बिहार में सूखे जैसे हालात, किसानों को मुफ्त बीज बांटेगी सरकार, डीजल सब्सिडी पर खर्च करेगी 150 करोड़

Updated at : 26 Jul 2023 8:28 PM (IST)
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बिहार में सूखे जैसे हालात, किसानों को मुफ्त बीज बांटेगी सरकार, डीजल सब्सिडी पर खर्च करेगी 150 करोड़

बिहार में जरूरत से 45 फीसदी कम बारिश हुई है. अभी तक 442.3 एमएम बारिश होनी चाहिए थी, जिसमें 242 एमएम ही बारिश हुई है. ऐसे में राज्य में सूखे के हालत पैदा हो रहे हैं. ऐसे में किसानों को राहत देने के लिए सरकार क्या कार्य कर रह इस बात की जानकारी कृषि मंत्री ने दी.

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बिहार में बन रहे सूखे की हालात से निबटने के लिए सरकार डीजल अनुदान पर डेढ़ सौ करोड़ रुपये खर्च करेगी. बुधवार को कृषि मंत्री कुमार सर्वजीत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर धान समेत अन्य खेती की स्थिति की जानकारी दी. मंत्री ने कहा कि राज्य में बारिश नहीं होने की स्थिति में सरकार आकस्मिक कौशल योजना के तहत किसानों को 15 फसलों के बीज मुफ़्त में बांटेगी. उन्होंने कहा कि सूखे की स्थिति में किसानों को हर संभव मदद देने का प्रेस किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि सिंचाई के लिए प्राथमिकता के आधार बिजली देने के लिए सभी जिलों के डीएम से कहा गया है.

राज्य में 45 % कम हुई बारिश, 49 % ही धान की रोपनी

मंत्री ने बताया कि राज्य में जरूरत से 45 फीसदी कम बारिश हुई है. अभी तक 442.3 एमएम बारिश होनी चाहिए थी, जिसमें 242 एमएम ही बारिश हुई है. अब तक 49.19 प्रतिशत ही धान की रोपनी हो सकी है. 35,97,595 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती का लक्ष्य था, जिसमें अभी मात्र 17,69,688 हेक्टेयर क्षेत्र में ही धान की रोपनी हुई है. मंत्री ने कहा कि इस हालात से किसानों को उबारने के लिए सरकार की ओर से कई पहल की जा रही हैं. सरकार पटवन के लिए किसानों को 150 करोड़ रुपये डीजल अनुदान देने जा रही है. इसके लिए अब तक 13,901 किसानों ने ऑनलाइन आवेदन किया है. मौके पर कृषि निदेशक डॉ आलोक रंजन घोष भी थे.

डीएम को निर्देश पटवन के लिए 12 घंटे बिजली की करें आपूर्ति

मंत्री ने कहा कि कृषि फीडर से 12 घंटे बिजली देने की पहल की जा रही है. सभी डीएम को कहा गया है कि एक-एक या दो-दो घंटे बिजली देकर 12 घंटे नहीं पूरा करना है. बल्कि, कम से कम पटवन करने लायक बिजली देनी है. मंत्री ने कहा कि सूखे की स्थिति पर सरकार की नजर है.

डीजल अनुदान के लिए डेढ़ सौ करोड़ रुपये दे रही सरकार

कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार डीजल अनुदान के लिए डेढ़ सौ करोड़ रुपये दे रही है. वहीं, अगर इससे अधिक की जरूरत पड़ी तो और राशि दी जाएगी. उन्होंने बताया कि अभी तक 13000 से अधिक किसानों ने डीजल अनुदान के लिए आवेदन किया है. पिछले साल डीजल अनुदान के लिए 600 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई थी. वहीं कृषि निदेशक आलोक रंजन घोष ने बताया कि अटरिक्त बीज उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा गया है.

मुंगेर व बांका सहित नौ जिलों में स्थिति खराब

कृषि मंत्री ने बताया कि मुंगेर व बांका सहित दक्षिण बिहार के नौ राज्यों में इस वर्ष धान की खेती ठीक नहीं हुई है. नहर से सिंचाई वाले जिले औरंगाबाद, गया, मधेपुरा समेत अन्य जिलों में नहरों की सफाई और मरम्मत का कार्य लघु सिंचाई विभाग से कराया जायेगा. उन्होंने कहा कि केंद्र ने बिहार की कई योजनाओं को लटका रखा है. नेपाल से हजारों लीटर पानी की बर्बादी हो रही है.

मक्का की खेती सुधरी, 50 करोड़ से होगी आकस्मिक खेती

कृषि मंत्री ने कहा कि इस वर्ष 3, 31, 367 हेक्टेयर क्षेत्र में मक्का लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसमें अभी तक 2, 73, 087.42 हेक्टेयर क्षेत्र में मक्का की बुआई की गयी है. मंत्री ने कहा कि 15 अगस्त तक बारिश और धान की रोपनी का इंतजार किया जायेगा. इसके बाद आकस्मिक फसल योजना के तहत शॉर्ट टाइम धान, हाइब्रिड मक्का, अरहर, तोरिया, उड़द, सरसों, मटर, भिंडी, मूली, कुलथी, मड़ुआ, सावा, कोदो, ज्वार, तथा बरसीम की खेती पर फोकस किया जायेगा. इसके लिए 50 करोड़ रुपया अलग से रखा गया है. सभी जिलों में खाद का स्टॉक है.

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उचित दाम पर किसानों को मिलेगा खाद

इधर, औरंगाबाद के रफीगंज प्रखंड मुख्यालय स्थित किसान सभागार भवन में प्रखंड स्तरीय उर्वरक निगरानी समिति की बैठक में बीएओ देवेंद्र कुमार ने उपस्थित लोगों के बीच कहा कि अपनी दुकान के स्टॉक की पूरी जानकारी रखें. ताकि आपके गोदाम या दुकान में कोई जांच के लिए जाएं तो उन्हें सही जानकारी हो सके. किसान के लिए हर हाल में व्यवस्था ऐसी बनाईये कि इन्हें आसानी से खाद उपलब्ध हो सके और कहीं से कोई शिकायत नहीं हो. वहीं राजद प्रखंड अध्यक्ष रणविजय यादव ने कहा कि उचित मूल्य पर किसान को खाद उपलब्ध कराएं. धान का सीजन शुरू हो गया है. खाद विक्रेता आसान तरीका अपनाते हुए उचित मूल्य पर ही किसान को खाद दें. प्रमुख प्रतिनिधि ने कहा कि आवंटन बढ़ाने के लिए वरीय पदाधिकारियों से बात की जा रही है. रफीगंज के किसान को खाद की किल्लत नहीं झेलनी पड़ेगी.

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