क्या महाबोधि मंदिर के नीचे छिपा है 1000 साल पुराना इतिहास ? जीपीआर स्कैनिंग से मिले अहम संकेत

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ढूंगेश्वरी पहाड़ी के शिखर पर स्थित स्तूपा | Prabhat Khabar Network

बोधगया के महाबोधि मंदिर के आसपास भूगर्भ स्कैनिंग में बौद्ध महाविहार के अवशेष मिलने के संकेत मिले हैं. जीपीआर प्रणाली से हुई मैगनेटिक स्कैनिंग में सतह से तीन मीटर नीचे महत्वपूर्ण पुरावशेषों का पता चला है. ढूंगेश्वरी पहाड़ी पर भी अक्टूबर से खुदाई शुरू होगी.

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Bodh Gaya Archaeological Discovery : तथागत बुद्ध की ज्ञानस्थली महाबोधि मंदिर के आसपास के क्षेत्रों में जमीन के नीचे दबे पुरावशेषों की पड़ताल शुरू कर दी गयी है, और इसके लिए बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग के अंतर्गत बिहार विरासत विकास समिति द्वारा मंदिर क्षेत्र में भूगर्भ की स्कैनिंग की जा रही है.

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जीपीआर प्रणाली से की गई मैगनेटिक स्कैनिंग

नयी तकनीक के सहारे सतह पर मशीन चलाकर जमीन के अंदर मौजूद पुरातात्विक संरचनाओं का पता लगाया जा रहा है. बिहार विरासत विकास समिति के कार्यपालक निदेशक प्रो. अनिल कुमार ने बताया कि ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार यानी जीपीआर प्रणाली से मैगनेटिक स्कैनिंग कर यह देखा जा रहा है कि महाबोधि मंदिर के आसपास कभी बौद्ध महाविहार रहे हैं या नहीं.

कालचक्र मैदान में जीपीआर स्कैनिंग करते आइएसएम धनबाद की टीम  | Prabhat Khabar Network
कालचक्र मैदान में जीपीआर स्कैनिंग करते आइएसएम धनबाद की टीम | Prabhat Khabar Network

कालचक्र मैदान के नीचे मिले अवशेष के संकेत

दो दिनों की स्कैनिंग के बाद यह पता चला है कि सतह से लगभग तीन मीटर गहराई में कालचक्र मैदान के पूर्वी हिस्से में बौद्ध महाविहार थे, और कालचक्र मैदान के नीचे भी पुरावशेष होने का आभास हो रहा है, जहां खुदाई के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.

ढूंगेश्वरी पहाड़ी के शिखर पर स्थित स्तूपा  | Prabhat Khabar Network
ढूंगेश्वरी पहाड़ी के शिखर पर स्थित स्तूपा | Prabhat Khabar Network

ISM धनबाद की टीम ने किया तकनीकी सहयोग

निदेशक प्रो. कुमार ने बताया कि सरकार के निर्देश पर ISM धनबाद ने इस कार्य में सहयोग किया है, जहां भू-भौतिकी विभाग के प्रो. संजीत पाल के नेतृत्व में नौ सदस्यीय दल ने दो दिनों तक कालचक्र मैदान व पार्किंग के लिए उपयोग होने वाले पूर्वी हिस्से की स्कैनिंग की. इस दौरान सुरक्षा के मद्देनजर गया के एसएसपी सुशील कुमार भी मैदान में मौजूद रहे.

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ढूंगेश्वरी पहाड़ी पर अक्टूबर से शुरू होगी खुदाई

निदेशक प्रो. अनिल कुमार ने यह भी बताया कि तथागत बुद्ध की तपोस्थली ढुंगेश्वरी पहाड़ी के शीर्ष पर गुप्त काल में निर्मित सात बौद्ध स्तूपों के अवशेष मिले हैं, जिनकी स्थिति स्पष्ट करने के लिए आगामी अक्टूबर महीने से वहां आधिकारिक रूप से खुदाई शुरू कराई जाएगी.


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