स्वामी राघवाचार्य पंचतत्व में विलीन

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स्वामी राघवाचार्य पंचतत्व में विलीनत्रिदंडी परंपरा के संत-महात्माओं ने विधि-विधान से कराया कर्मकांड फाेटाे-संवाददाता, गयारामानुज मठ के स्वामी राघवाचार्य का पार्थिव शरीर विष्णुपद के पीछे फल्गु नदी के तट पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पंचतत्व में विलीन हो गया. त्रिदंडी परंपरा के संत-महात्माओं के साथ उनके शिष्यों व श्रद्धालुओं ने नम आंखों से स्वामीजी को […]

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स्वामी राघवाचार्य पंचतत्व में विलीनत्रिदंडी परंपरा के संत-महात्माओं ने विधि-विधान से कराया कर्मकांड फाेटाे-संवाददाता, गयारामानुज मठ के स्वामी राघवाचार्य का पार्थिव शरीर विष्णुपद के पीछे फल्गु नदी के तट पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पंचतत्व में विलीन हो गया. त्रिदंडी परंपरा के संत-महात्माओं के साथ उनके शिष्यों व श्रद्धालुओं ने नम आंखों से स्वामीजी को विदाई दी. गौरतलब है कि जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी राघवाचार्य का निधन दिल्ली में इलाज के दौरान हो गया था. बुधवार को विष्णुपद रोड स्थित राजस्थान भवन में उनके शव को लोगों के दर्शनार्थ रखा गया. इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को रामानुज मठ ले जाया गया. पूजा -आरती व वैदिक क्रिया-कर्म के बाद विभिन्न संतों व शिष्यों द्वारा स्वामी जी को पुष्प अर्पित कर अंतिम विदाई दी गयी. इसके उपरांत रात आठ बजे फल्गु तट पर स्वामीजी के शिष्य गोह निवासी रामपुकार मिश्र द्वारा मुखाग्नि दी गयी. इस भावुक मौके पर बड़ी संख्या शिष्य व श्रद्धालु मौजूद रहे. स्वामी राघवाचार्य को गया के धर्म अध्यात्म व संस्कृति के आधार स्तंभ बताते हुए जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के महामंत्री डॉ राधानंदन सिंह ने शोक व्यक्त किया है. मठों से आये मठाधीशस्वामी राघवाचार्य की अंतिम विदाई में विभिन्न मठों के मठाधीश जुटे. इनमें हरिहर क्षेत्र सोनपुर आश्रम के स्वामी लक्ष्मणाचार्य, नर्गदा भोजपुर आश्रम के राजेंद्र स्वामी, काशी आश्रम के मुमोक्षु स्वामी उर्फ छोटे नारायण स्वामी व लक्ष्मी प्रपन्नाचार्य उर्फ जीआर स्वामी मौजूद रहे.अंतिम विदाई में सामने आया विवादस्वामीजी के भतीजे मध्य विद्यालय खटकाचक के प्रधानाध्यापक विश्वनाथ शास्त्री ने रामपुकार मिश्र के मुखाग्नि देने को लेकर विरोध प्रकट किया. श्री शास्त्री का कहना था कि छह साल पहले स्वामीजी द्वारा दामोदर प्रपन्न को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया गया था, इसलिए पहला हक उनका बनता है. संसारिक परंपरा के अनुसार अगर विधान होना है, तो मुखाग्नि का हक उनका होता है. रामपुकार मिश्र न तो स्वामीजी के शिष्य हैं न ही उत्तराधिकारी. वह परिवार के सदस्य भी नहीं हैं. फल्गु घाट पर विवाद ज्यादा बढ़ जाने के बाद मठाधीशों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया. इधर, रामपुकार मिश्र के समर्थकों का कहना था कि स्वामीजी अपने जीवनकाल में मुखाग्नि के लिए उन्हें उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था.

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