्शा चलानेवाले के साथ-साथ पिंड व पूजन सामग्री बेचनेवाले, बर्तन व कपड़े के काराेबारी काे गहरा धक्का लगा. इस 17 दिवसीय मेले से गया में आर्थिक संपन्नता आ जाती थी. करीब एक कराेड़ रुपये का काराेबार हाेता था. सालभर लाेग इस मेले के आयाेजन का इंतजार करते थे, जिस पर पानी फिर गया.

Posted by : Thakur Shaktilochan Shandilya

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