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गया : 10 वर्षों में नहीं बना सका शहर में बच्चों के लिए एक चिल्ड्रेन पार्क

Updated at : 06 Mar 2019 8:49 AM (IST)
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गया : 10 वर्षों में नहीं बना सका शहर में बच्चों के लिए एक चिल्ड्रेन पार्क

फाइलों में ही उलझा है तीन करोड़ का प्रोजेक्ट, किसी को सुध नहीं कंडी नवादा में एक किमी के दायरे में चिल्ड्रेन पार्क लिए बनी है योजना गया : कहने को तो बहुत छोटी बात है लेकिन नगर सरकार की लापरवाही ने इसे बड़ा बना दिया. यहां बात हो रही है चिल्ड्रेन पार्क की. छोटी […]

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फाइलों में ही उलझा है तीन करोड़ का प्रोजेक्ट, किसी को सुध नहीं
कंडी नवादा में एक किमी के दायरे में चिल्ड्रेन पार्क लिए बनी है योजना
गया : कहने को तो बहुत छोटी बात है लेकिन नगर सरकार की लापरवाही ने इसे बड़ा बना दिया. यहां बात हो रही है चिल्ड्रेन पार्क की. छोटी बात यह है कि किसी भी शहर में बच्चों के मनोरंजन के लिए कई चिल्ड्रेन पार्क होते ही हैं, इसे तैयार करना भी किसी नगर निकाय प्रशासन के लिए मुश्किल नहीं है. लेकिन अपने शहर में यह बड़ी बात बन गयी है.
बड़ी इसलिए कि बीते दस सालों में नगर निगम एक भी पार्क तैयार नहीं करा सका. योजना बनी,पैसे आये,जगह चुन लिया गया लेकिन काम शुरू नहीं हो सका. जबकि नगर सरकार के साहबों ने इन दस सालों में अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए कई काम कर – करा लिये. जब भी बात उठती है तो नगर निगम के अधिकारी कहते हैं कि बस अब कुछ दिनों में पार्क निर्माण का काम शुरू हो जायेगा. लेकिन,यह कुछ दिन कब आयेगा यह शायद इन अधिकारियों को भी नहीं पता. गौरतलब है कि गया पटना रोड कंडी नवादा में तीन करोड़ की लागत से एक किलोमीटर के दायरे में चिल्ड्रेन पार्क लिए योजना बनी हुई है.
सामान्य विवाद में फंसा है प्रोजेक्ट
तीन करोड़ की लागत से बनने वाले इस चिल्ड्रेन पार्क का शिलान्यास हो चुका है.लेकिन पिछले वर्ष ही एक समुदाय द्वारा इस जमीन को लेकर किये गये विरोध के कारण पार्क निर्माण का काम अधर में चला गया.
इसके बाद नगर निगम के स्तर पर कोई प्रयास नहीं किया गया. जबकि विवाद की स्थिति शहर के किसी दूसरे हिस्से में भी प्रोजेक्ट को शिफ्ट किया जा सकता था. ध्यान देने वाली बात यह है कि यह प्रोजेक्ट कोई नया नहीं है. चिल्ड्रेन पार्क के निर्माण के लिए नगर निगम बीते दस सालों से बात कर रहा था. करते -करते बीते साल जगह का चयन हुआ,अब उस पर भी पेच फंसा है. सही माने तो नगर निगम के अधिकारियों के पास इस प्रोजेक्ट के शुरू होने और पूरा होने की कोई ठोस जवाब नहीं है.
खराब पड़े संसाधनों को करें दुरुस्त
विभागीय समीक्षा बैठक में हृदय योजना, अमृत योजना सहित पेयजल पर बिंदुवार चर्चा की गयी. डिप्टी मेयर मोहन श्रीवास्तव ने कहा कि जलापूर्ति को सशक्त करें.
निगम के पास पर्याप्त संसाधन होने के बावजूद पेयजल की समस्या उत्पन्न हो रही है, इस पर विशेष रूप से ध्यान दें और खराब चापाकल, बोरिंग व पाइपलाइन को दुरुस्त कराएं. पेयजल से संबंधित पदाधिकारी जलापूर्ति केंद्र की यथास्थिति का जायजा लेकर जितने भी मोटर पंपिंग स्टेशन पर खराब पड़े हैं, उन्हें जल्द ही ठीक कराएं. उन्होंने कर्मियों की लापरवाही से अटकी पड़ी छोटी-बड़ी योजनाओं पर हिदायत दी कि अब यह बर्दाश्त नहीं होगा.
बैठक से अनुपस्थित रहनेवाले पदाधिकारियों को लेकर उन्होंने कहा कि आगे से एेसा हुआ तो संबंधित पदाधिकारी का वेतन रोक दिया जायेगा. इस बैठक में उप नगर आयुक्त दिनेश कुमार सिन्हा, जल पर्षद के कार्यपालक अभियंता राकेश कुमार, कनीय अभियंता दिनकर प्रसाद, वार्ड पार्षद दीपक चंद्रवंशी, विनोद यादव, गोपी पासवान सहित कई कर्मचारी मौजूद थे.
शहर के बच्चों को है चिल्ड्रेन पार्क का इंतजार
शहर में बच्चों के खेलने व मनोरंजन के कोई भी सरकारी स्तर का साधन मौजूद नहीं. बच्चे मुहल्लों में खाली पड़ी जमीन,घर की छत पर खेल कर अपना मनोरंजन करते हैं. शहर में एक चिल्ड्रेन पार्क हो इसके लिए शहर के लोग लंबे समय से मांग कर रहे हैं. नगर निगम व दूसरी सरकारी एजेंसियों द्वारा शहर के कुछ हिस्सों में पार्क बनाये गये हैं, लेकिन वह भी खस्ताहाल है.
बाउंड्री वाॅल और घास के अलावा यहां कुछ भी नहीं मिलेगा. शहर के लोगों का कहना है कि इन पार्कों में भी अगर व्यवस्था को बेहतर कर बच्चों के मनोरंजन के संसाधन दिये जाये तो भी चिल्ड्रेन पार्क की कमी नहीं खलेगी.
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