बक्सर: डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल में बिजली आपूर्ति ठप, पेड़ के नीचे नवजात का इलाज

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प्रसव के दौरान नवजात व अस्पताल कर्मी.

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Buxar News : डुमरांव के पूर्व विधायक डॉ. अजीत कुमार सिंह ने इसे सरकार, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की घोर लापरवाही बताया है.

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बक्सर डुमरांव से सुजीत कुमार ओझा की रिपोर्ट

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Buxar News :  डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल में बिजली आपूर्ति ठप हो जाने के कारण एक नवजात शिशु का इलाज अस्पताल परिसर में पेड़ के नीचे किए जाने की घटना ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है. इस घटना को लेकर प्रशासनिक लापरवाही और बुनियादी सुविधाओं की कमी पर सवाल उठ रहे हैं.

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए डुमरांव के पूर्व विधायक एवं इंकलाबी नौजवान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार सिंह ने इसे सरकार, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की घोर लापरवाही बताया है. उन्होंने कहा कि यह घटना अत्यंत शर्मनाक और मानवता को झकझोर देने वाली है.

स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल

डॉ. सिंह ने कहा कि सरकार एक ओर विकास और सुशासन के बड़े-बड़े दावे करती है, जबकि दूसरी ओर सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव नवजात शिशुओं के जीवन को खतरे में डाल रहा है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब अस्पतालों में बिजली, बैकअप व्यवस्था और जीवनरक्षक उपकरणों के संचालन की गारंटी नहीं है, तो आम जनता सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर कैसे भरोसा करे.

उन्होंने यह भी कहा कि पूरे बक्सर जिले में अब तक एक भी अत्याधुनिक आईसीयू स्थापित नहीं किया जा सका है, जिसके कारण गंभीर मरीजों को पटना, वाराणसी या अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है.

चिकित्सकों और संसाधनों की कमी का मुद्दा

डॉ. अजीत सिंह ने अपने विधायक कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने लगातार विधानसभा में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, चिकित्सकों की नियुक्ति और अस्पतालों के आधुनिकीकरण की मांग उठाई थी. उन्हीं प्रयासों के तहत मातृ एवं नवजात देखभाल इकाई (एमएनसीयू) की शुरुआत हो सकी, लेकिन वर्तमान में भी डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की भारी कमी बनी हुई है.

उच्चस्तरीय जांच और सुधार की मांग

डॉ. सिंह ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल सहित पूरे बक्सर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को तत्काल सुदृढ़ करने की अपील की है. उन्होंने अस्पतालों में निर्बाध बिजली आपूर्ति, पर्याप्त जनरेटर व्यवस्था, चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति तथा एक आधुनिक आईसीयू की स्थापना की मांग भी की.

क्या कहते हैं सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉ. शिव प्रसाद चक्रवर्ती ने कहा कि एमएनसीयू के गेट पर चिकित्सकों द्वारा किस परिस्थिति में इलाज किया गया, इसकी जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है. जांच रिपोर्ट आने के बाद मामला स्पष्ट हो पाएगा.

क्या कहती हैं अस्पताल उपाधीक्षक

अनुमंडलीय अस्पताल डुमरांव की उपाधीक्षक डॉ. प्रेमा कुमारी ने बताया कि अस्पताल के आधे भवन में अचानक शॉर्ट सर्किट होने से बिजली आपूर्ति बाधित हो गई थी. जनरेटर की आपूर्ति भी प्रभावित थी. ऐसी स्थिति में गर्मी से राहत देने और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए एमएनसीयू के गेट पर इलाज किया जा रहा था. उन्होंने बताया कि एक नवजात की हालत अत्यंत गंभीर थी, जिसका इलाज चिकित्सकों द्वारा किया जा रहा है.

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