हत्या के मामले में आठ आरोपितों को उम्रकैद

Updated at : 06 May 2017 1:14 AM (IST)
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हत्या के मामले में आठ आरोपितों को उम्रकैद

सजा पानेवालों में महिला भी शामिल, लगाया गया अर्थदंड बक्सर, कोर्ट : हत्या के एक मामले में एडीजे-5 की कोर्ट ने शुक्रवार को दोषी पाते हुए एक महिला समेत आठ अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनायी है. इसके साथ ही 5-5 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है. गवाहों की गवाही और अभियोजन पक्ष […]

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सजा पानेवालों में महिला भी शामिल, लगाया गया अर्थदंड

बक्सर, कोर्ट : हत्या के एक मामले में एडीजे-5 की कोर्ट ने शुक्रवार को दोषी पाते हुए एक महिला समेत आठ अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनायी है. इसके साथ ही 5-5 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है. गवाहों की गवाही और अभियोजन पक्ष की दलील को सुनने के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंचम अरुण कुमार श्रीवास्तव ने हत्या के मामले में दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनायी. न्यायालय ने पूर्व में ही आरोपितों को दोषी पाया था.
बताते चलें कि 12 जुलाई 2013 को नगर के सोहनीपट्टी मुहल्ले में लाठी-डंडे से पीट-पीट कर इनामुल हक की हत्या कर दी गयी थी तथा उसके पुत्र मो. रिजवान को बुरी तरह जख्मी कर दिया गया था. इसको लेकर मो. रिजवान के फर्द बयान पर कुल नौ लोगों पर प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी, जिसमें अकबर अली, मो. अली, अख्तर अली, इब्राहिम, बेबी खातून, बदरूद्दीन, शौकत अली एवं अमजद अली के अलावा एक अन्य आरोपित सलीम अली का नाम शामिल है, लेकिन जुबेनाइल होने के कारण सुनवाई के लिए उसका मामला जुबेनाइल कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया, जो सुनवाई में लंबित है.
हत्या का कारण भूमि विवाद था
हत्या के कारण जमीनी विवाद बताया गया था़ जहां पीड़ित पक्षों द्वारा आरोपितों के विरुद्ध पहले से मुकदमा दाखिल किया गया था. विपक्षियों द्वारा बार-बार मुकदमा वापस लेने के लिए धमकी दी जा रही थी, लेकिन जब ऐसा नहीं किया गया, तो बेरहमी के साथ पीट-पीट कर पिता-पुत्र दोनों को बुरी तरह जख्मी कर दिया गया, जिसमें पिता इनामुल हक की मौत हो गयी थी.
सात लोगों की हुई गवाही : अभियोजन पक्ष की ओर से मामले में कुल सात गवाहों की गवाही कलमदर्ज की गयी. न्यायालय ने सबूतों एवं बयानातों के आधार पर हत्या एवं हत्या के प्रयास जैसे संगीन दफाओं में दोषी पाते हुए सभी अभियुक्तों को भारतीय दंड विधान की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास एवं 5-5 हजार रुपये जुर्माने की सजा तथा दफा 307 के तहत 5 वर्ष के कारावास एवं 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनायी. दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी. मामले की सुनवाई में सरकार की ओर से अपर लोक अभियोजक योगेंद्र प्रसाद चौरसिया ने बहस में हिस्सा लिया.
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