गोलंबर पार्क की रामायणकालीन पेंटिंग पर विवाद, बिना अनुमति कराये काम को लेकर उठे सवाल

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गोलंबर पार्क की दीवार पर बने पूर्व की पेंटिंग पर व्हाइटनर लगाते पेंटर | Prabhat Khabar Network

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Buxar News : बक्सर के गोलंबर पार्क की रामायणकालीन पेंटिंग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. बिना प्रशासनिक स्वीकृति के बनाई गई इन पेंटिंग्स को हटाने का आदेश दिया गया है, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी है. इस मामले ने नगर परिषद की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं.

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Buxar News : नगर परिषद के कार्यों में अनियमितता का एक और मामला सामने आया है. नगर के गोलंबर स्थित पार्क की दीवारों पर बनी आकर्षक पेंटिंग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी कुमार ऋत्विक ने कहा है कि यह पेंटिंग बिना किसी प्रशासनिक स्वीकृति और नगर परिषद की जानकारी के करायी गयी थी.

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, नगर परिषद द्वारा गोलंबर पार्क की दीवारों पर रामायण काल से जुड़े प्रसंगों समेत अन्य आकर्षक पेंटिंग करायी गयी थी. कार्य एजेंसी ने करीब दो माह पूर्व यह काम पूरा किया था. पेंटिंग में भगवान श्रीराम, ऋषि विश्वामित्र और रामायण से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को दर्शाया गया था, जो उत्तर प्रदेश से बिहार में प्रवेश द्वार के रूप में बक्सर की धार्मिक पहचान को प्रदर्शित कर रहे थे.

दो माह बाद पुरानी पेंटिंग पर कराया जा रहा व्हाइटनर

बताया जाता है कि इस पूरे कार्य के लिए न तो जिला प्रशासन से स्वीकृति ली गयी थी और न ही नगर प्रशासन से अनुमति प्राप्त की गयी थी. कार्य पूरा होने के करीब दो माह बाद अब इस पेंटिंग को लेकर सवाल उठने लगे हैं. मामला उस समय सामने आया, जब पहले से बनी रामायण से संबंधित पेंटिंग पर व्हाइटनर लगाने का नगर परिषद की ओर से निर्देश दिया गया.

इसी बीच जिला पदाधिकारी शाहिला द्वारा पेंटिंग पर आपत्ति जताये जाने की बात सामने आयी है. उनके निर्देश पर अब गोलंबर पार्क की दीवारों पर उनके द्वारा चयनित डिजाइन के अनुसार नयी पेंटिंग कराने का आदेश नगर परिषद को दिया गया है. बुधवार को दो माह पुरानी पेंटिंग पर सफेदी कर दूसरी पेंटिंग कराने का काम शुरू हुआ. इसके बाद सरकारी राशि के दुरुपयोग को लेकर भी सवाल उठने लगे.

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कार्यपालक पदाधिकारी ने कहा- पेंटिंग के लिए नहीं दी गयी थी प्रशासनिक स्वीकृति

मामले में नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी कुमार ऋत्विक ने बताया कि पूर्व में करायी गयी पेंटिंग के लिए कार्य एजेंसी को किसी प्रकार की प्रशासनिक स्वीकृति नहीं दी गयी थी. उन्होंने कहा कि इस कार्य को लेकर नगर परिषद की ओर से किसी तरह का भुगतान भी नहीं किया गया है. एजेंसी ने अपनी ओर से यह काम कराया था, जिसकी जानकारी नगर परिषद को नहीं थी.

उन्होंने बताया कि यह कार्य उस समय कराया गया था, जब वे बक्सर में पदस्थापित नहीं थे. कार्यपालक पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि पेंटिंग के लिए नगर परिषद की ओर से कोई भुगतान नहीं किया गया है. उन्होंने आगे बताया कि पेंटिंग को लेकर जिला पदाधिकारी ने असंतोष व्यक्त किया है. उनके निर्देश पर एक एजेंसी को सभी पेंटिंग पर व्हाइटनर लगाने को कहा गया है. इसके बाद जिला पदाधिकारी द्वारा चयनित आकृतियों के अनुसार नयी पेंटिंग करायी जायेगी.

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मौखिक आदेश पर काम कराने की कार्यशैली पर भी उठे सवाल

नगर परिषद क्षेत्र में पूर्व से ही मौखिक आदेश पर निर्माण कार्य कराये जाने के आरोप लगते रहे हैं. बताया जाता है कि कई मामलों में कार्य पूरा होने के बाद एक साथ योजना की प्रशासनिक स्वीकृति और भुगतान किया जाता रहा है. यहां तक कि अधिकारियों और कर्मियों को भी भुगतान के समय योजना की फाइल पहुंचने पर ही इसकी जानकारी मिलती रही है.

गोलंबर पार्क की दीवारों पर पेंटिंग कराने वाली एजेंसी का मामला भी इसी तरह की कार्यशैली से जुड़ा बताया जा रहा है. एजेंसी ने करीब दो माह पूर्व बिना किसी कार्य योजना और नगर परिषद की प्रशासनिक स्वीकृति के पेंटिंग का काम पूरा कर दिया. इस मामले ने नगर परिषद की कार्यशैली और गुणवत्तापूर्ण कार्य को लेकर सवाल खड़े कर दिये हैं.

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रामायणकालीन पेंटिंग हटाने से स्थानीय लोगों में नाराजगी

वहीं, प्रशासन के इस फैसले को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है. लोगों का कहना है कि गोलंबर पार्क की दीवारों पर बनी पेंटिंग बक्सर की धार्मिक पहचान को दर्शा रही थी. बक्सर को भगवान श्रीराम की शिक्षास्थली और ऋषि विश्वामित्र की तपोभूमि के रूप में जाना जाता है. ऐसे में रामायण से जुड़ी आकृतियों को हटाना शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के साथ खिलवाड़ है.

स्थानीय लोगों ने प्रशासन के फैसले को उपेक्षापूर्ण बताते हुए कहा कि पार्क की दीवारों पर पहले से बनी पेंटिंग को हटाने के बजाय उसका संरक्षण किया जाना चाहिए था.

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