डेंगू के लिए अस्पताल में बेड आरक्षित

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 20 Aug 2024 10:06 PM

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डेंगू व चिकनगुनिया के क्लीनिकल मैनेजमेंट के लिए जिला स्तर पर सभी चिकित्सा पदाधिकारियों एवं निजी अस्पताल के चिकित्सकों का एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया

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बक्सर, 20 अगस्त- डेंगू व चिकनगुनिया के क्लीनिकल मैनेजमेंट के लिए जिला स्तर पर सभी चिकित्सा पदाधिकारियों एवं निजी अस्पताल के चिकित्सकों का एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया. पारा मेडिकल प्रशिक्षण संस्थान के सभागार में प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन सिविल सर्जन डॉ. सुरेश चन्द्र सिन्हा एवं जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ शैलेन्द्र कुमार ने संयुक्त रूप से किया. प्रशिक्षण में सभी प्रखंडों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, चिकित्सा पदाधिकारी एवं आयुष चिकित्सा के साथ साथ बीएचएम और बीसीएम ने भी हिस्सा लिया. कार्यक्रम के दौरान चिकित्सा पदाधिकारियों को डेंगू एवं चिकनगुनिया के क्लीनिकल मैनेजमेंट से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया. प्रशिक्षण के दौरान उपस्थित चिकित्सकों को डेंगू के मरीज को प्रारंभिक अवस्था में ही चिन्हित कर समुचित इलाज के गुण बताये गए. ताकि चिकित्सक ससमय सही उपचार प्रारंभ कर सके और जटिलताओं को रोका जा सके. निदान के साथ ही रोगियों को प्रतिवेदित करने और व्यापक निरोधात्मक कार्रवाई प्रारंभ करने पर भी बल दिया जाए, जिससे डेंगू के प्रसार को रोका जा सके. सिविल सर्जन डॉ. सुरेश चंद्र सिन्हा ने बताया कि बरसात के मौसम में डेंगू फैलाने वाले एडिस मच्छर घरों के आसपास बिखरे टूटे फूटे बर्तनों, गमलों, टायर, छोटे छोटे प्लास्टिक या कागज के डिस्पोजेबल कप, नारियल के खोपरे आदि में जमा बारिश के पानी में अंडे देते हैं जो एक सप्ताह में मच्छर बन जाते हैं. इसे रोकने के लिए घरों के आस पास, छतों पर या घर के अन्दर पानी जमा न होने दें और सप्ताह में दो बार पानी को बदलते रहें. एडिस मच्छर साफ पानी में पनपता है और दिन मे ही काटता है.

डेंगू व चिकनगुनिया नियंत्रण के लिए अस्पताल बेड आरक्षित :

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. शैलेन्द्र कुमार ने कहा कि डेंगू एवं चिकनगुनिया नियंत्रण के लिए सदर अस्पताल में 10 बेड, अनुमंडलीय अस्पतालों में 5 बेड तथा सभी सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 2-2 बेड डेंगू वार्ड के लिए सुरक्षित किया गया है. सभी बेड को मेडिकेटेड मच्छरदानी युक्त किया गया है. साथ ही संबंधित मरीजों के उपचार के लिए पर्याप्त मात्रा में दवा की व्यवस्था सभी अस्पतालों में उपलब्ध रखने का निर्देश दिया गया है. जिला में रैपिड रिस्पांस टीम का गठन किया गया है.

सदर अस्पताल में कंफर्मेटरी डेंगू जांच के लिए एलिजा किट एवं एलिजा रीडर मशीन उपलब्ध :

जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में डेंगू की जांच के लिए एनएस1 एंटीजन किट उपलब्ध है. सदर अस्पताल में कंफर्मेटरी डेंगू जांच के लिए एलिजा किट एवं एलिजा रीडर मशीन उपलब्ध है. फागिंग मशीन जिला स्तर पर कार्यरत एक एवं सामुदायिक/प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी 1-1 कार्यरत है। डेंगू के मरीज के पुष्टि होने पर मरीज के निवास स्थान के 500 मीटर क्षेत्रों में टेक्निकल मालाथियोन द्वारा फागिंग तथा लार्विसाइडल का छिड़काव कराने का निर्देश दिया गया है. साथ ही, इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों द्वारा एक्टिव सर्विलांस कराने का निर्देश दिया गया है, ताकि नए मरीजों की खोज की जा सके, डेंगू से बचाव के लिए सतर्कता सहित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. जनसमुदाय से उचित योजना के तहत डेंगू की रोकथाम एवं गतिविधि में सहभागिता ली जाएगी. प्रशिक्षण कार्यक्रम में सीडीओ डॉ शालिग्राम पाण्डेय, एनसीडीओ डॉ. संजय कुमार, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. विनोद कुमार सिंह, वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी पंकज कुमार, आईडीएसपी ईपीडेमियोलॉजिस्ट आशुतोष चतुर्वेदी एवं एफएलए रजनीश कुमार सहित अन्य कर्मी उपस्थित थे.

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