गया जी : जर्जर स्कूल भवन में जान जोखिम में डालकर पढ़ा रहे शिक्षक, 238 बच्चों की सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा

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विद्यालय के जर्जर हो चुके कमरे के छत से उखाड़कर गिर रहा है कंक्रीट और प्लास्टर | Prabhat Khabar Network

विद्यालय भवन की जर्जर छत | Prabhat Khabar Network

गया जी के शेरघाटी प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय घोड़ीजरा का भवन जर्जर हो गया है, जिससे शिक्षक जान जोखिम में डाल रहे हैं. 238 बच्चों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है, वहीं अधिकारी कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं.

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शेरघाटी प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय घोड़ीजरा का भवन पूरी तरह जर्जर हो गया है. स्थिति ऐसी है कि शिक्षक जान जोखिम में डालकर विद्यालय में कार्य करने को मजबूर हैं.

हालांकि विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक ने बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए जर्जर कमरों में कक्षाओं का संचालन बंद कर दिया है, लेकिन जगह के अभाव में उसी भवन का उपयोग कार्यालय संचालन और मध्याह्न भोजन की सामग्री के भंडारण के लिए किया जा रहा है.

छत से गिरते हैं कंक्रीट के टुकड़े, हादसे की आशंका

विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक राजेश कुमार ने बताया कि भवन की छत से अक्सर कंक्रीट के टुकड़े टूटकर नीचे गिरते रहते हैं. ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.

उन्होंने कहा कि विद्यालय में कुल 238 बच्चों का नामांकन है और पांच शिक्षक पदस्थापित हैं. विद्यालय में तीन कमरे हैं, इसके अलावा विद्यालय में दो पुराने कमरे हैं जो पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं. सीमित संसाधनों के कारण मजबूरी में उसी भवन का उपयोग करना पड़ रहा है.

अधिकारियों को दी गई सूचना, अब तक नहीं हुई कार्रवाई

उन्होंने बताया कि जर्जर भवन की स्थिति से जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) को पत्र भेजकर अवगत कराया जा चुका है. इसके बावजूद अब तक नए भवन निर्माण या मरम्मत की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है.

विधानसभा में उठा था मामला, अब स्वीकृति का इंतजार

गौरतलब है कि स्थानीय विधायक ने विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के जर्जर भवनों का मामला बिहार विधानसभा में उठाया था. इसके बाद 24 जून 2026 को विधानसभा में ऐसे भवनों को चिन्हित कर आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही गई थी.

अब क्षेत्र के लोगों और विद्यालय परिवार की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि घोड़ीजरा प्राथमिक विद्यालय के लिए नया भवन कब स्वीकृत होता है, ताकि बच्चों और शिक्षकों को सुरक्षित वातावरण मिल सके.

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