गड्ढों का शहर बना बेतिया

Published at :16 Jul 2013 1:54 PM (IST)
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गड्ढों का शहर बना बेतिया

बेतियाः पश्चिम चंपारण का जिला मुख्यालय बेतिया. जिसे हाकिमों का शहर भी कहा जाय तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी. क्योंकि यहां तीन पुलिस जिला यानी चंपारण रेंज के डीआइजी से लेकर प्रखंड स्तर के अधिकारी तक का बसेरा व कार्यालय है. अन्य अधिकारियों की बात कौन कहे जिले के जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक तक को […]

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बेतियाः पश्चिम चंपारण का जिला मुख्यालय बेतिया. जिसे हाकिमों का शहर भी कहा जाय तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी. क्योंकि यहां तीन पुलिस जिला यानी चंपारण रेंज के डीआइजी से लेकर प्रखंड स्तर के अधिकारी तक का बसेरा व कार्यालय है. अन्य अधिकारियों की बात कौन कहे जिले के जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक तक को भी इन गड्ढ़ों से होकर नित्य प्रतिदिन गुजरने की आदत सी हो गयी है.

लेकिन किसी भी साहेब का ध्यान शायद शहर की सड़कों पर असंख्य बने गड्ढ़ो पर नहीं जा पाता. या यूं कहे कि हाकिमों की लग्जरी गाड़ियों में सड़क के गड्ढ़े का जर्क महसूस नहीं हो पाता. इस हालत में शहरी विकास व सड़कों की विकास की बात बेतिया के लिये बेमानी लग रही है. वैसे आम जन तो इन गड्ढ़ों से होकर गुजरने के आदि है. लेकिन, शहर के विभिन्न इलाके में बने कुछ गड्ढ़े ऐसे भी है. जो कभी भी जानलेवा बन सकते हैं. किसी भी अनचाहे हादसा को कभी भी आमंत्रित कर सकते है.

ऐसे गड्ढ़ो में शहर के प्रवेश द्वारा हरिबाटिका में बना विशाल गड्ढ़ा जहां से होकर सूबे व दूसरे प्रदेशों के लिये प्रतिदिन सैकड़ों वाहन गुजरते हैं. जिसकी वजह से यहां दबाव अधिक है और शायद यही कारण है कि यहां का गड्ढ़ा कभी समाप्त ही नहीं हो पाता. यह हाल सिर्फ हरिबाटिका का ही नहीं, बल्कि महारानी जानकी कुंअर के ख्वाबों की नगरी बेतिया के समाहरणालय चौक, छावनी चौक, मुहर्रम चौक, जनता सिनेमा चौक, तीन लालटेन चौक, कविवर नेपाली चौक, नया बाजार चौक, कालीबाग चौक, नाजनीन चौक, खिरियाघाट सहित दर्जनों ऐसे चौक चौराहे व स्थान है जो वर्तमान में भी कई छोटे बड़े गड्ढ़ो से पटे पड़े हैं.

बरसात के समय में जिनकों देखने पर लगता है कि सड़क के बीच बने ये गड्ढ़े चलते फिरते तालाब है. नाम नहीं छापने की शर्त पर कई शहरी ने तो यहां तक कह डाला कि जब सूबे के कोई बड़े अधिकारी व नेता का आगमन होता है तो चंद दिनों के लिये ऐन-केन प्रकारेण इन गड्ढ़ों को पाट दिया जाता है. लेकिन फिर उनके जाने के बाद शहर की स्थिति ढ़ाक के तीन पात वाली कहावत को चरितार्थ करती है. इधर, आधिकारिक सूत्रों पर यकीन करे तो शहर की सड़कों के जीर्णोद्धार की योजना बनायी गयी है. बहुत जल्द ही इस पर अमल होने वाला है.

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