पटाखे के लिए मिलनेवाले रुपये से करेंगे गरीब की मदद
Updated at : 25 Oct 2016 5:21 AM (IST)
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पटाखा व चायनीज सामान के उपयोग से करेंगे परहेज मधुबनी : जब तक हर उम्र के लोग जागरूक नहीं होंगे, रुपये पैसे का मोल नहीं समझेंगे तब तक देश की आर्थिक स्थिति नहीं सुधर सकती है. दीपावली छठ पर्व में लोग पल भर के मनोरंजन के लिए करोड़ो रुपये का पटाखा जला देते हैं. कुछ […]
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पटाखा व चायनीज सामान के उपयोग से करेंगे परहेज
मधुबनी : जब तक हर उम्र के लोग जागरूक नहीं होंगे, रुपये पैसे का मोल नहीं समझेंगे तब तक देश की आर्थिक स्थिति नहीं सुधर सकती है. दीपावली छठ पर्व में लोग पल भर के मनोरंजन के लिए करोड़ो रुपये का पटाखा जला देते हैं. कुछ देर के लिए पटाखा छोड़ने वाले भले ही खुश होते हों, पर किसी एक की खुशी हजारों लोगों के लिए परेशानी दे जाती है. पटाखा छोड़ने से निकलने वाले धुआं वातावरण को प्रदूषित कर देते हैं. इससे परहेज करना होगा.
सोमवार को विवेकानंद मिशन विद्यापीठ के छात्रों ने इको फ्रेंडली दीपावली मनाने का संकल्प लिया.
तनु श्री : बताती है कि हमें रुपये पैसे की अहमीयत को समझना चाहिये. यदि लोग यह संकल्प लें कि साल में दीपावली व छठ पर ही जितने रुपये के पटाखा छोड़ते हैं उतनी राशि किसी गरीब परिवार को देकर सहयोग कर दें तो समाज का एक भी गरीब भूखा नहीं रहेगा. लोगों को पटाखा नहीं छोड़ने का संकल्प लेना चाहिये.
मयंक प्रिया: इसी प्रकार मयंक प्रिया कहती कि कई बार पटाखा छोड़ने में असावधानी से दुर्घटना हो जाती है. इस साल पापा ने भी हम लोगों को पटाखा छोड़ने से मना किया है. वह संकल्प लेते हुए कहती कि दीपावली के दिन हम लोग सुबह से ही फूल से घर सजायेंगे और एक पौंधा भी लगायेंगी.
अदिति : बताती है इस साल वे पटाखा के लिए मिलने वाले रुपये से किसी एक गरीब परिवार में दीपावली के सामान उपहार स्वरूप देंगी. जब वह गरीब परिवार खुश होकर उन्हें आशीर्वाद देगी तो वही उसके जीवन का सबसे अनमोल तोहफा होगा.
मुस्कान कुमारी बताती हैं कि हर साल हम चकरी, फुलझड़ी व पटाखा दीपावली से लेकर छठ पर्व तक छोड़ते हैं. पर इस साल तो एक भी पटाखा नहीं छोड़ने का संकल्प लिया है. इस साल किसी गरीब परिवार में जाकर कपड़े का तोहफा वे देंगी.
शालिनी प्रिया : बताते हैं कि कुछ साल पहले तक पटाखे के लिए बेहाल रहता था. पर पिछले साल उनके पड़ोसी का हाथ जल गया था. कहा कि अब उन्हें भी पटाखा छोड़ने में डर लगता है. उन्होंने पटाखें न छोड़ने का भी संकल्प लिया.
अनिशा ने कहा कि दीपावली हंसी खुशी का पर्व है. पर लोग पटाखा व फुलझड़ी छोड़ कर वातावरण को प्रदूषित करते हैं. पर वे प्रदूषण रहित दीपावली मनायेंगे. पटाखे न छोड़ने के संकल्प के साथ उन्होंने कहा कि हमें अपने पर्यावरण को बचाना चाहिए.
