धान-गेहूं के उत्पादन में आगे है बक्सर, अब दलहन पर दें जोर - कृषि वैज्ञानिक
कार्यक्रम में मौजूद अधिकारी. फोटो - प्रभात खबर
बक्सर में धान-गेहूं के साथ दलहन उत्पादन बढ़ाने पर ज़ोर दिया जा रहा है. कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को दलहन की वैज्ञानिक खेती, रोग-कीट नियंत्रण और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के गुर सिखाए. यह प्रशिक्षण किसानों के लिए आय का अतिरिक्त जरिया बनने की उम्मीद है.
आत्मा के बैनर तले शनिवार को बक्सर के संयुक्त कृषि भवन परिसर में किसानों के लिए एक दिवसीय दलहन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन जिला कृषि पदाधिकारी धर्मेंद्र कुमार, आत्मा के उपनिदेशक रणधीर कुमार, कृषि वैज्ञानिक डॉ. देवकरण, हरि गोविंद जायसवाल एवं राम केवल ने संयुक्त रूप से किया. प्रशिक्षण के दौरान किसानों को दलहन फसलों की वैज्ञानिक खेती, उत्पादन बढ़ाने तथा फसल में लगने वाले रोग एवं कीटों से बचाव के बारे में जानकारी दी गई.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला कृषि पदाधिकारी धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि बक्सर जिला धान और गेहूं के उत्पादन में काफी आगे है. जिले में इन फसलों की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. अब आवश्यकता है कि दलहन उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जाए. दलहन फसल किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का बेहतर माध्यम बनने के साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. उन्होंने किसानों से फसल चक्र में दलहन को शामिल करने और वैज्ञानिक तरीके से इसकी खेती करने की अपील की.
कृषि वैज्ञानिक डॉ. देवकरण ने कहा कि जिले की मिट्टी के स्वास्थ्य में लगातार गिरावट का एक प्रमुख कारण दलहन फसलों की खेती का कम होना है. दलहन फसलें मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा को बढ़ाने में सहायक होती हैं. इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है और आगामी फसलों के उत्पादन में भी लाभ मिलता है.
उन्होंने बताया कि वर्तमान में जिले में करीब 5,800 हेक्टेयर में दलहन की खेती की जा रही है. आने वाले समय में इसके रकबे को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है.इसके लिए किसानों को दलहन की खेती के प्रति जागरूक करने के साथ उन्हें उन्नत तकनीक की जानकारी देना जरूरी है.
प्रशिक्षण के दौरान कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को दलहन फसलों के लिए खेत की तैयारी, उन्नत बीज का चयन, बीज उपचार, बुआई का उचित समय, सिंचाई एवं उर्वरक प्रबंधन की जानकारी दी. साथ ही फसलों में लगने वाले विभिन्न रोगों और कीटों की पहचान तथा उनके नियंत्रण के वैज्ञानिक उपाय भी बताए गए.
इस दौरान किसानों ने दलहन फसल से संबंधित अपनी समस्याएं कृषि वैज्ञानिकों के समक्ष रखीं. किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के बीच रोग, कीट एवं फसल प्रबंधन को लेकर संवाद भी हुआ. कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के सवालों का जवाब देते हुए आवश्यक सुझाव दिए.अधिकारियों ने किसानों से दलहन की खेती का क्षेत्र बढ़ाने तथा मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए फसल विविधीकरण अपनाने की अपील की.
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