पार्क में आने से कतरा रहे साधक

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पार्क में आने से कतरा रहे साधक फोटो- बोधगया 01- उद्यान में फूल के पौधों की आड़ में मौज-मस्ती करते युगल.फोटो- बोधगया 02- जेपी उद्यान में बैठे युगल.फ्लैग – महाबोधि मंदिर के बगल में बना जेपी पार्क उद्देश्य से भटकामुख्य रूप से साधना करने के लिए बनाया गया था पार्क परिवार के साथ पार्क आने […]

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पार्क में आने से कतरा रहे साधक फोटो- बोधगया 01- उद्यान में फूल के पौधों की आड़ में मौज-मस्ती करते युगल.फोटो- बोधगया 02- जेपी उद्यान में बैठे युगल.फ्लैग – महाबोधि मंदिर के बगल में बना जेपी पार्क उद्देश्य से भटकामुख्य रूप से साधना करने के लिए बनाया गया था पार्क परिवार के साथ पार्क आने में संकोच कतराते हैं लोग संवाददाता, बोधगयामहाबोधि मंदिर से सटे पश्चिम दिशा में करीब तीन एकड़ से अधिक भूखंड पर जयप्रकाश उद्यान (जेपी पार्क) का निर्माण कराया गया है. उद्यान के निर्माण का उद्देश्य था कि महाबोधि मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ-साथ लोग यहां बैठ कर साधना भी कर सकेंगे. मॉर्निंग वाक व अपने परिवार के साथ तफरीह भी करने आया करेंगे. शुरुआत में जयप्रकाश उद्यान में हिरण, बारहसिंघा, मोर व खरगोश समेत कई तरह के पक्षियों को पिंजड़े में रखा जाता था. लोग अपने बच्चों व परिवार के साथ इन पशु-पक्षियों को देखने आते थे. शैक्षणिक भ्रमण के दौरान स्कूली बच्चों को भी इस उद्यान में घुमाया जाता था. बाद में बुद्धिस्ट संगठनों की के आपत्ति के बाद उद्यान से पशु-पक्षियों को हटा दिया गया. गौरतलब है कि जयप्रकाश उद्यान पर्यावरण व वन विभाग के गया वन प्रमंडल के अधीन है. इसमें प्रवेश करने के लिए पांच रुपये का टिकट लेना पड़ता है. हकीकत में नहीं बदला सरकार का निर्णयमहाबोधि मंदिर परिसर में सात जुलाई, 2013 को आतंकियों द्वारा किये गये बम ब्लास्ट के बाद मंदिर की सुरक्षा को लेकर बोधगया में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई थी. इसमें यह तय हुआ था कि जेपी उद्यान के पश्चिम हिस्से में एक प्रवेश द्वार बना कर साधना उद्यान के बीच से पैदल रास्ता निकाला जाये. इस रास्ते के जरिये लोग महाबोधि मंदिर तक पैदल जायेंगे. साथ ही, तय हुआ था कि इस उद्यान में कई स्थानों पर साधना परिसर का निर्माण करा कर लोगों को साधना करने की जगह मुहैया करायी जाये. इससे महाबोधि मंदिर की सुरक्षा के साथ ही भव्यता में भी बढ़ोतरी होगी, लेकिन, बैठक में सूबे के मुख्य सचिव की मौजूदगी में लिये गये निर्णयों काे अब तक हकीकत में नहीं बदला जा सका है. अब प्रेमी युगलों का रहता है जमावड़ा देश के महान समाजवादी जयप्रकाश नारायण के नाम पर बने इस उद्यान में साधना करना तो दूर, अब परिवार व बच्चों के साथ घूमना भी दूभर हो गया है. उद्यान में अक्सर लगे पेड़-पौधों की आड़ में कम उम्र के युवक-युवतियां मौज-मस्ती करते देखे जा सकते हैं. उन्हें न तो किसी का भय होता और नहीं संकोच. बेपरवाह प्रेमी युगलों द्वारा बोधगया जैसे धार्मिक स्थल का मजाक उड़ाया जा रहा है. उद्यान के 90 प्रतिशत हिस्से में कम उम्र के लड़के-लड़कियों का कब्जा रहता है. बोधगया भ्रमण पर आनेवाले विभिन्न जिलों के स्कूली बच्चे भी कभी-कभार जेपी उद्यान में पहुंच जाते हैं, पर यहां की स्थिति देख कर उनके साथ रहे शिक्षक जल्द ही बच्चों को उद्यान से बाहर निकाल लेते हैं. यह भी कि उद्यान की झाड़ियों की आड़ में छुप कर बैठ कम उम्र के युवक-युवतियां भी किसी स्कूल, काॅलेज व अन्य शिक्षण संस्थानों से ही ताल्लुक रखते हैं. उनके पास स्कूली बैग भी होता है.

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