Darbhanga News: बिहार पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2025 के ड्राफ्ट में कई बदलाव के संकेत

Updated at : 19 Apr 2025 10:09 PM (IST)
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Darbhanga News: बिहार पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2025 के ड्राफ्ट में कई बदलाव के संकेत

Darbhanga News:बिहार पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2025 का ड्राफ्ट जारी कर दिया गया है.

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Darbhanga News: दरभंगा. बिहार पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2025 का ड्राफ्ट जारी कर दिया गया है. एससीइआरटी ने इसे जारी करते हुए स्टेकहोल्डर से सुझाव मांगा है. एससीइआरटी के निदेशक ने कहा है कि यह पाठ्यचर्या विद्यालयी शिक्षा का आधार होगा तथा अकादमी कार्य योजनाओं का रोड मैप तैयार करने के लिए दिशा प्रदान करेगा. ड्राफ्ट बिहार पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2025 की सॉफ्ट कॉपी एनसीइआरटी की वेबसाइट पर उपलब्ध है. क्यूआर कोड स्कैन कर इसे डाउनलोड किया जा सकता है. उन्होंने जनसाधारण, शिक्षाविद् एवं अन्य नागरिकों से इसका अध्ययन कर मंतव्य, सुझाव एवं फीडबैक परिषद के आधिकारिक ईमेल पर 20 मई की संध्या छह बजे तक उपलब्ध कराने को कहा है.

रोड मैप तय करेगा बिहार की शिक्षा की दशा एवं दिशा

बिहार पाठ्यचर्या की रूपरेखा (बीसीएफ) एससीइआरटी द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (एनइपी) एवं राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2023 (एनसीएफ) के आलोक में तैयार किया गया है. यह एक रोड मैप है, जो बिहार की शिक्षा का दशा एवं दिशा तय करेगा. इसे एससीइआरटी के विशेषज्ञ दलों द्वारा तैयार किया गया है. नई शिक्षा नीति के आधार पर इसे तैयार किया गया है. तैयार ड्राफ्ट पर प्राप्त आपत्ति का विशेषज्ञों द्वारा निपटारा करने के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा.

शिक्षण घंटे में बड़े बदलाव के संकेत

बीसीएफ के ड्राफ्ट में शिक्षक घंटे में बड़े बदलाव का संकेत है. ड्राफ्ट में बुनियादी स्तर के विद्यालयों का संचालन सुबह 9.30 से 1.30 तक का प्रस्ताव है. वही प्रारंभिक स्तर के विद्यालयों का संचालन नौ से तीन बजे तक, मध्य स्तर के विद्यालय का संचालन 8.30 से 3.45 बजे तक, माध्यमिक स्तर के विद्यालय का संचालन आठ बजे से शाम 4.35 बजे तक किया जाएगा. इस प्रकार एक ओर जहां विभिन्न स्तर के विद्यालयों का संचालन अलग-अलग समय पर होगा, वही शिक्षक घंटी में भी बढ़ोतरी होगी.

शिक्षक को प्रोफेशनल बनाने के कई सुझाव

शिक्षकों को प्रभावी बनाने के लिए इसे प्रोफेशन का रूप देने की बात कही गई है. इसके तहत शिक्षकों को अच्छी सेवा, अच्छा वेतन एवं प्रोन्नति के साथ-साथ विद्यालय को अधिक सुविधा संपन्न बनने पर जोर दिया गया है. शिक्षार्थियों के समग्र विकास के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण क्षमताओं, मूल्य और प्रवृत्तियों को भी बढ़ावा देने का सुझाव दिया गया है.

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