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नवादा: पान की खेती पर अनुदान का बढ़ाया गया दायरा, फिर भी जिले में नहीं बढ़ रहा उत्पादन

Updated at : 26 Dec 2022 12:49 PM (IST)
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नवादा: पान की खेती पर अनुदान का बढ़ाया गया दायरा, फिर भी जिले में नहीं बढ़ रहा उत्पादन

Bihar News: नवादा में पान के पत्ते लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए कोई प्लांट नहीं लगाया गया है. ऐसे में किसानों के पास पान के पत्ते को तोड़ने के साथ ही तुरंत मार्केट में पहुंचाने की जल्दी रहती है.

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विशाल कुमार

नवादा. वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट के तहत जिले में पान की खेती को बड़ा उद्योग के रूप में विकासित करने के लिए कार्य योजना तैयार की गयी थी. पान की खेती को बढ़ावा देने के लिए पान की प्रोसेसिंग कर औषधीय तेल व अन्य उत्पाद बनाने की योजना बनायी गयी थी. लेकिन, यह योजना अभी इतना अधूरा हैं कि इसकी सफलता पर प्रश्नचिह्न लगा है. जबकि जिले में होनेवाली पान की खेती देशभर में मशहूर है. सरकारी स्तर पर भी पान उत्पादन के क्षेत्र में जिला का बड़ा नाम है. लेकिन, पान की खेतों को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के लिए बनी योजना धरातल पर नहीं उतर रही है.

योजना बनने के दो साल बाद भी काम नहीं हुआ पूरा

ऐसा वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट के तहत जिले को पान की खेती के लिए चुना गया है. जिले में पान की खेती भी हो रही हैं, लेकिन इसके औद्योगिकरण के प्रयास विफल साबित हो रहा है. वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट योजना शुरू हुए दो साल से अधिक हो गये, लेकिन अब तक ना तो पान के लिए डेडीकेटेड प्रोसेसिंग प्लांट लगे और ना ही पान की खेती के उन्नत मार्केटिंग की कोई व्यवस्था ही की गयी. किसान अपने बलबूते पान की खेती कर रहे हैं और उसे कोलकाता, बनारस की मंडियों तक पहुंचाते है.

पानी को सुरक्षित रखने के लिए नहीं है प्लांट

नवादा में पान के पत्ते लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए कोई प्लांट नहीं लगाया गया है. ऐसे में किसानों के पास पान के पत्ते को तोड़ने के साथ ही तुरंत मार्केट में पहुंचाने की जल्दी रहती है. इस कारण किसान कम रेट पर भी पान के पत्ते को मंडियों में बेच देते है. कभी कभी पानी के पत्ते नहीं बिकने पर नुकसान भी होता है. जिला उद्यान पदाधिकारी सुधीर कुमार तिवारी ने बताया कि पान की खेती को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार की ओर से किसानों की मदद की जा रही है.

16.5 हेक्टेयर पान की खेती के लिए दिया गया अनुदान

वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट योजना के तहत पान की खेती को चुना गया है और पान किसानों को भारी-भरकम अनुदान दिया जा रहा है. एक यूनिट पान लगाने का खर्च 70 हजार 500 रुपये अनुमानित है. इसके तहत सरकार की ओर से 35 हजार 250 की सब्सिडी दे रही है. पिछले साल 83 किसानों को अनुदान मिला था. इस बार 16.5 हेक्टेयर पान की खेती के लिए अनुदान की राशि वितरित हो रही है. उद्यान विभाग के आंकड़े के अनुसार जिले में 1500 किसान पान की खेती कर रहे हैं. इन किसानों को तीन फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के मध्यम से अनुदान दिया जायेगा.

इन गांवों में दो हजार से अधिक किसान करते है पान की खेती

नवादा के हिसुआ के तुंगी, मंझवे, बेलदारी, रामनगर, डफलपुरा, ढेवरी, कैथिर, नारदीगंज के हंडिया, पचिया, पकरीबरावां के छतरवार, डोला, काशीचक के नया डीह, रोह प्रखंड के पचिया, कौवाकोल के ईंटपकवा, बड़राजी, आदि गांवों के करीब डेढ़ से दो हजार से अधिक किसान पान की खेती करते हैं.

विदेशों में बेच सकते हैं पान के पत्ते

नवादा के पान की खेती को जीआई टैग भी मिला हुआ है. जीआई टैग मिलने के बाद यहां से पान के पत्ते को विदेश में भी बेचा जा सकता है. जिला उद्यान पदाधिकारी बताते हैं कि पान की खेती को सफल उद्योग के रूप में विकसित करने के लिए सरकारी स्तर से तो हर संभव प्रयास हो रहा है, लेकिन इसके साथ ही फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी को एकजुट होकर पहल करनी होगी.

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