बदरा जे हमरा से बैरन हो गेलक कइसे में बचत प्राण..
Author Prabhat khabar digital desk
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गया : जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन भवन में काव्य संध्या 278 का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता समाजसेवी उदय सिंह व संचालन सुमंत ने किया. खालिक हुसैन परदेसी ने सुखसागर पर आधारित कंस और कृष्ण के जन्म की कथा पर आधारित लंबी कविता सुनायी, जिसे सुन कर श्रोता दंग रह गये.चंद्रदेव प्रसाद केसरी ने गीत […]
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गया : जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन भवन में काव्य संध्या 278 का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता समाजसेवी उदय सिंह व संचालन सुमंत ने किया. खालिक हुसैन परदेसी ने सुखसागर पर आधारित कंस और कृष्ण के जन्म की कथा पर आधारित लंबी कविता सुनायी, जिसे सुन कर श्रोता दंग रह गये.चंद्रदेव प्रसाद केसरी ने गीत सुनाया-कन्हैया नटखट माखन चोर, ब्रज गोपियन घर माखन चुरावे. डॉ निरंजन श्रीवास्तव ने भगवान श्रीकृष्ण की संक्षिप्त कथा कविता के माध्यम से सुनाई.
नंदकिशोर सिंह ने कहा-सांवर दैया कृष्ण कन्हैया, नंद के लाल कृष्ण कन्हैया. रेणु गुप्ता ने कहा-मक्खन चोर रे सांवरिया, थोड़ी वंशी दो बजाय. डॉ राकेश कुमार सिन्हा रवि ने सोलह कलाओं में निपुण श्रीकृष्ण को 16 फिल्मी गीतों का मुखड़ा सुनाया.
अभ्यानंद मिश्र वर्षा गीत गाया- बरस हे रिमझिम फुहार हो, मेघ गरजे गगनमा. वहीं शिवेंद्र प्रताप सिंह ने किसानों के दर्द को कविता में पिरोया-हम्मर न हित कोई हम्मर न मीत कोई, जे दे कोई हमरा पर ध्यान. बदरा जे हमरा से बैरन हो गेलक कइसे में बचत प्राण.
विजय कुमार शर्मा ने किसान गीत गाया-अप्पन खून खूब सुखाईल, जन जीवन के भूख मिटइल, तन मन धन से अन्न उपजइल, कइल तू कल्याण. मुद्रिका सिंह ने गजल पढ़ी-कश्मीर में ध्वज तिरंगा अब लहरेगा शान से. कश्मीर पर बात न होगी कह दो पाकिस्तान से.
डॉ राम परिखा सिंह ने कहा- दुनिया भर में सबसे प्यारा, भारत देश हमारा. डॉ सुल्तान अहमद ने गजल पढ़ी- फना हो जायेगी ए दुनिया ए मेला छोड़ देते हैं जो सूफी हैं सब झमेला छोड़ देते हैं. जयराम सत्यार्थी ने दोहे पढ़े-करोगे आखिर क्या तुम बटोर धन अकूत. सब मिट्टी में मिल जायेगा जो निकल पूत-कपूत.
सुमंत ने व्यंग्य किया- सब गुड़ गोबर हो गया, एक रजवा के न आने से. मणिलाल आत्मज ने सिसक रहल हे नारी कविता में कहा- मानव अब दानव बन गेलो सिसक रहल हे नारी. किशुन कन्हाई लाज बचाव वंशी वाला गिरधारी. शिव प्रसाद सिंह मुखिया और विषधर शंकर ने भी अपनी कविता पढ़ी.
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