बिहार में पकड़ुआ विवाह का मामला, सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट के फैसले पर लगाई रोक

Updated at : 05 Jan 2024 5:28 PM (IST)
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बिहार में पकड़ुआ विवाह का मामला, सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट के फैसले पर लगाई रोक

पटना हाईकोर्ट ने अग्नि के समक्ष सात फेरे पूरे नहीं होने के आधार पर शादी को कानूनी तौर पर अमान्य कर दिया था. दुल्हन की अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की हिमा कोहली और अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी और इसपर नोटिस जारी करने की बात कही है.

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पटना. बिहार में पकड़ुआ विवाह को रद्द करने वाले पटना हाई कोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. पटना हाईकोर्ट ने अग्नि के समक्ष सात फेरे पूरे नहीं होने के आधार पर शादी को कानूनी तौर पर अमान्य कर दिया था. दुल्हन की अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की हिमा कोहली और अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी और इसपर नोटिस जारी करने की बात कही है.

संबंधित पक्षकारों को नोटिस जारी

बिहार में पकड़ौआ विवाह या पकड़ुआ विवाह की एक परंपरा रही है. 70 और 80 के दशकों में लड़के को किडनैप करके जबरन कराई जाने वाली ऐसी शादियां धड़ल्ले से होती थीं, जो समय के साथ कम तो हो गईं, लेकिन अब भी कहीं कहीं ऐसे मामले सामने आ रहे हैं. पिछले दिनों ऐसे ही एक मामले पर सुनवाई करते हुए पटना हाई कोर्ट ने पकड़ुआ विवाह को अमान्य करार दे दिया था. हाई कोर्ट के फैसले के बाद दुल्हन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी, जिसपर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मामले में संबंधित पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

30 जून 2013 हुआ था पकड़ौआ विवाह

जानकारी के मुताबिक नवादा के रेवरा गांव निवासी के चंद्रमौलेश्वर सिंह के बेटे रविकांत और लखीसराय के चौकी गांव के बिपिन सिंह की बेटी वंदना कुमारी की दस साल पहले 30 जून 2013 पकड़ुआ विवाह कराया गया था. उसे मंदिर से अगवा किया गया और शादी करा दी गयी जो उसके परिवार को भी मंजूर नहीं है. युवक ने जबरन शादी कराने और शादी के सभी संस्कार पूरे नहीं किए जाने के आधार पर इसे रद्द करने की मांग की थी.

युवक के पक्ष में हाई कोर्ट ने दिया था फैसला

हाईकोर्ट ने युवक के हक में फैसला देते हुए शादी को रद्द कर दिया था. इसके बाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए लड़की ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. दुल्हन की अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक पटना हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट के इस कदम के बाद एक बार फिर नये सिरे से इस प्रकार की शादी पर बहस शुरू हो सकती है.

लड़की पक्ष बता रहा प्रेम-विवाह

जानकारी के अनुसार लखीसराय की लड़की वंदना एवं नवादा जिले के लड़के रविकांत के बीच पकड़ुआ विवाह हुआ था. इस मामले में पटना हाईकोर्ट से मिली हार के बाद लखीसराय के रजौना चौकी निवासी विपिन सिंह की पुत्री वंदना कुमारी ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

10 वर्षों से कोर्ट में लड़ाई लड़ रही है वंदना

वह नवादा के रेवरा निवासी चंद्रमौलेश्वर सिंह के बेटे आर्मी जवान रविकांत के साथ हुए पकड़ुआ विवाह को वैध मान रही हैं. वंदना 10 वर्षों से कोर्ट की लड़ाई लड़ रही हैं. वंदना अपने दो भाइयों से बड़ी हैं. इंटर पास वंदना और आर्मी जवान रविकांत की शादी 30 जून, 2013 को अशोकधाम मंदिर में हुई थी.

वंदना की फुफेरी बहन का देवर है रविकांत

रविकांत वंदना की फुफेरी बहन का देवर है. शादी के संबंध में वंदना का दावा है कि 2013 में शादी से पहले रविकांत और वंदना में प्यार हुआ. इसी बीच रविकांत की आर्मी में नौकरी हो गई. इसके बाद रविकांत के घर वालों ने शादी की रजामंदी नहीं दी.

रविकांत के घरवाले नहीं थे सहमत

बताया जाता है कि रविकांत की मौन सहमति के बीच वंदना से शादी हो गई. हालांकि, शादी के बाद ही रविकांत के घर वाले इस रिश्ते का विरोध करने लगे. लड़के वालों ने इसे पकड़ुआ विवाह बताते हुए रिश्ता मानने से इनकार कर दिया, चूंकि अपहरण के बाद शादी की रस्म कराई गई थी. लड़की पक्ष इसे प्रेम-विवाह बता रहा है.

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रविकांत ने नवादा व वंदना ने लखीसराय फैमिली कोर्ट में दी दस्तक

शादी के बाद रविकांत ने नवादा फैमिली कोर्ट में शादी मानने से इन्कार करते हुए केस दर्ज कराया. इधर, वंदना ने भी लखीसराय फैमिली कोर्ट में अपने ससुराल वालों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का केस किया. नवादा फैमिली कोर्ट ने रविकांत की याचिका खारिज कर दी. इसके बाद रविकांत ने पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. रविकांत को राहत देते हुए कोर्ट ने उसकी जबरन हुई शादी को रद्द करने का फैसला सुनाया है. उधर, लखीसराय फैमिली कोर्ट ने 2020 में वंदना के पक्ष में फैसला सुनाया था.

2017 में रविकांत ने कर ली दूसरी शादी

भागलपुर जिले के मकनपुर में 2017 में रविकांत ने दूसरी शादी कर ली. इसकी जानकारी मिलते ही वंदना ने 2017 में फिर लखीसराय कोर्ट में अपने ससुराल वालों के विरुद्ध केस किया. इसके बाद वंदना और रविकांत के परिवार वालों के बीच रिश्ता और दरकने लगा.

रविकांत और वंदना का मायके और ससुराल आना-जाना शुरू हुआ

2020 फैमिली कोर्ट, लखीसराय के फैसले के बाद रविकांत और वंदना का मायके और ससुराल आना-जाना शुरू हुआ. वंदना के अनुसार बीते 26 अप्रैल, 21 को उसके भाई ब्रजेश की शादी में भी रविकांत आया था और उसने बतौर पति वंदना के साथ शादी में सभी रस्में निभाई. मई, 21 में रविकांत छुट्टी के दौरान वंदना को अपने गांव रेवरा ले गया था.

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