बेनीपुर. एक ओर जहां सरकारी विद्यालयों के कमजोर बच्चों को पूर्ण दक्ष बनाने के लिए ग्रीष्मावकाश में विशेष दक्षता वर्ग का संचालन किया जा रहा है, वहीं पाठ्य पुस्तक के अभाव के बीच प्रखंड क्षेत्र के 163 प्राथमिक व मध्य समेत आधा दर्जन से अधिक संस्कृत विद्यालय के बच्चे शिक्षा प्राप्त करने को मजबूर हैं. सरकारी निर्देश के आलोक में वर्ग एक से आठवीं तक के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए मुफ्त पाठ्य पुस्तक उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है, लेकिन विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के कारण अभी तक शत-प्रतिशत बच्चों को पाठ्य पुस्तक उपलब्ध नहीं कराया जा सका है. वहीं विभिन्न संस्कृत विद्यालय में नामांकित बच्चों को विभाग की इस महत्वाकांक्षी योजनाओं से मानो अलग-थलग कर दिया गया है. इसे लेकर संस्कृत विद्यालय में नामांकित बच्चों का भविष्य अधर में लटका हुआ है. विभागीय आंकड़ों के अनुसार प्रखंड क्षेत्र के 163 सामान्य विद्यालयों के नामांकित 70 फीसदी बच्चों को ही पाठ्य पुस्तक उपलब्ध कराया गया है. वहीं 30 प्रतिशत बच्चे आज भी बिना किताब के ही ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं. इस संबंध में पूछने पर बीइओ इंदु सिन्हा ने कहा कि जिला से मांग के अनुरूप पाठ्य पुस्तक उपलब्ध नहीं कराये गये. इस कारण लगभग 42 सौ बच्चों को अभीतक पुस्तक नहीं मिली है. नामांकित 28 हजार 950 छात्र-छात्राओं की संख्या में 10 फीसदी वृद्धि कर 35 हजार 350 बच्चों के लिए पुस्तक उपलब्ध कराने का डिमांड जिला को भेजा गया था. इसमें से मात्र 24 हजार 749 बच्चों के लिए ही पुस्तक उपलब्ध कराया गया, जिसे 70 फीसदी बच्चों के बीच बांट दिया गया. शेष के लिए दुबारा जिला को लिखा गया है. रही संस्कृत विद्यालय की बात तो जिला से इन स्कूलों को पाठ्य पुस्तक देने के लिए डिमांड भेजा ही नहीं गया था. इस कारण प्रखंड के आठ संस्कृत विद्यालय को पाठ्य पुस्तक उपलब्ध नहीं कराया गया है. सामान्य विद्यालय के बच्चों में से ही कुछ पाठ्य पुस्तक काटकर एक-दो संस्कृत विद्यालय को भी उपलब्ध कराया गया है. शेष संस्कृत विद्यालय के बच्चे पाठ्य पुस्तक से वंचित हैं. इसमें जनता संस्कृत विद्यालय डखराम के 135, दुर्गा भवन संवि बहेड़ा के 171, संवि लवानी के 45, शिवजी संउवि बैगनी के 64 सहित संवि तरौनी, संवि नवादा, संवि कल्याणपुर फतुल्लाह के नामांकित बच्चों को न तो पाठ पुस्तक मिला है और न ही विद्यालय किट ही मिल सका है.
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सरकारी स्कूलों के 70 फीसदी बच्चों को ही मिल सकी पाठ्य पुस्तकें
पाठ्य पुस्तक के अभाव के बीच प्रखंड क्षेत्र के 163 प्राथमिक व मध्य समेत आधा दर्जन से अधिक संस्कृत विद्यालय के बच्चे शिक्षा प्राप्त करने को मजबूर हैं.
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Prabhat Khabar News Desk
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