फूल बेचने के लिए बच्चों की हो रही तस्करी

Updated at : 28 Sep 2016 4:53 AM (IST)
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फूल बेचने के लिए बच्चों की हो रही तस्करी

मोतिहारी : बच्चों के नरम व नाजुक हाथों का प्रयोग अब मेहंदी लगानेे व फूल बेचने के लिए किया जाने लगा है. मानव तस्कर उन्हें मुम्बई की गलियाें में लेे जा रहे हैं और वहां उन्हें बंधुआ मजदूरी के रूप में रख रहे हैं. प्राप्त जानकारी के अनुसार,पूर्वी चंपारण जिले के छौड़ादानो, बनकटवा, ढाका, घोड़ासहन, […]

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मोतिहारी : बच्चों के नरम व नाजुक हाथों का प्रयोग अब मेहंदी लगानेे व फूल बेचने के लिए किया जाने लगा है. मानव तस्कर उन्हें मुम्बई की गलियाें में लेे जा रहे हैं और वहां उन्हें बंधुआ मजदूरी के रूप में रख रहे हैं. प्राप्त जानकारी के अनुसार,पूर्वी चंपारण जिले के छौड़ादानो, बनकटवा, ढाका, घोड़ासहन, रामगढ़वा, केसरिया आदि प्रखंडों के गांवों में तस्कर खुलेअाम घूम रहे हैं और प्रतिदिन बच्चों को मुम्बई भेज रहे हैं. बीते दिनों विमुक्त कराये गये बच्चों से पूछताछ के दौरान यह सामने आया कि उनके अभिभावकों को तीन से पांच हजार रुपये इसके एवज में दिया जाता है.

एक दिन में 10 से 12 लोगों को लगाते हैं मेहंदी : मुम्बई की गलियाें में ये बच्चे प्रतिदिन दस से बारह लोगों को मेहंदी लगाते हैं. हाथ कोमल होने के कारण मुम्बई के रईस व सेठ बच्चों से मेहंदी लगवाना अधिक पसंद करते हैं. ये बच्चे अपनी पीठ पर मेहंदी का सामान रखते हैं और गलियों में घूम-घूमकर यह काम करते हैं. जो भी पैसा मिलता है वह उसे ठेकेदार अपने पास रखता है.
शादी-विवाह में बच्चे देते हैं फूल: शादी-विवाह सहित बड़े समारोहों में गाड़ी सजाने से लेकर गिफ्ट तैयार करने तक का काम फूल से होता है. ये बच्चे उनतक फूल पहुंचाते हैं और अपनी जिंदगी को उसी फूल के नाम कर देते हैं.
जानवर जैसा व्यवहार करते हैं ठेकेदार : इन बच्चों को मुम्बई पहुंचने के साथ ही वहां जानवर जैसा व्यवहार होता है. ठेकेदार की मर्जी से उनकी जिंदगी होती है.
न तो समय पर भोजन मिलता है और न ही समय पर सोने दिया जाता है. छोटी-मोटी बातों पर उनके साथ मारपीट की जाती है.
तस्करों पर मुकदमा करने से है परहेज : बच्चे तो विमुक्त हो जाते हैं लेकिन तस्कर नहीं पकड़े जाते. इसका मुख्य कारण यह है कि कोई गवाह बनना नहीं चाहता. अगर तस्कर गिरफ्तार होता है तो उसपर मुकदमा करने के लिए काफी कसरत करनी पड़ती है. कोई एनजीओ या अधिकारी इस पेंच में नहीं आना चाहते. यही कारण है कि पिछले छह माह में करीब एक हजार बच्चे तो विमुक्त हुए लेकिन तस्कर मात्र दर्जन भर ही पकड़े गये हैं.
मुक्त कराये गये बच्चों से पूछताछ में हुआ खुलासा
मुंबई की गलियों में खाक छानने के लिए प्रतिदिन भेजे जाते हैं बच्चे
अभिभावकों को तीन से पांच हजार रुपये देकर ले जा रहे थे अपने साथ
कांउसलिंग के दौरान अन्य कई जानकारी भी मिलती है. इसमें मेहंदी लगाने से लेकर फूल बेचना आदि शामिल है.
संगीता सिन्हा, अध्यक्ष, जिला बाल कल्याण समिति
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