रोहिणी नक्षत्र बीत रहा, नहरें सूखी; सिकरौल-डुमरांव राजवाहा में अब तक नहीं पहुंचा पानी
खी पड़ी सिकरौल-डुमरांव राजवाहा नहर.
Buxar News : सिकरौल-कोरानसराय तथा कोरानसराय-डुमरांव राजवाहा में अब तक पानी नहीं छोड़ा गया है. नहरों में पानी नहीं पहुंचने से सिंचाई पर निर्भर सैकड़ों किसान धान का बिचड़ा नहीं डाल सके हैं.
Buxar News : ( विनीत कुमार मिश्रा की रिपोर्ट)
कृषि कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले रोहिणी नक्षत्र के 11 दिन बीत चुके हैं, जबकि इसके केवल चार दिन शेष बचे हैं. बावजूद इसके सिकरौल-कोरानसराय तथा कोरानसराय-डुमरांव राजवाहा में अब तक पानी नहीं छोड़ा गया है. नहरों में पानी नहीं पहुंचने से सिंचाई पर निर्भर सैकड़ों किसान धान का बिचड़ा नहीं डाल सके हैं, जिससे उनकी चिंता बढ़ती जा रही है.
सिकरौल-डुमरांव राजवाहा क्षेत्र के किसान दयाशंकर तिवारी, संतोष दुबे, विजेंद्र सिंह, माहेश्वरी दत्त तिवारी, शत्रुघ्न सिंह, शालिग्राम दुबे, गजेंद्र तिवारी, वीरेंद्र महतो, हरेराम कुशवाहा और सोना लाल सिंह ने बताया कि खेत तैयार हैं, लेकिन नहर में पानी नहीं होने के कारण धान का बीज नहीं डाला जा सका है. रोहिणी नक्षत्र में बिचड़ा डालने का उपयुक्त समय तेजी से निकलता जा रहा है.
कोरानसराय-डुमरांव राजवाहा क्षेत्र के किसानों की भी बढ़ी चिंता
नावाडीह गांव के किसान सुरेंद्र सिंह, हरेंद्र सिंह और भिखारी सिंह ने बताया कि रोहिणी नक्षत्र में डाला गया धान का बीज कीट एवं रोगों से अपेक्षाकृत सुरक्षित रहता है और पैदावार भी बेहतर होती है. लेकिन नहर में पानी नहीं आने से बिचड़ा डालने का कार्य प्रभावित हो रहा है. यदि समय पर बिचड़ा नहीं डाला गया तो खेती का पूरा चक्र पीछे खिसक सकता है.
बारिश नहीं, नहर भी सूखी; किसानों पर दोहरी मार
किसानों का कहना है कि एक ओर मौसम में उमस बनी हुई है और आसमान में बादल मंडरा रहे हैं, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं हो रही. दूसरी ओर नहरों में भी पानी नहीं छोड़ा गया है. ऐसे में खेत तैयार होने के बावजूद बुआई की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पा रही है. इससे किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है.
सिंचाई विभाग से जल्द पानी छोड़ने की मांग
क्षेत्र के किसानों ने सिंचाई विभाग से अविलंब सिकरौल-कोरानसराय एवं कोरानसराय-डुमरांव राजवाहा में पानी छोड़ने की मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि शीघ्र पानी उपलब्ध नहीं कराया गया तो धान की खेती प्रभावित होगी और उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा.
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