डॉक्टरों के ओपीडी बहिष्कार से बक्सर में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित, सैकड़ों मरीज बिना इलाज लौटे

Author Manish mishra|Edited by Yuvraj Ratan
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अरवल में सिविल सर्जन से मारपीट के विरोध में बक्सर में ओपीडी ठप, इमरजेंसी ही चालू

प्रतीकात्मक तस्वीर

Buxar News : बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) ने अरवल सदर अस्पताल में सिविल सर्जन के साथ हुई हिंसा के विरोध में बक्सर सदर अस्पताल सहित सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया. इस कारण सैकड़ों मरीज बिना इलाज के लौट गए.

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Buxar News : अरवल सदर अस्पताल में सिविल सर्जन के साथ हुई हिंसात्मक घटना और कथित अमर्यादित व्यवहार के विरोध में बुधवार को बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) के आह्वान पर बक्सर जिले के सदर अस्पताल सहित सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया गया. इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ा और सैकड़ों लोग बिना इलाज कराए वापस लौटने को मजबूर हुए.

रजिस्ट्रेशन काउंटर बंद, मरीजों को हुई परेशानी

संघ के निर्णय के अनुसार राज्यभर के सरकारी चिकित्सकों ने बुधवार को ओपीडी में मरीजों का इलाज नहीं किया. सदर अस्पताल बक्सर में सुबह से ही रजिस्ट्रेशन काउंटर बंद रहे और डॉक्टर ओपीडी कक्षों में नहीं बैठे. सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए पहुंचे मरीज घंटों इंतजार करने के बाद निराश होकर लौट गए.

अरवल की घटना के विरोध में किया गया बहिष्कार

भासा ने बताया कि ओपीडी बहिष्कार का मुख्य कारण अरवल सदर अस्पताल में सिविल सर्जन के साथ हुई मारपीट की घटना के आरोपियों के खिलाफ अब तक ठोस कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होना है. संघ का कहना है कि इस घटना से पूरे राज्य के सरकारी चिकित्सकों में असुरक्षा और रोष का माहौल है. संगठन ने पहले भी सरकार से दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की थी, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन का निर्णय लिया गया.

इमरजेंसी और जीवनरक्षक सेवाएं रहीं जारी

अस्पताल प्रशासन के अनुसार ओपीडी सेवाएं भले ही बंद रहीं, लेकिन इमरजेंसी, दुर्घटना और प्रसव संबंधी सभी आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होती रहीं. चिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि गंभीर मरीजों के इलाज में किसी प्रकार की बाधा नहीं आने दी गई.

ग्रामीण क्षेत्रों से आए मरीज सबसे अधिक प्रभावित

ओपीडी बंद रहने से सबसे अधिक परेशानी दूर-दराज के गांवों से इलाज कराने आए मरीजों को हुई. कई मरीज सुबह ही अस्पताल पहुंच गए थे, लेकिन ओपीडी बंद होने की जानकारी मिलने के बाद उन्हें बिना पर्ची कटाए ही लौटना पड़ा. कुछ मरीजों ने मजबूर होकर निजी क्लीनिकों का रुख किया.

सुरक्षा की गारंटी मिलने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी

बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ ने सरकार से मांग की है कि अरवल घटना के दोषियों के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए और सभी सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं. संघ ने चेतावनी दी है कि जब तक चिकित्सकों की सुरक्षा की लिखित गारंटी नहीं मिलती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.

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