बिहार: जज बन DGP को निर्देश देने वाले जालसाज का नया कारनामा, जेल में रहकर भी कर रहा हैरान करने वाले काम
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 14 Jun 2023 10:19 PM
जेल में बंद जालसाज अभिषेक अग्रवाल केंद्रीय गृह मंत्रालय का सचिव व पुलिस मुख्यालय के एडीजी बन कर जेल के अंदर से ही बेऊर जेल के अधीक्षक जितेंद्र कुमार को दो बार व उपाधीक्षक राजेश कुमार सिंह काे चार बार वाट्सएप काॅल किया और हड़काने लगा.
पटना हाइकाेर्ट का पूर्व चीफ जस्टिस बनकर पूर्व डीजीपी एसके सिंघल को निर्देश देकर चर्चा में आये जालसाज अभिषेक अग्रवाल उर्फ अभिषेक भोपालिका ने जेल अधिकारियों को भी हड़काने की कोशिश की. हालांकि जेल अधीक्षक इंजीनियर जीतेंद्र कुमार ने उसकी आवाज को पकड़ लिया और उसके सेल में अचानक ही छापेमारी कर 4 जी स्मार्ट फोन को बरामद कर लिया.
बता दें कि अभिषेक अग्रवाल ने पूर्व डीजीपी एस के सिंघल को फोन कर गया के तत्कालीन एसएसपी आदित्य कुमार पर से गया में दर्ज शराब केस में कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दे दिया था. लेकिन जब बाद में मामला खुला तो इओयू ने उसके खिलाफ 15 अक्तूबर 2022 को केस दर्ज करने के बाद गिरफ्तार कर बेऊर जेल में बंद किया था.
लेकिन उसकी आदत नहीं सुधरी और उसने केंद्रीय गृह मंत्रालय का सचिव व पुलिस मुख्यालय के एडीजी बन कर जेल के अंदर से ही बेऊर जेल के अधीक्षक जितेंद्र कुमार को दो बार व उपाधीक्षक राजेश कुमार सिंह काे चार बार वाट्सएप काॅल किया और हड़काने लगा. उसने कहा कि जेल के उपाधीक्षक रामानुज प्रसाद काे पहले सस्पेंड करवा चुका हूं. इसलिए वह जेल में बंद अभिषेक अग्रवाल को विशेष सुविधाएं दें, नहीं तो आप भी निलंबित हो जायेंगे. हालांकि अधीक्षक जितेंद्र कुमार एडीजी की आवाज को पहचानते थे, इसलिए वे समझ गये कि यह काम अभिषेक अग्रवाल कर रहा है. इसके बाद उसके वार्ड नंबर दाे में छापेमारी की. इस दौरान उसके पास से मोबाइल फोन बरामद कर लिया गया. फोन में एक सिम नंबर 9046804906 भी था. जिसकी जांच की जा रही है कि वह किन-किन लोगों से बात करता था.
इसके बाद जेल प्रशासन ने उसके खिलाफ बेऊर थाने में एक और मामला दर्ज करा दिया और मामले की जानकारी एसएसपी राजीव मिश्रा व कारा प्रशासन के अधिकारियों को दी. अभिषेक का टाइल्स का कारोबार था और यह मूल रूप से बुद्धा काॅलाेनी थाने के नागेश्वर काॅलाेनी का रहने वाला है. यह आठ माह से बेऊर जेल में बंद है.
सूत्रों के अनुसार इस मामले में जांच में यह बातें सामने आयी है कि कक्षपाल उदय प्रताप व एक अन्य अभिषेक के संपर्क में थे और उससे बात करते थे. सूत्रों का कहना है कि इन दोनों कक्षपालों ने ही अभिषेक को मोबाइल फोन व सिम का जुगाड़ करने में मदद की थी. इन दोनों के खिलाफ कार्रवाई तय है और बर्खास्त भी किये जा सकते हैं.
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लेकिन यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि उसके पास 4 जी स्मार्ट फोन कैसे पहुंचा? इस जेल को अतिसुरक्षित जेल की श्रेणी में रखा जाता है और कई आतंकी व कुख्यात यहां बंद है. इसके बावजूद स्मार्ट फोन अभिषेक तक पहुंच गया.
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