अस्पतालों में लाखों में आ रहा जेनेरेटर का बिल

Updated at : 08 Aug 2018 4:20 AM (IST)
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अस्पतालों में लाखों में आ रहा जेनेरेटर का बिल

बिजली में सुधार के बाद भी डीजल मद में डेढ़ करोड़ का हुआ भुगतान लो वोल्टेज का दिया जा रहा हवाला प्राक्कलन समिति ने किया था मामले को उजागर मोतिहारी : सदर अस्पताल व इससे जुड़े छोटे-बड़े अन्य अस्पतालों में फेल हो रहा अनवरत बिजली आपूर्ति का दावा. शहर में अगर 20-22 घंटे बिजली मिल […]

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बिजली में सुधार के बाद भी डीजल मद में डेढ़ करोड़ का हुआ भुगतान

लो वोल्टेज का दिया जा रहा हवाला
प्राक्कलन समिति ने किया था मामले को उजागर
मोतिहारी : सदर अस्पताल व इससे जुड़े छोटे-बड़े अन्य अस्पतालों में फेल हो रहा अनवरत बिजली आपूर्ति का दावा. शहर में अगर 20-22 घंटे बिजली मिल रही है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी यह स्थिति 18 घंटे से कम नहीं है. लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत सदर अस्पताल, रेफरल अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आदि में संचालित जेनेरेटर का बिल प्रतिमाह लाखों में आ रहा है. अरेराज का 23 लाख, तो पहाड़पुर का 20 लाख जेनेरेटर डीजल खर्च होता है. प्राक्कलन समिति सदस्य सह विधायक राजू तिवारी ने भी मामले को ले सीएस से जानकारी मांगी थी. इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के कान खड़े हुए.
जिला स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि प्रतिमाह एक से डेढ़ करोड़ रुपये का भुगतान जेनेरेटर मद में हो रहा है. जेनेरेटर संचालक तर्क देते हैं कि वोल्टेज की समस्या रहती है. वोल्टेज समस्या को सीएस डाॅ बीके सिंह भी सिरे से खारिज करते हैं. सुगौली में जांच का हवाला देते हुए बताया कि बिजली रहते हुए जेनेरेटर चल रहा था. पूछा गया तो कारण लो वोल्टेज बताया गया. जब जेनेरेटर बंद करा कर देखा गया तो वोल्टेज सामान्य थी. उन्होंने कहा कि जेनेरेटर से जुड़े सभी स्वास्थ्य केंद्र के अधिकारियों को संबंधित बिजली उपकेंद्र व फीडर से प्रतिदिन का बिजली आपूर्ति रोस्टर व अपने जेनेरेटर संचालन अवधि की रिपोर्ट एक साथ देने को कहा है ताकि तेल की चोरी रोका जा सके. ऐसा नहीं करनेवालों के भुगतान पर रोक लगा दी जायेगी.
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