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Gandhi Jayanti: चर्चिल की भतीजी ने बनायी थी गांधी की पहली प्रतिमा, जानें 81 साल तक कहां गुम रही मूर्ति

Updated at : 02 Oct 2022 9:40 AM (IST)
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Gandhi Jayanti: चर्चिल की भतीजी ने बनायी थी गांधी की पहली प्रतिमा, जानें 81 साल तक कहां गुम रही मूर्ति

Gandhi Jayanti: गांधी जी से क्लेयर शेरिडन का परिचय 1931 में सरोजिनी नायुडू ने कराया. सरोजिनी नायुडू ने गांधी जी से परिचय उस वक्त कराया था, जब गांधी जी गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने लंदन गये थे.

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आज दो अक्टूबर है. आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती है. इस अवसर पर आपके लिए एक किस्सा लेकर आया हूं. इस कहानी में तीन किरदार है. पहली किरदार चर्चिल की भतीजी, वहीं, दूसरे दरभंगा के जमींदार महाराज कामेश्वर सिंह और तीसरे खुद महात्मा गांधी हैं. जो शांति और प्रेम के प्रतिक है. विंस्टन चर्चिल की भतीजी क्लेयर शेरिडन 1931 के आसपास गांधी की एक प्रतिमा बनायी थी. हालांकि उस समय विंस्टन चर्चिल ब्रिटेन के प्राइम मिनिस्टर नहीं थे. भले ही उस वक्त चर्चित राजनीतिक हस्ती रहे होंगे. विंस्टन चर्चिल की भतीजी क्लेयर शेरिडन एक मूर्तिकार, लेखक और पत्रकार थी. वह गांधी, चर्चिल और लेनिन को तीन प्रभावशाली हस्तियों में गिनती थी. क्लेयर शेरिडन को दुनिया के बेहतरीन राजनेताओं की प्रतिमा बनाने का शौक था.

जब क्लेयर शेरिडन ने गांधी जी से पूछा… आपको कैसी लगी यह प्रतिमा

गांधी जी से क्लेयर शेरिडन का परिचय 1931 में सरोजिनी नायुडू ने कराया. सरोजिनी नायुडू ने गांधी जी से परिचय उस वक्त कराया था, जब गांधी जी गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने लंदन गये थे. जिस दिन मुलाकात हुआ, यह संयोगवश गांधी जी के जन्मतिथि वाला दिन था. इस मुलाकात को क्लेयर शेरिडन ने अपनी डायरी में लिखी हुई है, वे एक सफेद कुशन में पालथी मारे बैठे थे और सफेद वूलेन चद्दर में लिपटे थे. वे मुझे किसी सम्मोहन प्रतिमा की तरह दिखे. उसी वक्त क्लेयर शेरिडन ने गांधी जी की आवक्ष कांस्य प्रतिमा तैयार की थी. प्रतिमा बनाने के बाद क्लेयर शेरिडन ने गांधी जी को दिखाया और पूछा कि यह प्रतिमा आपको कैसी लगी. तब गांधी ने कहा कि मैं इस बारे में कुछ नहीं जानता… लेकिन आपकी याद मुझे जरूर आयेगी. मैं आपको भूल नहीं पाऊंगा. आप भारत आयें. वहां आप हर किसी का मेहमान बन जायेंगी.

गांधी जी की इस प्रतिमा को दरभंगा के महाराजा ने उपहार दी थी

आवक्ष कांस्य प्रतिमा का किस्सा 1931 के बाद कहीं गुम हो गया. फिर 81 साल बाद इस प्रतिमा का किस्सा खुला. गांधी जी की आवक्ष कांस्य प्रतिमा मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय के कर्मियों को प्लास्टिक में लिपटी हुई मिली. इसके बाद जब संग्रहालय अधीक्षक ने इस प्रतिमा के बारे में पता करने के लिए अपने संग्रहालय का रिकार्ड चेक कराया तो वहां दर्ज था. महात्मा एमके गांधी की कांस्य आवक्ष प्रतिमा, हिज एक्सिलेंसी वायसराय द्वारा उपलब्ध करायी गयी. क्लेयर शेरिडन द्वारा बनायी गयी गांधी जी की आवक्ष प्रतिमा बम्बई के प्रिंस ऑफ वेल्स म्यूजियम के सेंट्रल हॉल में एक 4.5 फीट के पेडस्टल पर रखी है. गांधी जी की आवक्ष प्रतिमा हाल ही में हिज एक्सीलेंसी वायसराय लॉर्ड लिनलिथिगो (1936-44) के द्वारा म्यूजियम को उपलब्ध करायी गयी है. वायसराय को यह प्रतिमा दरभंगा महाराज ने खरीद कर बतौर उपहार दी थी.

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