ऑल इंडिया कॉस्ट एकाउंट्स परीक्षा में विकास को गोल्ड मेडल

Updated at : 11 Apr 2017 5:27 AM (IST)
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ऑल इंडिया कॉस्ट एकाउंट्स परीक्षा में विकास को गोल्ड मेडल

ब्रह्मपुर के विकास ने पूरे देश में अपने प्रतिभा का लहराया पचरम ब्रह्मपुर : कौन कहता है आसमान में सुराग नहीं हो सकता… एक पत्थर तो तबीयत से उछालों यारों. इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है ब्रह्मपुर के एक होनहार छात्र ने. प्रखंड के योगियां गांव निवासी विकास कुमार मिश्रा ने कॉस्ट एकाउंट्स ऑफ […]

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ब्रह्मपुर के विकास ने पूरे देश में अपने प्रतिभा का लहराया पचरम

ब्रह्मपुर : कौन कहता है आसमान में सुराग नहीं हो सकता… एक पत्थर तो तबीयत से उछालों यारों. इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है ब्रह्मपुर के एक होनहार छात्र ने. प्रखंड के योगियां गांव निवासी विकास कुमार मिश्रा ने कॉस्ट एकाउंट्स ऑफ इंडिया की मेरिट में पूरे भारत में 16 वां स्थान पाया है. उनकी इस सफलता ने उन्हें गोल्ड मेडल दिलाया है. विकास के इस गौरव पर प्रखंड सहित पूरे जिले और अपने राज्य को नाज है. एक किसान का बेटा अपने प्रतिभा,
मेहनत और लगन के बल पर इस मुकाम पर पहुंचा है, जो प्रखंडवासियों के लिए गर्व की बात है. विकास को कॉस्ट एकाउंट्स ऑफ इंडिया के द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में बंगाल के गवर्नर केसरीनाथ त्रिपाठी के हाथों प्रमाणपत्र और गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया गया. सम्मानित होने के बाद अपने पैतृक गांव योगियां आए विकास ने प्रभात खबर से बातचीत में बताया कि एक छोटे से गांव और सरकारी स्कूल से शिक्षा प्राप्त कर देश के सबसे कठिन मानेवाली परीक्षा में सफलता पाकर प्रोवेशन के तौर पर फिलहाल एचइआइएल में ज्वाइन किया हूं.
गांव से ही की मैट्रिक तक पढ़ाई
विकास की प्रारंभिक शिक्षा योगियां सरकारी विद्यालय में हुई. उच्च विद्यालय निमेज से मैट्रिक की परीक्षा 2003 में व 2005 में इंटर की परीक्षा पास किया. इसके बाद एमवी कॉलेज बक्सर से बीकॉम की परीक्षा 2011 में 67 प्रतिशत अंकों के साथ पास करने के बाद दिल्ली के एक संस्थान से कॉस्ट एकाउंट्स की तैयारी शुरू की. उपलब्धि का श्रेय वह अपने माता-पिता को देते हैं. जिन्होंने हर समय इन्हें लक्ष्य के प्रति जागरूक करने का प्रयत्न करते रहे और अपने द्वारा बतायी बातों को मंत्र के रूप में जीवन में अनुसरण करने की प्रेरणा देते रहे.
पोलियो कर्मी हैं विकास के पिता
उनके पिता विमल कुमार मिश्रा बताते हैं कि प्रारंभ के दिनों में वह एक औसत छात्र थे, लेकिन परीक्षा में काफी मेहनत किये और प्रथम श्रेणी में अच्छा अंक प्राप्त किये. घर की आर्थिक स्थिति कुछ अच्छी नहीं रहने के कारण अपना सारा ध्यान अपने लक्ष्य की तरफ रखें. आज भी इनके पिता जी पल्स पोलियो अभियान के सदस्य के रूप में कार्यरत हैं. विकास ने ग्रामीण परिवेश के छात्रों के लिए उन्होंने कठिन परिश्रम और लक्ष्य के प्रति समर्पित भावना से पढ़ाई करने की बात कही.
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