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Darbhanga : संस्कृति, स्वाधीनता और स्वाभिमान का प्रतीक है वंदे मातरम

Updated at : 07 Nov 2025 6:23 PM (IST)
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Darbhanga : संस्कृति, स्वाधीनता और स्वाभिमान का प्रतीक है वंदे मातरम

राष्ट्रगीत ''वंदे मातरम'' के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में बुधवार को विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

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संस्कृत विश्वविद्यालय में राष्ट्रगीत का हुआ सामूहिक गान दरभंगा. कामेश्वरसिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग में राष्ट्रगीत ””वंदे मातरम”” के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में बुधवार को विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया. अध्यक्षता विभाग के निदेशक डॉ घनश्याम मिश्र ने की. इस दौरान वंदे मातरम का सामूहिक गान किया गया. डॉ घनश्याम मिश्र ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष की आत्मा है. इसने स्वतंत्रता सेनानियों में उत्साह, जोश और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना को जीवित रखा. डॉ रामानंद झा ने कहा कि वंदे मातरम ने स्वतंत्रता आंदोलन के समय जन-जन को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया. डॉ रामसेवक झा ने कहा कि वंदे मातरम हमें याद दिलाता है कि स्वतंत्रता केवल अधिकार नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व भी है. डॉ प्रीति रानी ने कहा कि यह गीत भारतीयों में गौरव और स्वाभिमान की भावना को प्रगाढ़ करता है. कार्यक्रम में विभागीय प्राध्यापकों, कर्मचारियों के अलावा शिक्षाशास्त्र विभाग के छात्र -छात्राएं शामिल थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SATISH KUMAR

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SATISH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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