धर्म की रक्षा के लिए बार-बार प्रगट होंगे भगवान : आशुतोषानंद
धर्म की रक्षा के लिए बार-बार प्रगट होंगे भगवान : आशुतोषानंदफोटो- गोवर्द्धन पर्वत उठा कर गोप-गोपियों की रक्षा करते भगवान कृष्ण की झांकी, कृष्ण-राधा की वेशभूषा में श्रद्धालु, यज्ञ के दौरान प्रवचन सुनने के लिए उपस्थित श्रद्धालु. सात दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ संपन्न, भंडारा आज प्रतिनिधि, इमामगंजसनातन धर्म की रक्षा करने में सारी […]
धर्म की रक्षा के लिए बार-बार प्रगट होंगे भगवान : आशुतोषानंदफोटो- गोवर्द्धन पर्वत उठा कर गोप-गोपियों की रक्षा करते भगवान कृष्ण की झांकी, कृष्ण-राधा की वेशभूषा में श्रद्धालु, यज्ञ के दौरान प्रवचन सुनने के लिए उपस्थित श्रद्धालु. सात दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ संपन्न, भंडारा आज प्रतिनिधि, इमामगंजसनातन धर्म की रक्षा करने में सारी धन-दौलत लग जाये, तो यह तुम्हारा कर्तव्य बनता है की उसकी रक्षा करो. धन खर्च होने की चिंता तुम मत करो. चिंता करनेवाले तो तुम्हें पाई-पाई सूद समेत जरूर लौटायेंगे. मनुष्य का पहला ध्येय होना चाहिए कि सनातन धर्म की रक्षा करें. अगर धर्म की रक्षा करने में भगवान को चाहे जितने बार प्रगट लेना पड़े, वह लेगे. ये बातें इमामगंज प्रखंड के रानीगंज बाजार में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ के सातवें दिन स्वामी आशुतोषानंद गिरि जी महाराज ने कहीं.स्वामी जी ने श्रद्धालुओं को समझाते हुए कहा कि दुनिया में अगर जीना है, तो मनुष्य को दूब (एक प्रकार का घास) से सीखना चाहिए. दूब का एक स्वभाव है कि जाहे कितनी भी गरमी पड़े, बारिश हो या आंधी आये, वह कुछ देर के लिए मुरझा जाता है, लेकिन समय अनुकूल होते ही वह फिर से पहले की तरह हरा-भरा हो जाता है. मनुष्य के जीवन में भी ऐसा समय कभी न कभी जरूर आता है, जिससे उसे झुकना ही पड़ता है. उस समय मनुष्य को धैर्य रख कर भगवान का स्मरण करना चाहिए. भगवान की भक्ति से मनुष्य का समय पहले की तरह जरूर हो जायेगा. “होय ही वहीं जो राम रची राखा“ आपके चाहने से कुछ नहीं बनता-बिगड़ता. बनाने-बिगाड़ने वाले तो भगवान विष्णु ही हैं. स्वामी जी ने कहा कि जब बृजमंडल में भगवान इंद्र लगातार सात दिनों तक मूसलाधार बारिश करने लगे, तो भगवान कृष्ण ने गोवर्द्धन पहाड़ को उठा कर सभी गोप-गोपियों व बृजवासियों की रक्षा की. कथा के दौरान भगवान कृष्ण के गोवर्द्धन पर्वत उठाये झांकी देख कर श्रद्धालु खुद को रोक नहीं पाये और पुष्प की वर्षा करने लगे. स्वामी जी ने आगे कहा कि भक्त को भी सबकुछ भगवान को सौंप देना चाहिए, ताकि बिगड़े समय में भगवान उसकी रक्षा कर सकें. स्वामी जी ने यमुना नदी के तट पर गोपियों के साथ भगवान कृष्ण के महारास समेत गोपियों व भगवान कृष्ण के विरह की कथा सुनायी, तो श्रद्धालु भाव-विभोर हो गये. स्वामी जी ने श्रद्धालुओं से कहा कि श्रीमद् भागवत कथा में भगवान कृष्ण ने जो उपदेश दिये हैं, उसका अनुसरण कर अपना जीवन धन्य बनाएं. इस मौके पर सत्यनारायण गोयल, मोतीलाल सांवरिया, मोहन अग्रवाल, प्रमोद अग्रवाल, अजीत अग्रवाल, गोपाल कृष्ण गोयल, सूरज पोद्दार व प्रकाश पोद्दार सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे. यज्ञ के आयोजक रूलीचंद्र पोद्दर ने बताया कि गुरुवार को भंडारे का आयोजन किया गया है. इसमें श्रद्धालु यज्ञ का महाप्रसाद जरूर ग्रहण करें.
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