दरभंगा के इस स्कूल में 235 बच्चों की जान पर खतरा! 24 में 9 कमरे जर्जर, छत से गिरता है मलबा

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विद्यालय का जर्जर कीचेन शेड. | Prabhat Khabar Network

लालपुर टोला के मध्य विद्यालय में नौ कमरे अति जर्जर हैं. छत से गिरते मलबे के बीच बच्चों की सुरक्षा को लेकर शिक्षक चिंतित हैं. विद्यालय में शिक्षकों की कमी के साथ किचेन शेड और खेल मैदान की समस्या भी बनी हुई है.

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दरभंगा न्यूज: राढ़ी पश्चिमी पंचायत के महादलित बहुल लालपुर टोला स्थित मध्य विद्यालय लालपुर में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर स्थिति बनी हुई है. विद्यालय के 24 कमरों में नौ कमरे अति जर्जर हो चुके हैं. इन कमरों की छत से आए दिन मलबा गिरता रहता है. इससे विद्यालय में पढ़ने वाले 235 बच्चों के साथ किसी भी समय हादसा होने की आशंका बनी हुई है. विद्यालय में सामान्य दिनों में 175 से 200 बच्चे उपस्थित रहते हैं.

दरवाजे ठीक हैं तो कमरों में लगा दिया ताला

जर्जर वर्ग कक्ष दिखाती प्रभारी एचएम | Prabhat Khabar Network
जर्जर वर्ग कक्ष दिखाती प्रभारी एचएम | Prabhat Khabar Network

प्रभारी एचएम चंदा देवी समेत विद्यालय के शिक्षकों ने बताया कि बच्चों के स्कूल पहुंचने से लेकर छुट्टी के बाद घर लौटने तक उनकी सुरक्षा की चिंता बनी रहती है. जिन जर्जर कमरों के दरवाजे अभी ठीक हैं, उनमें ताला लगा दिया गया है. वहीं, जिन कमरों के दरवाजे टूट चुके हैं, उनमें बच्चों के खेलते समय चले जाने या छिपने की आशंका बनी रहती है.

शिक्षकों का कहना है कि जर्जर कमरों की स्थिति ऐसी है कि कभी भी छत या दीवार का हिस्सा गिर सकता है. ऐसे में इन कमरों की जल्द मरम्मत या पुनर्निर्माण जरूरी है.

235 बच्चों पर सिर्फ चार शिक्षक

मध्य विद्यालय लालपुर में कक्षा आठ तक 235 बच्चे नामांकित हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए महज चार शिक्षक पदस्थापित हैं. इनमें तीन शिक्षक प्राथमिक वर्ग के हैं. कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों के लिए चंदा देवी ही एकमात्र शिक्षिका हैं. इसके साथ ही वह विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं.

शिक्षकों की कमी का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है. एक ओर भवन की समस्या है, वहीं दूसरी ओर पर्याप्त शिक्षकों के नहीं होने से शैक्षणिक व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है.

कक्षा में चल रहा रसोईघर

विद्यालय का किचेन शेड भी जर्जर स्थिति में है. इसके कारण एक वर्ग कक्ष का इस्तेमाल रसोईघर के रूप में किया जा रहा है. वहीं, एक अन्य कमरे में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहा है. इससे विद्यालय में उपलब्ध कक्षों पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है.

खेल मैदान तक नहीं, बच्चों के सर्वांगीण विकास पर असर

विद्यालय परिसर में खेल मैदान का भी अभाव है. जर्जर भवन, शिक्षकों की कमी, कक्षा में रसोईघर का संचालन और खेल मैदान नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई के साथ उनके सर्वांगीण विकास पर भी असर पड़ रहा है. शिक्षकों ने विद्यालय के जर्जर कमरों की जल्द मरम्मत या पुनर्निर्माण कराने की जरूरत बतायी है.

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Keshavendra Pratap Thakur

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