सुप्रिया ने कहा कि पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने की जिम्मेदारी हर लोगों की है. हर लोगों को पर्यावरण को बचाने का संकल्प लेनी चाहिये. उन्होंने हर लोगों से इस पर्व में पटाखा या अन्य सामान को जलाने से परहेज करने की अपील की है.
सुमन कुमार बताते हैं कि संकल्प लेते हुए कहा है कि दीपावली पर धूम-धाम से मनायेंगे. इस पर्व में हम अपने कर्तव्य से भी पीछे नहीं हटेंगे. हम ऐसा काम नहीं करेंगे जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचे. पटाखे न छोड़ घी के दीये जलायेंगे और अपने आस-पास के लोगों से भी पटाखे न छोड़ने को कहेंगे.
मयंक राज ने कहा कि हर साल लोग लाखों रुपये के पटाखा व फुलझड़ी छोड़ते हैं. इसमें अधिकांश पटाखे विदेशी निर्मित होते हैं. हम अपने देश की कमाई का बड़ा भाग विदेश को दे देते हैं . हम संकल्प लेते हैं कि इस दीपावली ऐसा कोई सामान नहीं खरीदेंगे जो विदेशी निर्मित हो.
शुभम कुमार ने कहा कि दीपावली में पटाखा फोड़ने से वातावरण प्रदूषित हो जाती है. पर यह सब जानते हुए भी लोग पटाखा व फुलझड़ी छोड़ते हैं. इससे कई प्रकार की हानि होती है. इस दीपावली हम लोग एक भी पटाखा या फुलझड़ी नहीं छोड़ेंगे.
मंजीत कुमार कहते हैं कि बच्चे के साथ साथ अभिभावकों को भी इको फ्रेंडली दीपावली के लिए संकल्प लेना चाहिये . अभिभावक भी खुशी खुशी बच्चों को खतरनाक बम, पटाखे लाकर देते हैं. बाद में हादसे होने पर सब परेशान होते हैं. हमारा पूरा परिवार हर साल इको फ्रेंडली दीपावली ही मनाते हैं इस साल भी पटाखा बम नहीं छोड़ेंगे.
सोनू कुमार : खतरनाक पटाखे से निकलने वाले धुआं से जलन होती है. प्रदूषण के कारण हमने शपथ ली है कि प्रदूषण रहित दीपावली मनायेंगे. पटाखे न सिर्फ पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं बल्कि मानव जीवन को भी प्रभावित करते हैं. इस दिन पौधा लगाकर पर्यावरण को संरक्षित करने का संकल्प लेंगे.
नीतीश कुमार, सुमित कुमार, आदित्य बताते हैं कि इस साल हम पटाखे व फुलझड़ी के लिए घर से मिलने वाले रुपये से तरह तरह के पेंड़ व फूल के पौंधे खरीदेंगे. इससे हमारा पर्यावरण संरक्षित होगा.
श्रवण पूर्वे (निदेशक ) : बताते हैं कि दीपावली हर्ष, उल्लास व प्रकाश का पर्व है. पर कई बार असावधानी से जान माल की क्षति हो जाती है. इसका सबसे अहम कारण है पटाखा, फुलझड़ी व अन्य चायनिज बिजली सामान का उपयोग करना. हर लोगों को इससे परहेज करने की जरूरत है. सब एक साथ संकल्प लें कि वातावरण को स्वच्छ रखने के लिए हम अपनी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर लें.
डॉ. एसएल दास (प्राचार्य) बताते हैं कि प्रकाश के इस पर्व में सभी हंसी खुशी पर्व मनायें. हमें ऐसा कोई भी काम नहीं करना चाहिये जिससे इस पर्व में कोई परेशानी हो. हमें पटाखे से दूर रहना चाहिये. यह किसी भी रूप में सही नहीं है. आधुनिकता की दौड़ में लोग बिजली के सस्ते चायनिज सामान खरीद लेते हैं. जिससे कई बार शॉट सर्किट से आग लग जाती है. इससे बचना होगा.
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