गया जी : खाद की कालाबाजारी करने वालों पर सख्ती, 25 लाइसेंस रद्द, दो दुकानदारों पर FIR दर्ज

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सांकेतिक तस्वीर

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गया जी जिले के किसानों के लिए खरीफ सीजन में खाद की कमी को रोकने के लिए जिला प्रशासन सतर्क है. खाद की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है, जिससे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है.

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गया जी जिले के किसानों को खरीफ सीजन में खाद की कमी न हो, इसे लेकर जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है. शुक्रवार को समाहरणालय सभागार में बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार की मौजूदगी में जिलास्तरीय उर्वरक निगरानी समिति की अहम बैठक हुई.

बैठक में खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ कालाबाजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की रिपोर्ट पेश की गई.

जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि अब तक 492 खाद दुकानों का औचक निरीक्षण किया गया है, जिसमें अनियमितता पाए जाने पर 25 दुकानों का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है और दो पर एफआइआर दर्ज की गई है. आगे भी थोक और खुदरा विक्रेताओं के स्टॉक की नियमित जांच जारी रहेगी.

विधानसभा अध्यक्ष और जनप्रतिनिधियों के निर्देश

बैठक को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि किसानों में यह भ्रम है कि डीएपी के मुकाबले एनपीके खाद कम उपयोगी है. उन्होंने कृषि विभाग को निर्देश दिया कि एनपीके और नैनो यूरिया के फायदों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए.

साथ ही किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर संतुलित खाद का इस्तेमाल करने के लिए जागरूक किया जाए. टिकारी विधायक अजय कुमार ने पैक्स और बिस्कोमान के जरिए स्थानीय स्तर पर खाद की आपूर्ति बढ़ाने पर जोर दिया, जबकि अतरी विधायक रोमित कुमार ने सोशल मीडिया के जरिए जैविक खेती के प्रचार की बात कही.

जिला कृषि पदाधिकारी ने आश्वस्त किया कि जिले में यूरिया, डीएपी सहित सभी उर्वरक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं.

शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर और अधिकारियों के संपर्क

अगर किसी किसान को खाद मिलने में परेशानी हो रही है या कोई दुकानदार ज्यादा कीमत मांग रहा है, तो वे सीधे किसान हेल्पलाइन नंबर 1551 पर कॉल कर सकते हैं. इसके अलावा, जिले के किसान सहायक निदेशक (शष्य), प्रक्षेत्र: 9470803717, सहायक निदेशक, बीज विश्लेषण प्रयोगशाला: 9117184060 व जिला कृषि विपणन पदाधिकारी: 9162624811 के नंबर पर भी शिकायत कर सकते हैं.

इस बैठक में केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी, बाराचट्टी विधायक और विधान पार्षद आफाक अहमद खान के प्रतिनिधियों के अलावा डीडीसी, जिला सहकारिता पदाधिकारी व अन्य अधिकारी मौजूद थे.

सूखे और कम पानी के लिए धान के तीन नए बीज

मानपुर. गया और मगध रेंज में बदलते मौसम और कम बारिश (सूखे की स्थिति) से निपटने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने धान के उन्नत बीज तैयार किए हैं. कृषि विज्ञान केंद्र मानपुर की वैज्ञानिक डॉ. रश्मि प्रियदर्शिनी ने बताया कि सबौर (भागलपुर) कृषि विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किए गए "विभूति", "स्वर्ण श्रेया" और "सांभा" प्रभेद (बीज) का परीक्षण किया जा रहा है.

फिलहाल इसे नगर प्रखंड के कंडी व बिथो गांव और वजीरगंज के बिहियान गांव के चयनित किसानों के बीच डेमो के तौर पर बांटा गया है. वैज्ञानिक खुद खेतों में जाकर इसकी मॉनीटरिंग करेंगे. डॉ. रश्मि ने बताया कि इन बीजों की सबसे बड़ी खासियत इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता और कम पानी में अच्छी उपज देना है.

यह धान पथरीली और निचली जमीन पर भी आसानी से उगाया जा सकता है. सबौर स्वर्ण श्रेया का तैयार होने का समय 110-130 दिन है, उपज क्षमता 30-35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है. सबौर सांभा का तैयार होने का समय 120-130 दिन है, उपज क्षमता 30-40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है.


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सूर्यकांत कुमार

लेखक के बारे में

By सूर्यकांत कुमार

सूर्यकांत कुमार तीन वर्षों से हिंदी डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. स्थानीय और हाइपरलोकल पत्रकारिता में विशेष अनुभव रखते हैं. कंटेंट राइटिंग के साथ-साथ वीडियो एडिटिंग और वॉयस ओवर का भी व्यावहारिक अनुभव रखते हैं. उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत एक डिजिटल न्यूज चैनल से की और विभिन्न डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कार्य करते हुए समाचार लेखन और डिजिटल कंटेंट प्रोडक्शन का अनुभव हासिल किया है. इसके अलावा खेल और मनोरंजन से जुड़ी खबरों में भी विशेष रुचि रखते हैं.

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