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Exclusive: तेजस्वी यादव के दिये अल्टीमेटम के 60 दिन पूरे, 45% डॉक्टर अब भी समय से नहीं पहुंच रहे अस्पताल

Updated at : 09 Nov 2022 7:22 AM (IST)
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Exclusive: तेजस्वी यादव के दिये अल्टीमेटम के 60 दिन पूरे, 45% डॉक्टर अब भी समय से नहीं पहुंच रहे अस्पताल

स्वास्थ्य मंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव द्वारा सदर अस्पतालों में सुधार के 60 दिनों के अल्टीमेटम की अवधि मंगलवार को पूरी हो गयी. कुछ चीजों में अल्टीमेटम का असर साफ दिखायी दे रहा है, तो कई चीजों की स्थिति जस की तस बनी हुई है.अस्पतालों में डॉक्टरों की समय पर उपस्थिति अभी सौ फीसदी नहीं हो सकी है.

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प्रभात खबर टीम, पटना. स्वास्थ्य मंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव द्वारा सदर अस्पतालों में सुधार के 60 दिनों के अल्टीमेटम की अवधि मंगलवार को पूरी हो गयी. कुछ चीजों में अल्टीमेटम का असर साफ दिखायी दे रहा है, तो कई चीजों की स्थिति जस की तस बनी हुई है.अस्पतालों में डॉक्टरों की समय पर उपस्थिति अभी सौ फीसदी नहीं हो सकी है. हालांकि, बायोमेट्रिक अटडेंेंस की अनिवार्यरता और अल्टीमेटम के बाद अस्पतालों में डॉक्टर और स्टॉफ की उपस्थिति पहले की तुलना में बढ़ी है. उसके बाद भी 40-45 फीसदी अस्पतालों के ओपीडी में समय पर डॉक्टर और दूसरे स्टाफ नहीं पहुंच रहे हैं. साफसफाई में सुधार करने के अल्टीमेट के बाद अब भी अस्पतालों की बड़ी समस्या शौचालय की कमी और उसकी सफाई बनी हुई है. तकरीबन 90 फीसदी अस्पतालों में यह समस्या कायम है.

इन पांच मुद्दों पर की गयी पड़ताल

  • हेल्प डेस्क बना या नहीं. यदि बना तो काम कर रहा है या नहीं

  • साफ-सफाई और शौचालय की क्या है स्थिति

  • लैब जांच की सूचना प्रदर्शित है या नहीं दवाओं की सूची प्रदर्शित है या नहीं

  • दवा काउंटरों की संख्या बढ़ी या नहीं

  • डॉक्टर व स्टाफ समय से ड्यूटी पर आ रहे हैं या नही

ओपीडी में दवा लिखते हैं जीएनएम

सीवान में सदर अस्पताल प्रशासन द्वारा डाक्टर एवं अन्य कर्मचारियों को समय से ड्यूटी पर आने के लिए तीन बायोमीटरिक मशीन लगायी गयी है. इसके बावजूद डॉक्टर और स्टाफ समय से ड्यूटी पर नहीं आते हैं. सोमवार आठ नवंबर को सुबह 9:00 बजे तक सदर अस्पताल के महिला ओपीडी छोड़कर किसी भी ओपीडी में डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे. सामान्य ओपीडी में डॉक्टर की जगह जीएनएम मरीजों को दवा लिख रहा था. वही आपात कक्ष में 9:00 बजे तक कोई भी डॉक्टर उपलब्ध नहीं था. इस संबंध में पूछे जानेपर स्वास्थ्य कर्मियों ने बचाव करते हुए बताया कि डॉक्टर साहब ड्यूटी रूम में हैं.

पड़ताल में खुलासा

  • 75% अस्पतालों में हेल्प डेस्क बने, पर इनमें से कई नहीं कर रहे का

  • 40-45% डॉक्टर अब भी समय से नहीं पहुंच रहे अस्पताल

  • ज्यादातर अस्पतालों में शौचालयों की व्यवस्था में सुधार की जरूरत

  • लगभग सभी अस्पतालों में जांच और दवाओं की सूची लगी

कहीं गार्ड को ही हेल्प डेस्क की जिम्मेदारी, तो कहीं लगा है ताला

राज्य के लगभग 75 फीसदी से अधिक अस्पतालों में सहायता बूथ (मे आइ हेल्प यू डेस्क) बना दिये गये हैं, लेकिन कर्मियों की कमी के कारण कई जगहों पर यह काम नहीं कर रहा है. लखीसराय सदर अस्पताल में आनन-फानन में हेल्प डेस्क बना, पर यहां गार्ड को इसकी जिम्मेदारी सौंप दी गयी, जिसके पास कुछ जानकारी ही नहीं होती है. अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल गया में अभी तक हेल्प डेस्क नहीं बना है, जबकि नालंदा जिला अस्पताल में हेल्प डेस्क पहले तो काम कर रहा था, अभी बंद है.

‘लैब जांच घर इधर है…’

तकरीबन सभी अस्पतालों में जांच और दवाओं की सूची लगा दी गयी है, लेकिन वास्तविकता में सूची और मिलने वाली दवाओं में काफी अंतर है. यही स्थिति जांच को लेकर है. अगर उदाहरण के तौर पर मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल को लें, तो यहां सूची में 77 प्रकार की दवाएं दिखायी गयी हैं, जबकि 33 प्रकार की दवा ही मिल रही है. इसी तरह जहानाबाद में ‘लैब जांच घर इधर है’… के लिए इंडिकेटर लगा है, लेकिन कौन-कौन सी जांच की सुविधा उपलब्ध है, इसके लिए कोई डिस्पले की सुविधा नहीं है.

11 चिकित्सकों का वेतन काट दिया गया

स्वास्थ्य मंत्री की चेतावनी मिलने के बाद मधुबनी सदर अस्पताल में इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधी सारी सविधाएं दुरुस्त हो गयी हैं, लेकिन मरीजों के इलाज के लिए न तो समय पर ओपीडी खुलता है, न ही नियत समय पर डॉक्टर उपलब्ध होते हैं. अस्पताल प्रशासन डॉक्टरों की अनुपस्थिति को लेकर गंभीर है. इसकी एक बानगी मोतिहारी सदर अस्पताल के डॉक्टरों पर की गयी कार्रवाई में देखी जा सकती है. इस अस्पताल में चेतावनी के बाद भी देर से आने का सिलसिला जारी था. निरीक्षण के दौरान पकड़े गये 11 चिकित्सकों का वेतन काट दिया गया.

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यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

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