नदी में डूबने से छात्र की गयी जान

Updated at :09 Sep 2016 8:06 AM
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नदी में डूबने से छात्र की गयी जान

लोगों ने जाम की सड़क शेरघाटी : शहर के बूढी नदी में गुरुवार को डूब कर एक स्कूली बच्चे की मौत हो गयी. इसके बाद आक्रोशित लोगों ने घंटों नेशनल हाइवे को जाम रखा.इस दौरान लोगों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ नारे भी लगाये. जाम कर रहे लोग स्कूल के प्रबंधक की गिरफ्तारी की मांग […]

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लोगों ने जाम की सड़क

शेरघाटी : शहर के बूढी नदी में गुरुवार को डूब कर एक स्कूली बच्चे की मौत हो गयी. इसके बाद आक्रोशित लोगों ने घंटों नेशनल हाइवे को जाम रखा.इस दौरान लोगों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ नारे भी लगाये. जाम कर रहे लोग स्कूल के प्रबंधक की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े थे.

हालांकि थानेदार सुजय विधार्थी के समझाने के बाद जाम हटाया गया. छात्र की पहचान आमस निवासी भूपेंद्र सिंह के बेटे गुलशन के रूप में हुई है. वह शहर के एक निजी आवासीय विद्यालय के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करता था. वह अपने तीन दोस्तों के साथ स्कूल की दीवार कूद कर नदी मेें नहाने चला गया था. नहाने के दौरान गहरे पानी में डूबने लगा. उसे डूबता देख उसके साथ रहा दोस्त राहुल उसे बचाने के लिए नदी में उतरा, लेकिन वह भी डूबने लगा. तीसरे साथी विवेक ने दोनों को बचाने का प्रयास किया, पर वह अपने एक ही साथी राहुल को ही बचा सका. दूसरा साथी नदी के गहरे पानी में डूब गया.

इधर रवि और विवेक ने बताया कि अपने मित्र की जान बचाने के लिए जोर जोर से चीखने लगा. लेकिन, उसकी आवाज किसी ने नहीं सुनी. इसके बाद इसकी सूचना उसने अपने स्कूल के शिक्षकों को दी. बच्चे की डूबने की खबर फैलते ही लोग नदी में जुटने लगे. घंटों बाद स्थानीय लोगों की मदद से छात्र को नदी से बाहर निकाला गया. मौके पर पुलिस मौजूद पुलिस ने छात्र को तत्काल अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

घर का लाडला था गुलशन

गुलशन के चचेरे दादा नवल सिंह ने रो-रो कर बताया कि गुलशन अपने भाई बहन में सबसे बड़ा था. वह सात साल से गुरुकुल में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहा था. करीब एक डेढ़ माह पहले स्कूल में उसकी पिटाई हुई थी. इसके बाद से वह स्कूल के हॉस्टल में नहीं रहना चाहता था.

लेकिन, घरवालों के समझाने-बुझाने के बाद स्कूल में रहकर पढ़ाई करने लगा था. उन्होंने स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए उसकी मौत का जिम्मेवार स्कूल के ही लोगों को ठहराया है. यदि शिक्षक सजग होते, तो वह नदी नहीं की ओर नहीं जाता. उन्होंने बताया कि छात्र के पिता भूपेंद्र सिंह मध्यप्रदेश में कहीं रहकर प्राइवेट नौकरी करते हैं. वहीं उसके दादा–दादी घूमने बाहर गये हुए है.

मां का रो-रोकर बुरा हाल

गुलशन की मां अपने लाडले के शव को देखते ही दहाड़ मार कर रोने-चिल्लाने लगी. मां को रोते बिलखते देख मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गयीं. अपने बेटे के गम में बेसुध मां का हाल बहुत ही बुरा था. बार-बार वह रोते-रोते बेहोश हो रही थी.

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